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बंगाल विधानसभा चुनाव 2021: बरानगर सीट, जहां हार गए थे माकपा के दिग्गज नेता ज्योति बसु

Thu, 08 Apr 2021 04:34 PM IST
Bidisha Biswas बिदिशा बिस्वास
Updated Thu, 08 Apr 2021 04:34 PM IST
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west bengal election 2021 ground report of baranagar assembly
बरानगर सीट भाजपा की चिंता बढ़ा रही है।  - फोटो : ANI

उत्तर कोलकाता की सीमा पर स्थित सिंथी सर्कस मैदान में मेला लगा हुआ है। चौराहे पर सैकड़ों ऑटो यात्रियों का इंतजार कर रहे हैं। अंग्रेजों के जमाने की बैरकपुर ट्रंक रोड के दोनों तरफ ऑटो स्टैंड में तृणमूल कांग्रेस की यूनियन के कार्यालय हैं। चारों ओर तृणमूल कांग्रेस की प्रचार सामग्री अटी पड़ी है। सभी प्रमुख दीवारों पर तृणमूल के प्रत्याशी तापस राय के समर्थन में लेखन किया गया है। कुछ दीवारों पर संयुक्त मोर्चा प्रत्याशी अमल मुखोपाध्याय के लिए भी लेखन हुआ दिखता है। भाजपा प्रत्याशी पर्णो मित्रा अब तक प्रचार में यहां पिछड़ी दिखती हैं।

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बरानगर विधानसभा की यह तस्वीर राज्य में असल परिवर्तन का दावा कर रही भाजपा की चिंता बढ़ा रही है, लेकिन चुनाव प्रबंधन में जुटे तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों को विश्वास में लेने के बाद एक और कोण सामने आया।
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वाम वोट न जाएं भाजपा में इसकी रणनीति बनाई
तृणमूल समर्थक देवी बोस के मुताबिक यहां जानबूझकर संयुक्त मोर्चा के लिए कुछ दीवारें छोड़ी गई हैं। इससे आम लोग यह समझें कि मैदान में  संयुक्त मोर्चा है न कि भाजपा। दरअसल बीते लोकसभा चुनाव में बरानगर व राज्य की अधिकांश सीटों पर वाम का वोट भाजपा की ओर स्थानांतरित हुआ था। इस बार भी ऐसा न हो इसके लिए जितने प्रयास वाममोर्चे के नेता कर रहे हैं उतनी ही कोशिश तृणमूल कांग्रेस भी कर रही है। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बार सत्ता की चाभी उधेड़बुन में रहने वाले मतदाता और पूर्व वामपंथियों के हाथ में हैं, इसलिए तृणमूल का यह दांव इस क्षेत्र में कारगर हो सकता है।  
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यहां हो चुके हैं बड़े उलटफेर
हरिसभा के भाजपा कार्यकर्ता संदीप दास इससे इत्तेफाक नहीं रखते। दास कहते हैं कि बरानगर सीट बड़े बड़े उलटफेर कर चुकी है। तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेताओं की अकूत सम्पति मतदाताओं को दिख रही है। सबसे पुरानी पालिका बरानगर में पेयजल की समस्या साबित करती है कि जनप्रतिनिधियों ने लोगों के साथ विश्वासघात किया है। वहीं उन्हें इस बात का भरोसा है कि विधानसभा के सभी 252 मतदान केन्द्रों में इस बार पार्टी के एजेंट बैठेंगे।

मध्यमवर्गीय परिवार तय करेंगे जीत किसकी
बरानगर विधानसभा के ज्यादातर इलाके कॉलोनियों, पुराने मोहल्लों व मध्यमवर्गीय परिवारों वाले हैं। जिनमे पेंशनधारियों, सरकारी और निजी संस्थानों के कर्मियोंकी अच्छी खासी संख्या है। केन्द्र सरकार के पेंशनर अमल भट्टाचार्य कहते हैं- बैंक में जमा धनराशि के सूद में कमी हो रही है। खर्च में कटौती करनी पड़ती है। वे केन्द्र सरकार से तो खफा हैं लेकिन राज्य सरकार के बारे में कुछ कहने से झिझकते हैं। उनके साथ बैठ कर अड्डा कर रहे देवाशीष मजूमदार राष्ट्रीय -अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों की जानकारी से लैस हैं। उन्हें भाजपा के डबल इंजन वाली सरकार का जुमला भाता है लेकिन उनके अन्य साथी गर्मामर्ग बहस शुरू कर देते हैं। मजूमदार कहते हैं एक ही बेटा है जो हैदराबाद में नौकरी करता है। कोलकाता में नौकरी के अवसर होते तो उनका बेटा बुढापे की लाठी बनता।   

ज्योति बसु को मिली थी जीवन की एकमात्र हार
अपने राजनीतिक जीवन में माकपा के कद्दावर नेता ज्योति बसु को एक बार ही हार मिली थी। वर्ष  1972 का था और सीट यही बरानगर थी। उन्हें हराने वाले भाकपा के शिवदत्त भट्टाचार्य अब नहीं रहे। उनके पुत्र कल्लोल भट्टाचार्य जो अब तृणमूल कांग्रेस के समर्थक हैं, कहते हैं कि क्षेत्र में वामपंथी आंदोलन नहीं है। उसके संस्कार, चरित्र में आमूल चूल परिवर्तन आ गया है। माकपा ने वाममोर्चे पर कब्जा किया। उसके बाद उसके स्थानीय नेता भ्रष्टाचार की खान बन गए। इलाके में विकास नहीं हुआ। इसलिए वे अब तृणमूल कांग्रेस के साथ हैं।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।


 

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