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दूसरा पहलू: जब हम डिजिटल स्क्रीन पर पढ़ते हैं, स्वीडन की कक्षाओं में क्यों कम किए जा रहे डिजिटल उपकरण

Mon, 11 May 2026 08:30 AM IST
Pavan एरिक डी. राइक्ले
एरिक डी. राइक्ले Published by: Pavan Updated Mon, 11 May 2026 08:30 AM IST
सार

वेबपेज लोगों में केवल मुख्य जानकारी तेजी से खोजने की आदत डालते हैं, जिससे गहराई से पढ़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। समस्या उन डिजिटल उपकरणों से पढ़ने में आती है, जिनमें विज्ञापन, पॉप-अप, वीडियो बच्चों का ध्यान भटकाते हैं। दृश्य जानकारी को आंखों से मस्तिष्क तक पहुंचने में लगभग 60 मिलीसेकंड और शब्द पहचानने में अतिरिक्त 100 से 300 मिलीसेकंड लगते हैं। यही कारण है कि पढ़ने की गति की एक सीमा होती है।

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When we learn on digital screens, why digital devices are being reduced in Swedish classrooms
जब हम डिजिटल स्क्रीन पर पढ़ते हैं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्वीडन सरकार ने कुछ समय पहले घोषणा की थी कि वह कक्षाओं में डिजिटल उपकरणों के उपयोग को कम करके फिर से किताबों की ओर रुख कर रही है। सरकार ने छात्रों के बढ़ते स्क्रीन टाइम को इसका मुख्य कारण बताया है। डिजिटल स्क्रीन व किताबों पर पढ़ने से जुड़ा विज्ञान इसके प्रभावों के बारे में क्या बताता है? भले ही पढ़ना आसान काम लगे, लेकिन वास्तव में यह एक जटिल क्षमता है, जिसे सीखना पड़ता है।
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जब हम पढ़ते हैं, तो हमारी आंखें तेजी से एक शब्द से दूसरे शब्द तक जाती हैं। इन्हें ‘सैकेड्स’ कहा जाता है। आंखें केवल छोटे-छोटे ठहरावों के दौरान ही शब्दों को स्पष्ट रूप से देख पाती हैं। शोध बताते हैं कि एक बार में हमारी दृश्य जानकारी ग्रहण करने की क्षमता सीमित होती है। अंग्रेजी जैसी भाषाओं में आंखें बाईं ओर केवल 2-3 अक्षरों और दाईं ओर 8-12 अक्षरों तक ही स्पष्ट पहचान कर पाती हैं। किसी शब्द को पहचानने में भी समय लगता है। दृश्य जानकारी को आंखों से मस्तिष्क तक पहुंचने में लगभग 60 मिलीसेकंड और शब्द पहचानने में अतिरिक्त 100 से 300 मिलीसेकंड लगते हैं।
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यही कारण है कि पढ़ने की गति की एक सीमा होती है और बहुत तेज पढ़ने पर समझने की क्षमता घटने लगती है। पढ़ने की अच्छी क्षमता वर्षों के अभ्यास से विकसित होती है। इसमें दृष्टि, ध्यान, शब्द पहचान, भाषा समझ और आंखों की गतिविधियों से जुड़े मस्तिष्क के हिस्से एक साथ काम करते हैं। ई-रीडर जैसे उपकरणों में किताब और डिजिटल पढ़ाई में अधिक अंतर नहीं होता, क्योंकि वे पढ़ने की प्रक्रिया को सहयोग देते हैं। लेकिन समस्या उन उपकरणों में आती है, जिनमें विज्ञापन, पॉप-अप, वीडियो ध्यान भटकाते हैं।
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छोटे बच्चों में ध्यान नियंत्रित करने की क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती, इसलिए बार-बार आने वाले व्यवधान उनकी समझ को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ शोध बताते हैं कि वेबपेज लोगों में केवल जानकारी तेजी से खोजने की आदत डाल सकते हैं, जिससे गहराई से पढ़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। कोविड-19 के दौरान डिजिटल पढ़ाई तेजी से बढ़ी, लेकिन इसके दीर्घकालिक प्रभाव अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। चूंकि पढ़ने की क्षमता किसी व्यक्ति की शिक्षा, सामाजिक स्थिति और जीवन की गुणवत्ता से गहराई से जुड़ी होती है, इसलिए डिजिटल पढ़ाई के दीर्घकालिक प्रभावों का अध्ययन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। - (द कन्वर्सेशन)
 
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