आर्थिक प्रगति और भारत : 'विकसित भारत' के निर्माण में अलग भूमिका निभाएंगे औद्योगिक पार्क
भारत के आर्थिक विकास में औद्योगिक पार्क एक बड़ी भमिका निभाते दिख रहे हैं। यही नहीं स्मार्ट सिटीज के द्वारा भी देश के समग्र और क्षेत्रीय विकास में बहुत महत्वपूर्ण योगदान मिलने की आशा है।
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आज सारे विश्व में भारत के 7% से अधिक दर से हो रहे सर्वाधिक तीव्र विकास की सराहना हो रही है, जिसके बारे में विश्व बैंक, अर्न्तराष्ट्रीय मुद्रा कोष, एशियन विकास बैंक और सभी वैश्विक संस्थाओं ने प्रशंसात्मक टिप्णी की है और माना है कि इस समय सारे विश्व के आर्थिक विकास के ईंजन में सर्वाधिक योगदान भारत का है।
इस सप्ताह जारी अर्न्तराष्ट्रीय संस्था ‘मूडीज’ ने ‘ग्लोबल मेको आउटलुक' रिपोर्ट में कहा है-
भारतीय इकोनॉमी ‘स्वीट स्पॉट' जो 2024 में 7.2% की दर से बढ़ेगी। यह माना जा रहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था 2025 तक, 4.34 ट्रिलियन डॉलर जीडीपी के साथ विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हो जाएगी, जो जापान के 4.31 ट्रिलियन डॉलर को पछाड़ देगी । इसका एक कारण यह है कि भारत में 2023 में जीडीपी के विकास की दर 7.8% रही जो जापान के 1.9% से कहीं अधिक है। इस गति से भारत की अर्थव्यवस्था 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर पहुंचने की आशा है, जिसके फलस्वरूप भारत तब एक विकसित देश के रूप में उभरेगा।
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इन सारे विकास कार्यक्रमों में देश में इंडस्ट्रियल पार्क, स्मार्ट सिटीज और उनमें विकसित हो रहे छोटे और मध्यम दर्जे के उद्यमों का विशेष योगदान रहेगा, जैसे चीन में शेंजेन के स्पेशल इक्नॉमिक जोन और दूसरे औद्योगिक पार्कों का रहा है। इसी प्रकार अमेरिका में डेट्राइट में ऑटोमोबिल सेक्टर के विकास और सिलिकोन वेली में आईटी सेक्टर के उद्यमों के तेजी से विकास का योगदान रहा है। इसी प्रकार जर्मनी में इंजीनियरिंग उत्पादन के केन्द्रों का देश के जीडीपी के विकास में बहुत योगदान रहा है ।
भारत की अर्थव्यवस्था छोटे और मध्यम दर्जों के उद्योगों (एमएसएमई) पर विशेष रूप से निर्भर है और आकंड़ों के मुताबिक देश की एक तिहाई जीडीपी उनसे आती है और लगभग 46% निर्यात भी इनके उत्पादनों पर आधारित है। रोजगार सृजन में भी एमएसएमई क्षेत्र का विशेष योगदान है जो जुलाई 2020 से जुलाई 2024 तक लगभग 21 करोड़ अनुमानित है।
औद्योगिक पार्कों और केन्द्रों में, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और ट्रांसपोर्टेशन के कारण समन्वित और समग्र विकास से, उत्पादन के लिए सप्लाई चेन की प्रभावी क्षमता में बहुत सुधार होता है और कीमतों में कमी होती है। इसके अलावा इन पार्कों में कुछ बड़े उद्योग जो इन केन्द्रों में एन्कर उद्योगों का काम करते हैं इन अन्य उद्योगों को अनेक प्रकार से सर्पोट प्रदान करते हैं।
इन बड़े उद्योगो के विकास और आकर्षण के लिए भारत सरकार की अनेक योजनाएं, जैसे 'मेक इन इण्डिया', पीएलआई (Production Linked Incentive), पीएम गतिशक्ति इत्यादि कार्यरत हैं। कुल मिलाकर यह देश मे उत्पादन बढ़ाने के लिए ईंजन का काम करते हैं।
बहुआयामी विकास की दिशा
इस समय भारत में केन्द्र और राज्यों के सहयोग से अनेक औद्योगिक कॉरिडोर देश की अर्थव्यवस्था की धुरी बने हुए हैं और जीडीपी के विकास में पंख लगाने का काम कर रहे हैं। इनमें विशेष रूप से दिल्ली- मुम्बई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और चैनई इंडस्ट्रियल कोरिडोर उल्लेखनीय हैं।
इधर अनेक राज्यों में नए-नए कॉरिडोर और औद्योगिक केन्द्र बन रहे हैं जो देश और क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और देशभर में मध्यम और छोटे शहरों के विकास में भी तेजी ला रहे हैं। इसी प्रकार यू.पी. में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर देश की रक्षात्मक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिसमें 6 केन्द्र होंगे- अलीगढ़, आगरा, कानपुर, चित्रकूट, झांसी और लखनऊ।
अगस्त 2024 में भारत सरकार ने एक महत्वाकांक्षी और युगांत्तरकारी पहल के अन्तर्गत एनआईसीडीपी (राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम) की घोषणा की जिसमें देशभर में 28,600 करोड़ रुपये के निवेश से 11 राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे जिनमें बड़े-बड़े एंकर उद्योग और छोटे और मंझले दर्जे के एमएसएमईज विकसित होंगे और 2030 तक इनके द्वारा 2 ट्रिलियन डॉलर का निर्यात संभव हो पाएगा जो विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इन 11 औद्योगिक कोरिडोर में दिल्ली- मुम्बई के अतिरिक्त अमृतसर-कोलकता, बंगलुरु- मुम्बई, वाईजेक-चैनई, उड़ीसा, हैदराबाद - नागपुर, कोच्चि–कोइम्बटूर, देहली - नागपुर आदि सम्मिलित हैं।
इनके अतिरिक्त एनआईसीडीपी परियोजना में कई नए औद्योगिक शहरों का, ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटीज के रूप में निर्माण किया जाएगा जिनमें उद्योग-धंधों के लिए 'प्लग एण्ड प्ले' और 'वॉक टू वर्क' जैसी सुविधाओं को विकसित किया जाएगा। इनमें गुजरात के धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रिजन (डीएसआईआर), महाराष्ट्र में औरंगाबाद इंडस्ट्रियल टाउनशिप, ग्रेटर नोएडा में इंटिग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप और मध्य प्रदेश में इंटिग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप, विक्रम उद्योगपुरी आदि शामिल हैं।
केन्द्र और राज्य सरकारों के अतिरिक्त प्राइवेट सेक्टर के अन्तर्गत भी इन औद्योगिक केन्द्रों के विकास में बहुत काम सम्भव है, और हो रहा है जो इनके समन्वित रूप से इनके विकास और एंकर डद्योगों की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, वेदान्ता ग्रुप ने घोषणा की है कि वे दो इंडस्ट्रियल पार्क स्थापित करेंगे, जिनमें एक एल्यूमिनियम और दूसरा जिंक और चांदी के लिए होगा, जो तीनों धातुएं देश के इलेक्ट्रॉनिक्स और रिन्यूवेबल एनर्जी के जरूरतों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं इस परियोजना के लिए जो 'नो प्रोफिट नो लॉस' पर आधारित होगी, राजस्थान और उडीसा में 1500 एकड़ में यह कल्स्टर स्थापित किए जाएंगे जिनसे एमएसएमईज और स्टार्ट-अप्स को डाउनस्ट्रीम की लिंकेज के आधार पर विकसित किया जायेगा । इनके अतिरिक्त अडानी ग्रुप ने भी इस संबंध में बहुत काम किया है।
औद्योगिक पार्कों के अतिरिक्त स्मार्ट सिटीज के द्वारा भी देश के समग्र और क्षेत्रीय विकास में बहुत महत्वपूर्ण योगदान मिलने की आशा है इस सम्बन्ध में उद्योग मंत्री पियूष गोयल द्वारा जापान की विशाल कम्पनी टोयोटा द्वारा महाराष्ट्र के सांभाजीनगर में विकसित किये जा रहे एक महत्वपूर्ण औद्योगिक नगर का भी वर्णन किया गया था। वास्तव में आने वाले कुछ वर्षों में एनआईसीडीपी जैसी क्रान्तिकारी योजनाओं से देश के आर्थिक, औद्योगिक और क्षेत्रीय समन्वित विकास और रोजगार सृजन में तेजी से बढ़ावा देने में बहुत योगदान मिलेगा, जिनसे 2047 तक विकसित भारत के गंतव्य प्राप्ति में विशेष सहायता मिलेगी।
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