कोहली की "विराट" कप्तानी और धोनी: क्या कोई कोहली के लिए कहेगा- "वो मेरे कप्तान हमेशा रहेंगे"
विराट क्रिकेट की दुनिया का एक ऐसे नाम है जिनके बारे में लिखकर बताने की जरूरत नहीं है। विराट ने अगर अपने गुस्से से एक अलग पहचान बनाई तो कुछ खिलाड़ियों का सम्मान करके भी एक अलग जगह बनाई। टी-20 की कप्तानी से विराट कोहली के संन्यास ने एक बार फिर से कैप्टन कूल कहे जाने वाले महेंद्र सिंह धोनी की क्रिकेट से विदाई की याद दिला दी।
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भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने टी-20 वर्ल्ड कप से पहले टी-20 की कप्तानी से संन्यास की घोषणा कर दी। इस खबर ने सभी क्रिकेट प्रेमियों को सकते में ला दिया। उन्होंने अपनी कप्तानी को लेकर उठ रहीं उन सारी अटकलों पर गुरुवार को उस वक्त विराम लगा दिया, जब ट्वीटर के माध्यम से जानकारी दी कि वो टी-20 वर्ल्ड कप के बाद टी-20 की कप्तानी छोड़ देंगे।
विराट क्रिकेट की दुनिया का एक ऐसे नाम है जिनके बारे में लिखकर बताने की जरूरत नहीं है। विराट ने अगर अपने गुस्से से एक अलग पहचान बनाई तो, कुछ खिलाड़ियों का सम्मान करके भी एक अलग जगह बनाई। टी-20 की कप्तानी से विराट कोहली के संन्यास ने एक बार फिर से कैप्टन कूल कहे जाने वाले महेंद्र सिंह धोनी की क्रिकेट से विदाई की याद दिला दी।
धोनी ने 2017 में अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर को अलविदा कह दिया था। उस समय का विराट का बयान आज भी लोगों के जहन में बना हुआ है। विराट ने कहा था-
भले ही धोनी क्रिकेट और कप्तानी से अलविदा कह दिया हो लेकिन वो हमेशा उनके कप्तान रहेंगे।
आज धोनी के बाद क्या इस वाक्य को दोहराने वाला कोई दूसरा है। जो विराट के लिए यह बात कहे, क्योंकि आंकड़ों की बात करें तो कैप्टन कूल ने 72 टी20 मैचों में टीम की कमान संभाली और 41 में जीत दिलाई। इसके साथ ही 28 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वहीं कोहली ने 45 मैचों में कप्तानी की और 27 में जीत दर्ज की। इन दोनों की तुलना आंकड़ों से की जाए तो कोहली आगे निकल जाएंगे, लेकिन दर्शकों के जहन में छाप छोड़ने वाली बात की जाए तो इसकी तुलना थोड़ी मुश्किल हो सकती है।
जब विराट ने धोनी से अपने रिश्तों के बारे में दो शब्दों में बताया
जब तक विराट और धोनी साथ खेले और उसके बाद भी, खेल प्रशंसकों के लिए धोनी और विराट के रिश्तों के बारे में जानना हमेशा उत्साहित करता रहा है। कई बार धोनी से और कई बार विराट से, इस संबध में उनके प्रशंसकों ने सवाल भी किए। दोनों ही खिलाड़ियों ने कई बार अपने विचार रखे और कई बार बहुत ही कम शब्दों में इसे बता दिया।
एक बार जब विराट से धोनी के उनके रिश्ते के बारे में पूछा गया था तो उनका कहना था कि 'विश्वास और सम्मान'।
दोनों खिलाड़ियों की शैली और सोच में काफी फर्क है। दोनों ने क्रिकेट की बुलंदियों को देखा है। इनकी तुलना करना मुश्किल है। लेकिन क्या अब हर खिलाड़ी अपनी अलग पहचान बनाने में लग गया है। पहले एक दौर हुआ करता था जब हर खिलाड़ी क्रिकेट के भगवान सचिन की तरह बनने का सपना देखता था। धोनी ने इसे आगे बढ़ाया और एक अलग पहचान बनाई।
विराट के प्रशंसकों की संख्या भी किसी से कम नहीं है। लेकिन ऐसे में एक सवाल उठता है कि कहीं क्रिकेट में ऐसा तो नहीं हो रहा कि प्रशंसकों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है और अपने खिलाड़ियों को अपना आदर्श बनाने वालों की संख्या में गिरावट। अगर वाकई ऐसा नहीं है तो यह जानना होगा कि कौन विराट के लिए कहेगा कि वो उनके कप्तान हमेशा रहेंगे?
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।