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दूसरा पहलू: मौसम हमेशा एक-सा क्यों नहीं रहता?, पृथ्वी के झुकाव में छिपा है पूरा विज्ञान
Tue, 28 Apr 2026 07:31 AM IST
Devesh Tripathi
स्टेफनी स्पेरा
स्टेफनी स्पेरा
Published by: Devesh Tripathi
Updated Tue, 28 Apr 2026 07:31 AM IST
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पृथ्वी पर क्यों बदलवा है मौसम?
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अमर उजाला प्रिंट
विस्तार
हमेशा गर्मी क्यों नहीं रह सकती? इसका सीधा जवाब है-पृथ्वी का झुकाव। पर इसके पीछे की कहानी थोड़ी और दिलचस्प तथा वैज्ञानिक है। एक सच्चाई यह भी है कि कोई भी मौसम हमेशा नहीं रहता। इसका कारण समझने के लिए पहले पृथ्वी को समझना जरूरी है।पृथ्वी पूरी तरह गोल नहीं, बल्कि थोड़ी चपटी गोलाकार है। यह हर साल सूरज के चारों ओर एक चक्कर लगाती है, जिसे उसकी कक्षा (ऑर्बिट) कहते हैं। यह कक्षा पूरी तरह गोल न होकर अंडाकार है। इसलिए, कभी पृथ्वी सूरज के पास होती है, तो कभी दूर। अक्सर लोग सोचते हैं कि यही दूरी मौसम बदलती है, पर यह धारणा गलत है। दिलचस्प बात यह है कि उत्तरी गोलार्ध में सर्दियों के दौरान पृथ्वी सूरज के ज्यादा करीब होती है, जबकि गर्मियों में थोड़ी दूर, यानी मौसम का असली कारण दूरी नहीं है। पृथ्वी के बीचों-बीच खींची गई काल्पनिक रेखा, जिसे भूमध्य रेखा कहते हैं, का ऊपरी हिस्सा उत्तरी गोलार्ध और निचला हिस्सा दक्षिणी गोलार्ध कहलाता है। पृथ्वी के बीच से एक और काल्पनिक रेखा भी गुजरती है, जिसे धुरी (एक्सिस) कहते हैं। यह उत्तरी से दक्षिणी ध्रुव तक जाती है। पृथ्वी सूरज के साथ अपनी धुरी पर भी एक लट्टू की तरह घूमती है। यही घूर्णन दिन और रात बनाता है। दरअसल, पृथ्वी की धुरी सीधी नहीं है। यह करीब 23.5 डिग्री झुकी हुई है और एक ही दिशा में रहती है। यही झुकाव मौसमों का असली कारण है। मई-जून में उत्तरी गोलार्ध सूरज की ओर झुका होता है, जिससे यहां गर्मी का मौसम होता है। उसी समय दक्षिणी गोलार्ध सूरज से दूर झुका होता है, जिससे वहां सर्दी होती है। जब पृथ्वी दिसंबर में अपनी कक्षा के दूसरी ओर पहुंचती है, तो दक्षिणी गोलार्ध में गर्मी व उत्तरी गोलार्ध में सर्दी आ जाती है।
गर्मी को समझने के दो तरीके हैं। मौसम विज्ञान के अनुसार, उत्तरी गोलार्ध में जून, जुलाई और अगस्त गर्मी के महीने होते हैं। वहीं खगोल विज्ञान के अनुसार, गर्मी की शुरुआत ग्रीष्म संक्रांति से होती है, यानी वह दिन, जब साल का सबसे लंबा दिन व सबसे छोटी रात होती है, जो आमतौर पर 20 से 22 जून के बीच पड़ती है। इसके बाद दिन छोटे होने लगते हैं, जब तक कि सितंबर में शरद विषुव न आ जाए, जब दिन और रात बराबर हो जाते हैं।
निष्कर्ष यह है कि गर्मी हमेशा नहीं रह सकती, क्योंकि पृथ्वी का झुकाव और उसकी गति लगातार बदलती धूप का वितरण तय करती है।
- द कन्वर्सेशन