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बंगाल विधानसभा चुनाव 2021: तीसरे चरण की वोटिंग, क्या गढ़ बचा पाएगी तृणमूल कांग्रेस?

Prabhakar Mani Tewari प्रभाकर मणि तिवारी
Updated Mon, 05 Apr 2021 07:07 PM IST
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west bengal assembly election 2021 third phase Trinamool Congress stronghold
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी - फोटो : ANI

पश्चिम बंगाल में छह अप्रैल को तीसरे चरण में मुकाबला युवा और अनुभवी चेहरों के बीच है। पहले दो चरणों में तमाम निगाहें नंदीग्राम और जंगलमहल इलाके पर टिकी थीं, लेकिन तीसरे दौर में हावड़ा, हुगली और दक्षिण 24-परगना जिले की 31 सीटें भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। इस दौर में जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के सामने अपना सबसे मजबूत गढ़ बचाने की चुनौती है, वहीं ममता के भतीजे सांसद अभिषेक बनर्जी के लिए भी यह दौर किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।

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टीएमसी का गढ़़ और चुनौती 
दक्षिण 24-परगना को अब भी तृणमूल का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है। बीते विधानसभा चुनावों के आंकड़ों से यह बात साफ हो जाती है। तब तृणमूल ने इनमें से 29 सीटों पर कब्जा जमाया था। बाकी दो में से एक-एक सीट कांग्रेस और लेफ्ट को मिली थी। बीते लोकसभा चुनावों में पूरी ताकत झोंकने के बावजूद भाजपा उसके वोट बैंक में सेंध लगाने में कामयाब नहीं हो सकी थी।  
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पहले दो चरणों के दौरान जिन 60 सीटों के लिए वोट पड़े हैं, वहां तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के स्टार उम्मीदवारों की तादाद ज्यादा था, लेकिन तीसरे दौर में तस्वीर कुछ अलग है। इस चरण में पापिया और तनुश्री जैसे नए चेहरों के साथ कांति गांगुली और विमान बनर्जी जैसे अनुभवी उम्मीदवार भी मैदान में हैं। 
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तीसरे चरण में जिन सीटों पर सबकी निगाह रहेगी, उनमें दक्षिण 24-परगना जिले की बारुईपुर पश्चिम सीट शामिल है। यहां विधानसभा अध्यक्ष विमान बनर्जी तृणमूल के टिकट पर मैदान में हैं। इसी जिले की रायदीघी सीट पर सीपीएम ने अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री कांति गांगुली को एक बार फिर मैदान में उतारा है।

कांति वर्ष 2011 और 2016 में तृणमूल की उम्मीदवार अभिनेत्री देवश्री राय से मुंहकी खा चुके हैं, लेकिन इस बार देवश्री को टिकट नहीं मिला है। इसलिए कांति गांगुली दोबारा इस सीट पर कब्जे का प्रयास कर रहे हैं। 

तारकेश्वर में भी अबकी मुकाबला दिलचस्प
हुगली जिले के तारकेश्वर में भी अबकी मुकाबला दिलचस्प हो गया है। भाजपा ने यहां राज्यसभा के पूर्व सदस्य स्वपन दासगुप्ता को मैदान में उतारा है। उनका मुकाबला तृणमूल के रमेंदु सिंह राय से है। यहां मैदान में उतरने की वजह से दासगुप्ता को अपनी सांसदी से इस्तीफा देना पड़ा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके समर्थन में इलाके में रैली कर चुके हैं। हावड़ा जिले की उलुबेड़िया सीट पर राज्य के पूर्व मंत्री निर्मल मांजी तृणमूल के टिकट पर मैदान में हैं। उधर, इसी जिले की आमता सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार असित मित्र भी जीत की हैट्रिक लगाने का दावा कर रहे हैं। बंगाल में कांग्रेस की बदहाली के बावजूद असित वर्ष 2011 और 2016 में इस सीट से चुनाव जीत चुके हैं। 

वर्ष 2016 से 2019 के बीच इस चरण की सभी 31 सीटों पर भाजपा को मिलने वाले वोटों में बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2019 की भाजपा लहर के बावजूद इन सीटों पर तृणमूल कांग्रेस के वोट भी बढ़े हैं। ऐसे में तृणमूल कांग्रेस जहां वर्ष 2019 के नतीजों को बरकरार रखने का प्रयास करेगी, वहीं भाजपा की उम्मीदें वोटों पर वर्ष 2016 के बाद तेजी से होने वाली वृद्धि पर टिकी हैं। 

west bengal assembly election 2021 third phase Trinamool Congress stronghold
वर्ष 2016 में दक्षिण 24-परगना जिले की जिन 16 सीटों पर मंगलवार को मतदान होना है। - फोटो : iStock

16 सीटों पर मतदान
वर्ष 2016 में दक्षिण 24-परगना जिले की जिन 16 सीटों पर मंगलवार को मतदान होना है, उनमें से 15 पर तृणमूल कांग्रेस जीती थी, जबकि एक सीट (कुलतली) सीपीएम को मिली थी। इसी तरह हावड़ा जिले के आमता सीट कांग्रेस को मिली थी। इसके अलावा बाकी तमाम सीटों पर तृणमूल ने अपना परचम लहराया था। लेकिन लोकसभा के नतीजों के मुताबिक, कुलतली और आमता में तृणमूल कांग्रेस को बढ़त मिली थी।

बीते विधानसभा चुनाव में इन 31 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस को 50.18, लेफ्ट फ्रंट को 28.20 और भाजपा को महज 6.91 फीसदी वोट मिले थे। लेकिन तीन साल बाद हुए लोकसभा चुनाव में हुगली जिले की दो सीटों-पुरसुड़ा और गोघाट में भाजपा बाकी दलों से आगे थी। बाकी 29 पर तृणमूल कांग्रेस को बढ़त मिली थी। 

इन तीन वर्षों में तमाम राजनीतिक दलों को मिलने वाले वोटों का आंकड़ा भी बदल गया। तृणमूल कांग्रेस के वोट जहां 50.18 फीसदी से बढ़ कर 51.05 फीसदी हो गए, वहीं लेफ्ट के वोटों में भारी गिरावट आई और यह 28.20 फीसदी से गिर कर 6.71 फीसदी रह गया। इसी तरह कांग्रेस के वोट में भी आठ फीसदी से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। लेकिन दूसरी ओर भाजपा को मिलने वाले वोट बढ़ कर 37.45 फीसदी तक पहुंच गए। इससे साफ है कि लेफ्ट और कांग्रेस के लगभग तमाम वोटों पर भाजपा ने कब्जा कर लिया। 

लेकिन वोट प्रतिशत के लिहाज से तृणमूल कांग्रेस से पीछे होने के बावजूद भाजपा इस चरण में आत्मविश्वास से लबालब नजर आ रही है। इसकी वजह है चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर तृणमूल नेताओं का पार्टी में शामिल होना। ऐसे कई दलबदलुओं को उम्मीदवार भी बनाया गया है। तीसरे चरण के मतदान से पहले प्रधानमंत्री मोदी से लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा कई केंद्रीय मंत्री और नेता तक प्रचार कर चुके हैं।

अभिषेक बनर्जी की साख 
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने भी इस चरण में अपने गढ़ को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंकी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी इलाके में दर्जनों रैलियां कर चुके हैं। दक्षिण 24-परगना जिले में डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक ने इस चरण की सभी 31 सीटों पर जीत का दावा किया है। भाजपा के तमाम नेता ममता के साथ अभिषेक पर भी कड़े हमले करते रहे हैं। ऐसे में इस गढ़ को बचाना अभिषेक के लिए कड़ी अग्निपरीक्षा साबित हो सकता है। 

दोनों राजनीतिक दलों ने इस चरण में कई सितारों को भी उम्मीदवार बना कर जमीन पर उतारा है। राजनीतिक पर्यवेक्षक विश्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं, 'पहले दो चरणों में भले नंदीग्राम सीट सब पर भारी पड़ी हो, तीसरा चरण भी कम दिलचस्प नहीं है। इसमें ज्यादातर सीटों पर युवा और सितारा उम्मीदवारों का मुकाबला अनुभवी राजनेताओं के साथ है।' 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।


 

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