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बंगाल विधानसभा चुनाव 2021: पांचवें चरण की 45 सीटों पर चाय मजदूरों सहित कई समुदायों के वोट निर्णायक

Prabhakar Mani Tewari प्रभाकर मणि तिवारी
Updated Mon, 12 Apr 2021 01:46 PM IST
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west bengal election 2021 analysis of 5th phase voting in west bengal
अब तक कुल चार चरणों में राज्य की 135 सीटों के लिए मतदान हो चुका है। - फोटो : सोशल मीडिया

पश्चिम बंगाल में सत्ता की लड़ाई का आधा सफर पूरा हो गया है। अब तक कुल चार चरणों में राज्य की 135 सीटों के लिए मतदान हो चुका है। अब पांचवें चरण में शनिवार को छह जिलों की जिन 45 सीटों के लिए मतदान होना है उनमें सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और अबकी सत्ता की प्रमुख दावेदार के तौर पर उभरी भाजपा के बीच कांटे की टक्कर है।

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इस दौर में जहां उत्तर बंगाल के तीन जिलों दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और जलपाईगुड़ी जिले की 13 सीटों पर भाजपा मजबूत नजर आ रही है तो दक्षिण बंगाल के तीन जिलों उत्तर 24-परगना, पूर्व बर्दवान और नदिया जिले की 32 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस। लेकिन इस दौर में चाय बागान मजदूरों के अलावा मतुआ और अल्पसंख्यक समुदाय की भूमिका निर्णायक होगी।
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चाय बागानों वाले इस इलाके में आदिवासी चाय मजदूर दर्जन भर से ज्यादा सीटों पर किसी का भी खेल बना या बिगाड़ सकते हैं, इसलिए भाजपा और तृणमूल कांग्रेस इन वोटरों को लुभाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। इसी कवायद के तहत केंद्र सरकार ने जहां अपने बजट में बागान मजदूरों के लिए एक हजार करोड़ का प्रावधान किया था वहीं ममता बनर्जी भी इलाके में पहुंच कर सरकारी योजना के तहत मजदूरों को पक्के मकानों के कागज बांट चुकी हैं।
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west bengal election 2021 analysis of 5th phase voting in west bengal
पश्चिम बंगाल चुनाव में पहचान पत्र दिखाती महिलाएं - फोटो : ANI

बीते लोकसभा चुनावों के बाद ही ममता बनर्जी इस इलाके में पार्टी की जड़ें मजबूत करने के लिए लगातार दौरे करती रही हैं। वोटरों का भरोसा जीतने की रणनीति के तहत उन्होंने कुछ दागी नेताओं पर कार्रवाई तो की ही है, कई मंत्रियों व विधायकों के टिकट भी काटे हैं। लेकिन बावजूद इसके इलाके पर भाजपा उसके मुकाबले मजबूत नजर आ रही है।

दार्जिलिंग और कालिम्पोंग की छह सीटों पर गोरखा जनमुक्ति मोर्चा और चाय बागान मजदूरों के वोट निर्णायक हैं। जलपाईगुड़ी में भी गोरखा आबादी अच्छी-खासी है। शुरू से ही भाजपा के साथ रहे मोर्चा के दोनों गुट इस बार तृणमूल कांग्रेस के साथ हैं। हालांकि तृणमूल ने विमल गुरुंग गुट के उम्मीदवारों के समर्थन का ही फैसला किया है। दार्जिलिंग की सिलीगुड़ी सीट को सीपीएम का गढ़ माना जाता है। यहां वर्ष 20121 और 2016 में भी सीपीएम के अशोक भट्टाचार्य चुनाव जीत चुके हैं।

जहां तक दक्षिण बंगाल के 32 सीटों की बात है, उत्तर 24-परगना और नदिया जिले की सीटों पर मतुआ और मुसलमान समुदाय के वोट निर्णायक हैं। यही वजह है कि भाजपा ने मतुआ समुदाय के लुभाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह तक इलाके में रैलियां कर चुके हैं।

पार्टी ने सत्ता में आने पर इस समुदाय को सीएए के तहत नागरिकता देने का भी वादा किया है। जिन इलाकों में 17 और 22 अप्रैल को वोटिंग हैं, उनमें मतुआ समुदाय के वोट निर्णायक हैं। हाल में बांग्लादेश की आजादी के स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल होने के बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समुदाय के वोटरों को लुभाने की कोशिश की थी।

तृणमूल कांग्रेस मोदी के भाषण को चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए आयोग से शिकायत भी कर चुकी है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य में अनुसूचित जाति की आबादी करीब 1.84 करोड़ है और इसमें 50 फीसदी मतुआ समुदाय के लोग हैं। करीब 70 विधानसभा सीटों पर यह समुदाय जीत-हार तय करने में अहम भूमिका निभाता है। नमोशूद्र समाज के लोग भी मतुआ समुदाय को मानते हैं। ऐसे में, राज्य में मतुआ समुदाय को मानने वालों की आबादी लगभग तीन करोड़ है।

पांचवें चरण में उत्तर-24 परगना की 16 सीटों पर मतदान होना है। इन इलाकों में अल्पसंख्यकों की आबादी लगभग 40 फीसदी है। तृणमूल कांग्रेस को अपने इस वोट बैंक के सहारे बेहतर प्रदर्शन का भरोसा है। हालांकि कुछ इलाकों में उसे भाजपा से कड़ी टक्कर मिल रही है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने तृणमूल के इस गढ़ में सेंध लगाने में कामयाबी हासिल की थी। तब उसने जिले की लोकसभा की पांच में से मतुआ बहुल इलाके की दो सीटें जीती थीं। उन इलाकों में अल्पसंख्यकों की आबादी कम थी। बाकी तीन सीटें तृणमूल ने जीती थीं। इसलिए इस बार मुकाबला दिलचस्प हो गया है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
 

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