फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   US Election Result: How Donald Trump 2.0 Could Impact The Relation Of America And India

अमेरिकी चुनाव 2024: ट्रम्प की जीत को लेकर इमोशनल होने की जरूरत नहीं

सार

अमेरिका में रहकर एचवन-बी वीजा पाने का इंतजार कर रहे लाखों युवाओं का क्या होगा? क्या भारत में अमेरिका से हो रहा आयात सस्ता होगा? क्या अमेरिका में भारतीय सामान के निर्यात का रास्ता मुश्किल जायेगा?

विज्ञापन
US Election Result: How Donald Trump 2.0 Could Impact The Relation Of America And India
मोदी और ट्रंप (फाइल फोटो) - फोटो : X/@NarendraModi

विस्तार

हम भारतीय लोग बहुत ज्यादा इमोशनल हैं। हमने डोनाल्ड ट्रंप या कमला हैरिस के पक्ष में अपने-अपने तर्क खोज लिए थे। यहां तक कि पूजा पाठ तक शुरू कर दिया था। लेकिन क्या डोनाल्ड ट्रंप की जीत से हम भारतीयों को बहुत खुश होने की जरूरत है? शायद नहीं! क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप हो या कमला हैरिस,  दोनों भारत के हितों को आगे बढ़ाने के लिए चुनाव मैदान में नहीं उतरे थे। दोनों ही नेताओं का लक्ष्य अपने देश में मतदाताओं के हितों की रक्षा करना था। अमेरिका में चुनाव परिणामों का असर भारत सहित दुनिया के कई देशों पर पड़ेगा, इसमें कोई दो राय नहीं है। 

विज्ञापन


शेयर बाजार की यह चमक दमक अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे से प्रभावित बताई जा रही है।

बुधवार, 6 नवंबर को शेयर बाजार का कारोबारी सत्र खत्म होने के बाद सेंसेक्स 901.5। अंक उछलकर 80378 पर बंद हुआ निफ्टी भी 270.75 अंक बढ़ा और 24484 पर बंद हुआ। यह शेयर मार्केट अपना नजरिया है कि उसे भारत-अमेरिका कारोबार में अच्छा भविष्य नजर आ रहा है, लेकिन अमेरिका में रहकर एचवन-बी वीजा पाने का इंतजार कर रहे लाखों युवाओं का क्या होगा?
विज्ञापन


क्या अमेरिका में भारतीय सामान के निर्यात का रास्ता मुश्किल जायेगा? ट्रम्प तो यही कहते आए हैं कि आप्रवासी लोग हमारे लोगों की नौकरियां खा रहे हैं। ट्रम्प बार-बार यह बात कह चुके थे कि वे पहले अपने देश को ठीक करेंगे। उसकी सीमाओं को सुरक्षित करेंगे और वह वही करने वाले हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


ट्रम्प ने कहा था कि हमारे पास एक ऐसा देश है जिसे हम जैसे लोगों की मदद की दरकार है। हम चाहते हैं कि हमें हमारे देश के लोगों को और बेहतर नौकरियां दे सकें। अवैध रूप से आव्रजन खत्म किया जाना चाहिए। 

'अमेरिका फर्स्ट' की प्राथमिकता

तो डोनाल्ड ट्रंप की जीत का साफ-साफ अर्थ है कि अमेरिकी आर्थिक नीतियां 'अमेरिका फर्स्ट' पर केंद्रित होगी। उसी तरह से आगे बढ़ाई जाएंगी। अपने पहले कार्यकाल में डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के उद्योगों को अच्छा खासा संरक्षण दिया था और भारत और चीन सहित कई देशों के सामान पर भारी मात्रा में टैक्स लगा दिया था। याद है कि भारत में अमेरिकी हार्ले डेविडसन मोटरसाइकिल के आयात पर ड्यूटी घटाने के लिए उन्होंने साफ-साफ कहा था।

चुनाव के प्रचार में उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे अमेरिका फर्स्ट का नारा आगे भी जारी रखेंगे और वे अमेरिकी माल और सेवाओं पर  ज्यादा टैरिफ लगाने वाले देशों के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं। भारत उसी के दायरे में आ सकता है।

ट्रम्प का मानना रहा है कि भारत (अमेरिका के) कारोबारी नियमों का बहुत ज्यादा उल्लंघन करता है। ट्रंप चाहते थे कि कोई भी चीज अगर अमेरिका से भारत आयात हो तो उस पर 20% तक ही टैक्स लगाया जाए, उससे अधिक नहीं।

US Election Result: How Donald Trump 2.0 Could Impact The Relation Of America And India
अमेरिका चुनाव के परिणाम (फाइल फोटो) - फोटो : X/NarendraModi

भारत और अमेरिका के बीच कारोबार

भारत और अमेरिका के बीच करीब 200 अरब  डॉलर का वार्षिक कारोबार होता है। अगर डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामान पर टैक्स की दरें बढ़ा दी तो उसका नुकसान भारत को हो सकता है। ट्रंप की टैक्स नीतियों के बारे में कहा जाता है कि उससे 2028 तक भारत की जीडीपी में 0.1% तक की गिरावट हो सकती है। यानी 1% का दसवां हिस्सा हमारी जीडीपी का काम हो सकता है। भारत में अमेरिकी आयात भी महंगा हो सकता है।

ट्रंप के पहले कार्यकाल में अमेरिका और चीन के रिश्ते काफी हद तक तनावपूर्ण हो गए थे। लेकिन भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों को और बल मिलेगा। इस बात को कहने के पीछे यही भावना है कि डोनाल्ड ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में क्वाड को मजबूती देते हुए दिखते थे।

क्वाड भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान 4 देशों का संगठन है। ट्रम्प के फिर राष्ट्रपति बनने से भारत में हथियारों आयात,  भारत और अमेरिका की सेना के संयुक्त अभ्यास आदि में तेजी आ सकती है। इस स्थिति का भारत को फायदा होगा। डोनाल्ड ट्रंप के भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अच्छे संबंध रहे हैं। ट्रम्प ने अपने पिछले कार्यकाल में राष्ट्रपति रहते हुए चीन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था। 

डोनाल्ड ट्रंप की मानव अधिकार के बारे नीतियां रही हैं भारत के अनुकूल रही हैं। पुलवामा अटैक के दौरान भी उन्होंने साफ कहा था कि  भारत को आत्मरक्षा के अधिकार का अमेरिका समर्थन करता है जबकि जो बाइडन प्रशासन भारत के मामले में नकारात्मक टिप्पणियां करता रहा है।

तीन साल पहले अमेरिका के उपराष्ट्रपति कमला हैरिस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से यह तक कहा था कि हम अपने अपने देशों में लोकतांत्रिक सिद्धांतों और संवैधानिक संस्थानों की रक्षा करें। यह बहुत जरूरी है। इसका मतलब यही था कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति हमारे  प्रधानमंत्री को जो बात कह रही थी, कूटनीति की भाषा में उसे धमकाना कहा जा सकता है। 

डोनाल्ड ट्रंप बड़े और कड़े फैसले लेने के आदी हैं और दुनिया के कई देश उनके  कार्य करने के ढंग से नाराज भी थे। ट्रम्प ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाया था। बांग्लादेश में हिंदुओं, ईसाइयों, सिक्खों और दूसरे अल्पसंख्यक समुदाय के बारे में उन्होंने  सोशल मीडिया पर लिखा था कि मैं हिंदू, ईसाई और दूसरे धर्म के लोगों के खिलाफ हिंसा और लूट की कड़ी निंदा करता हूं।  बांग्लादेश आज अराजकता की स्थिति में है।

डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी हिंदुओं को बचाने के लिए अपने प्रयासों को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने साफ-साफ कहा कि मैं कुछ लोगों के धर्म विरोधी एजेंडे से हिन्दू अमेरिकी नागरिकों को बचा लूंगा। यानी जैसी अराजकता कनाडा में हुई, वैसी अमेरिका में नहीं होगी।

अमेरिका पाकिस्तान को अपनी विदेश नीति में कहीं भी जगह नहीं देता। उसकी निगाह भारत पर होती है या फिर अफगानिस्तान पर। ट्रंप फिर से अमेरिकी राष्ट्रपति  के रूप में जो भी काम करेंगे, अमेरिकी हितों में ही होगा। संभव है कि कुछ कार्य हमारे फायदे के हो जाएं। ऐसा हुआ तो  यह विन विन वाली सिचुएशन होगी। 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed