फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   sushant singh rajput suicide case bollywood black face behind sushant singh rajput death dark side of film industry

शेखर कपूर के 'पानी' में बह गए सुशांत के सपने, क्या ख्वाब दिखाने वालों के जाल में फंस गया था युवा अभिनेता?

Wed, 24 Jun 2020 01:50 PM IST
Harish Sharma हरीश शर्मा
Updated Wed, 24 Jun 2020 01:50 PM IST
सार

  • सुशांत सिंह के जाने के बाद उनके इतने हितैषी मिलेंगे मुझे उम्मीद नहीं थी।
  • एक युवा आकर्षक सफल अभिनेता के अचानक चले जाने का वास्तव में आघात लगा था।
  • किसी वकील साहब ने 7 लोगों पर मुकदमा दायर कर दिया है।

विज्ञापन
sushant singh rajput suicide case bollywood black face behind sushant singh rajput death dark side of film industry
सुशांत सिंह राजपूत इंडस्ट्री के निष्क्रिय कलाकारों के बीच फंस गए थे? - फोटो : Social Media

विस्तार

सुशांत सिंह राजपूत मेरी आने वाली किताब का हिस्सा नहींं थे क्योंकि मेरा उनसे कभी वास्ता नहींं पड़ा। लेकिन फ़िल्म उद्योग की कार्यशैली पर मुझे विस्तार से लिखना ही था। अब वही कार्यशैली सुशांत के माध्यम से आप लोगों के समक्ष है।

विज्ञापन


सुशांत सिंह राजपूत को पता होता कि उनके जाने के बाद सोशल मीडिया पर इतना बवाल होगा और देश मे उनके इतने चाहने वाले हैंं तो अपनी जान कतई नहींं लेते। वैसे मेरा रिश्ता फ़िल्म उद्योग से, जिसे आसान भाषा में सब बॉलीवुड कहते हैंं पिछले 25 साल से है। 20 साल सक्रिय और 5 साल बतौर दर्शक। 
विज्ञापन



सुशांत सिंह के जाने के बाद उनके इतने हितैषी मिलेंगे मुझे उम्मीद नहीं थी, जनता-जनार्दन का तो समझ आता है। एक युवा आकर्षक सफल अभिनेता के अचानक चले जाने का वास्तव में आघात लगा था। मुझे भी लगा। कभी उनके साथ काम नहींं किया था, हांं उनकी फिल्में देखी थी। प्रतिभाशाली थे, लगा था चलो नई पौध में एक सितारा यह भी होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


लेकिन मैं विचलित हुआ जब फ़िल्म नगरी के कुंठित हताश, निराश लोगोंं ने सुशांत के अशरीरी कंधे पर बंदूक रखकर चलाना शुरू किया। मैं फिर भी देखता रहा, पढ़ता रहा और समझने की कोशिश करता रहा की इस सफल लड़के ने खुदकुशी क्यों की होगी!

जितना पढ़ा, देखा, लोगोंं का ज्ञान समझने की कोशिश की, नहींं समझ आया दिमाग का दही हो गया। किताबें लिखने के कारण गोवा रहता हूंं तो मुम्बई मीडिया की खबरें नहींं मिल पाती हैंं। ओल्ड स्कूल होने के कारण अभी भी कागज वाला अख़बार ही पढ़ने की आदत है। डिजिटल के माध्यम से खबरों की खुशबू नहींं आती। 

लेकिन मुम्बई मिड-डे को डिजिटल मीडिया पर खोल ही लिया और मुझे बहुत हद तक सुशांत की हताशा समझ आ गई। हालांकि वो इतनी गहरी नहींं है कि कोई खुदकुशी कर ले, लेकिन अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने की समझ तो हो ही जाती है।

सुशांत ने जिन फ़िल्मों में काम करने का सपना देखा था वो तो बननी ही नहींं थी। लेकिन यह समझ भी आया यह लड़का अलग तरह की फिल्में करना चाहता था। इसलिए वो ऐसे फ़िल्म निर्देशकोंं के जाल में फंस गया। मैं समझ सकता हूंं की सुशांत फ़िल्मों की दुनिया के लिए कम अनुभवी थे।

मुझे नहींं पता उनके इर्द-गिर्द कौन लोग थे, लेकिन जो भी थे वो काबिल नहींं थे यह पक्का है। हमारी फ़िल्म नगरी की सबसे बड़ी समस्या, यस मैन और यस वुमन की है। वो सितारों को यह नहींं बताते उनके लिए सही क्या गलत क्या है। उन्हें लगता है हमने यस सर नहीं कहा तो नौकरी भी जा सकती है। उनके इर्द-गिर्द जो समझदार लोग थे, उन्होंने सुशांत को सही सलाह दी होती तो उन्हें बचाया जा सकता था। आइए अब उन फिल्मों पर नज़र डालते हैंं जो वो कर रहे थे।

पहली फ़िल्म का नाम है "चंदा मामा दूर के"। निर्देशक हैैं संजय पूरन सिंह चौहान।  साल 2010 में  लाहौर फ़िल्म आई थी, जिसे राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। अच्छी फिल्म थी। जितनी बड़ी फिल्म थी उतनी ही सफलता उसे मिली थी। इस निर्देशक की पीआर समझ इतनी जबरदस्त है वो ऐसी घोषणा करते हैंं की कोई न कोई मुख्य मीडिया उनको बड़े-बड़े हेेडिंग के साथ छाप ही देता है।

संजय ने सुशांत को क्या सपने दिखाए मुझे नही पता लेकिन...

sushant singh rajput suicide case bollywood black face behind sushant singh rajput death dark side of film industry
सुशांत सिंह राजपूत: वे भविष्य के प्रोजेक्ट के बदले वर्तमान के ऑफर ठुकरा रहे थे? - फोटो : अमर उजाला

आप 2010 से हर साल उनकी कवरेज गूगल देवता में सर्च कर सकते है। मैं कुछ प्रकाश डालता हूंं। एक साइंस फिक्शन फ़िल्म नाम पता चलते ही बताया जाएगा। ऐसे ही संजय गांंधी पर फ़िल्म, भारत पाकिस्तान रिश्तों पर फ़िल्म। इसमें पाकिस्तानी अभिनेत्री महरीन सईद को साइन किया गया। इस फ़िल्म में भारत पाकिस्तान बांग्लादेश के सितारे काम करेंगे। साइंस फिक्शन फ़िल्म के लिए हॉलीवुड के स्पेशल इफेक्ट डायरेक्टर जॉन पाल्मार को साइन किया गया।

मुझे यह सारी जानकारी एनडीटीवी इण्डिया के मनोरंजन जगत कार्यक्रम से मिली। सारी नकली घोषणा एक ही टीवी के एक ही प्रोग्राम में यह भी मुझे चौंंकाता है। 

जब यह लेख लिखते समय 10 मिनट के रिसर्च से मैं यह सब तलाश कर सकता हूंं तो क्या सुशांत सिंह या उनकी टीम ने चंदामामा दूर के साइन करने से पहले संजय पर आरएनडी क्यों नहींं की? यदि करते तो समझ आ जाता कि यह फ़िल्म नहींं बननी थी उनकी अन्य फिल्मों की तरह।

संजय ने सुशांत को क्या सपने दिखाए मुझे नहींं पता, लेकिन उनके मैनेजर पीआर टीम आदि क्या कर रहे थे। फ़िल्म दुनिया और मुम्बई से दूर हो जाने के कारण मेरी नजर चंदामामा दूर के पर नहींं पड़ी, वरना मैं कुछ नहींं तो सोशल मीडिया पर पोस्ट करता ही।

मुझे संजय की प्रतिभा पर कोई शक नहींं है। लाहौर जैसी नॉन स्टारकास्ट फ़िल्म को सफल बनाकर अवॉर्ड जीतना आसान बात नहींं है, फ़िल्म की तारीफ भी बहुत हुई थी। लेकिन उसके बाद क्या, सिर्फ घोषणाएं और मीडिया कवरेज। लाहौर सफल फ़िल्म थी उस फिल्म के निर्माता के साथ ही फ़िल्म बना लेते।

संजय को मेरी सलाह है कि फ़िल्म उद्योग में अनुराग कश्यप, तिग्मांशु धूलिया जैसे कमाल के निर्देशक हैंं। इन्हें महारत हासिल है कि इन्हें आप अभाव बजट फिल्मों का निर्देशन दे दीजिए यह कमाल की फ़िल्म बना देते हैंं, लेकिन जैसे ही 50/60/80 करोड़ की फ़िल्म बनाने को दे दी तो दिक्कत होती है। आप समझ ही गए होंगे मैं क्या कहना चाहता हूंं।  

आप 10 साल में एक सफल फ़िल्म के बाद दूसरी फिल्म नहींं बना पाते तो कही तो कमी आप में है ही। अब यह मत कह दीजिएगा कि मुम्बई गैंग ने आपको आगे बढ़ने ही नहींं दिया। तो सुशांत के सपनों को तोड़ने की जिम्मेदारी संजय की भी है। अब आप लाहौर जैसी दूसरी फिल्म बनाएंं और सुशांत को समर्पित कर देंं।

अगला नाम मैं लेना चाहूंंगा शेखर कपूर का, सबसे ज्यादा चोट यदि किसी ने मारी है तो वो मारी है शेखर कपूर ने। जब वो दे ट्वीट दे ट्वीट करें पड़े थे तो मुझे लगा यार कितना बड़ा हितैषी है, यह व्यक्ति सुशांत का।

लेकिन एक नए बच्चे को कैसे शेखर ने अपने मोहपाश में जकड़ा होगा यह उनकी काबिलियत भी है। पानी नहींं भाई मैं लिखते हुए थका नही हूंं जो पानी मांंग रहा हूंं यह एक बीस साल पुरानी फ़िल्म है यदि 20 साल पहले बन जाती तो सुशांत पानी का सपना देखने से बच जाते।

मेरी याददाश्त यदि सही है तो सबसे पहले शेखर कपूर पानी जवान रही प्रीति जिंटा के साथ बनाना चाहते थे तब से कितना पानी बह गया। मैं कहीं पढ़ रहा था वो फ़िल्म में दिखाएंगे 2025 में पानी की क्या स्थिति होगी।

एक बच्चा आपकी न बनने वाली फिल्म के लिए अपने बेशकीमती दो साल बर्बाद कर देता है

sushant singh rajput suicide case bollywood black face behind sushant singh rajput death dark side of film industry
सुशांत सिंह राजपूत की पूरी टीम इंडस्ट्री के यथार्थ को समझ ही नहीं पाई। - फोटो : social media

मैं जब पिथौरागढ़ में था 1987/88 में तो पर्यावरणविद् राजेन्द्र सिंह, शायद यही नाम है उनका, एक लेख पढ़ रहा था उस समय, कटिंग भी रखी होगी कहींं, पूरे पेज में उन्होंने चिन्ता जाहिर की थी अगले 20 साल में अपने देश से पानी खत्म हो जाएगा और हम त्राहि-त्राहि करेंगे।

मुझे उस समय भी लगता था कि क्या हम पानी के लिए कुछ नहींं करेंगे जो करेगा पानी ही करेगा। 32 साल हो गए हमनें बहुत कुछ तो नहींं किया लेकिन प्रकृति ने अधिकतर हमें समृद्ध ही रखा। जब पानी 20 साल से बन रही है तो सुशांत को उनकी टीम को सोचना चाहिए था निर्माता कहांं है।

शेखर ने बेशक तीन बेहतरीन फ़िल्म बनाई हैं, लेकिन एक बच्चा आपकी न बनने वाली फिल्म के लिए अपने बेशकीमती दो साल बर्बाद कर देता है और आप कहते हैं मेरे कंधे पर सिर रखकर रोया था सुशांत उसका दर्द मैं जानता हूंं। दो साल की पूरी तारीखें ले लींं आपने, शेखर कपूर फ़िल्म के लिए यदि किसी या बहुत से निर्माताओं ने अपने कदम वापस खींच लिए तो कमी आप में है आपकी कहानी में है ।

प्रिटी जिंटा या सुशांत सिंह में नहींं। समझते हैंं किसी प्रतिभाशाली कलाकार के दो साल और अनगिनत सपनो को तोड़ने के अपराध की सजा क्या होनी चाहिए। 

और आप ट्विटर ट्विटर खेलकर बकवास कर रहे हैंं कि कोई आप पर उंगली न उठा दे। शेखर ने कहा जब निर्माता ने पानी के लिए कहा कि हम सुशांत के साथ फ़िल्म नही कर सकते तो सुशांत रोया और मैं भी, फिर मैं उसके साथ दूसरी फिल्म बनाना चाहता था लेकिन नहींं बना पाया तो अपसेट होकर विदेश चला गया। 

इसका सीधा मतलब है कि आपने सुशांत को पहले फुसलाया उसकी सफलता को कैश करने के लिए उसे तैयार किया। स्वाभाविक है शेखर निर्देशन करेंगे तो बिग बजट फ़िल्म होगी। लेकिन निर्माता ने मना कर दिया। तो मान्यवर पहले आप पानी के लिए निर्माता को तैयार करते फिर उनसे सलाह लेकर हीरो साइन करते।

कमी आप में है सुशांत में नहीं। चलिए आप अब बनाकर दिखा दीजिए पानी, निर्माता तो तैयार है ना आपके साथ, दिक्कत हीरो की है लाइए बड़ा हीरो और बनाइए अपना ड्रीम प्रोजेक्ट और सुशांत को समर्पित कीजिए।

मुझे पक्का नहींं पता लेकिन सब जगह खबर है कि आपकी नसुडी फ़िल्म के लिए सुशांत ने संजय लीला भंसाली की फ़िल्म को तारीखों के चलते न कर दिया था यदि यह सच है तो मुझे नहींं पता आप सो भी कैसे पाते होंगे। सुशांत तो बिल्कुल नहींं सो पाता होगा।

इतनी बड़ी फिल्म जिसका पक्का पता था कि बहुत बड़ी रिलीज होगी। आपको दी गई 2 साल की डेट के कारण निकल गई। अन्य भी कम से कम 5 फिल्में तो उसके हाथ से निकली ही होंगी। आपसे गुज़ारिश है अपने घड़याली आंसू बहाना बन्द कीजिए और यह सोचिए कि आप सुशांत की आत्मा का कर्ज कैसे चुकाएंगे।

मैं सुशांत की अगली फिल्म की बात करूंं उससे पहले मैं यह जानना चाहता हूंं वो कौन सी 7 फिल्में हैं जो सुशांत सिंह के हाथ से निकल गई जिनकी वजह से वो बहुत परेशान था। मैंने बहुत कोशिश की गूगल पर यूट्यूब पर दो तीन घण्टे खराब किए कहानी ज्ञान आदि तो बहुत मिले लेकिन वो 7 नाम नहींं मिले।

किसी को मिले तो कृपया बताएंं। किस योजना के तहत यह 7 फिल्मों की कहानी गढ़ी गई मुझे नहींं पता लेकिन इन 7 फ़िल्मों की कहानियों ने सुशांत के चाहने वालो में खूब रोष भर दिया।

सुशांत अपने मित्र और पार्टनर वरुण माथुर के साथ एक 12 पार्ट की सीरीज बना रहे थे...

sushant singh rajput suicide case bollywood black face behind sushant singh rajput death dark side of film industry
सुशांत सिंह राजपूत के आसपास सब हवा-हवाई प्रोजेक्ट घूम रहे थे - फोटो : social media

अब आगे चलते है फ़िल्म का नाम राइफल मैन निर्माण कम्पनी अबुदन्तिया एंटरटेनमेंट कहानी को लेकर विवाद फ़िल्म फिलहाल बन्द। आनन्द गांंधी ने अपनी पहली फ़िल्म शिप ऑफ थीसिस रिलीज 2013 को लेकर बहुत प्रशंसा पाई थी।

उन्होंने मीडिया को बताया वो पिछले तीन महीनों से सुशांत से लगातार मिल रहे थे। कहानी स्क्रिप्ट पर चर्चा कर रहे थे। फिल्म इमरजेंसी की कहानी उन्हें बहुत पसन्द थी। आनन्द बहुत कुछ कर रहे हैंं लेकिन बुरा न लगे तो यदि आपकी उपलब्धियों को जानने के लिए गूगल खंगालना पड़े तो आप अभी बहुत अधूरे हैंं।

2013 के बाद आप कोई फीचर फिल्म ही डायरेक्ट नहींं कर पाए। आपने कहा यह कर रहे हैंं वो कर रहे हैं  और न जाने क्या क्या कर रहे हैं, मेरे भाई निर्माता कौन है। वो अमेेरिकन कम्पनी कौन सी है।

आप यदि 2013 में एक चर्चित फिल्म बनाकर चर्चा में आए थे तो खुद को साबित करने के लिए एक फ़िल्म तो निर्देशित करनी थी। चलिए अब बता दीजिए किसके साथ बना रहे हैं, हीरो कौन हैं, निर्माता कौन हैं? यकीनन आप हमारी और अपनी तसल्ली के लिए कह सकते हैं कि निर्माता भी आप ही हैंं तो सात साल में क्यो नहींं हो पाए?

सुशांत अपने मित्र और पार्टनर वरुण माथुर के साथ एक 12 पार्ट की सीरीज बना रहे थे जिसमें चाणक्य से लेकर अब्दुल कलाम तक नजर आते लेकिन वो भी हवा में ही थी, अख़बार की खबर सही मानेंं तो उसका भी भविष्य निश्चित नही था।

संजय लीला भंसाली ने कहा,कहा या नहींं मुझे नही पता कि मैंने सुशांत को चार फिल्में ऑफर की थी। मैं मानता हूं चलो एक ही की हो तो भी वो इन सब फिल्मों पर भारी ही होती। रिलीज भी होती और हिट होने की संभावना भी अधिक होती।

यह हो सकता है कि सुशांत ने इन न बनने वाली फिल्मों की खातिर भंसाली को मना किया हो। दो तीन और बड़े निर्माताओं को मना किया हो। ऐसे में संभव है अन्य निर्माताओं और कॉरपोरेट हाउस ने सोच लिया हो कि जब यह भंसाली यशराज को मना कर रहा है तो इसे फिल्में नही करनी है और तब समस्या होती है ईगो की।

फ़िल्म निर्माता आपसे दूर होने लगते हैंं। आप इसलिए नहींं जाते कि आपके पास तो फिल्में हैंं ही। यदि यह फिल्में नहींं बन रही थी तब भी कोई समस्या नहींं थी आपको अपने पीआर के द्वारा सिर्फ तीन चार मुख्य अखबारों में इंटरव्यू देने थे कि मेरी डेट अभी खाली हो गई है जिन फ़िल्मों को मैंने डेट दी थी उन फ़िल्मों को बनने में देर है।

यकीन मानिए जो मुकाम सुशांत ने बना लिया था उससे उसे कुछ बड़ी फिल्में मिलती ही मिलती, बशर्ते उन्होंने छिछोरे फ़िल्म के बाद अपनी फीस अनाप शनाप न बड़ा दी हो।

कल पढ़ रहा था किसी वकील साहब ने 7 लोगों पर मुकदमा दायर कर दिया है बिहार में कहींं। वजह है फ़िल्म सितारों और निर्माता कम्पनियों के कारण सुशांत ने खुदकुशी कर ली। सरकार और अदालतों को इस परम्परा पर अंकुश लगाना चाहिए जब केस स्थानीय पुलिस के जांंच दायरे में है उनके निर्णय आने का इंतजार करना चाहिए ऐसा मुझे लगता है। 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed