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सिंगल चाइल्ड का ट्रेंड कहीं खत्म न कर दे रिश्ते

Thu, 24 Dec 2020 01:42 PM IST
Kanchan Singh Kanchan Singh
Updated Thu, 24 Dec 2020 01:42 PM IST
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single child and loneliness problems in india
घर-ऑफिस के साथ बच्चों की जिम्मेदारी निभाना आसान नहीं होता। - फोटो : अमर उजाला

घर-ऑफिस के साथ बच्चों की जिम्मेदारी निभाना आसान नहीं होता, तभी तो आजकल ज़्यादातर वर्किंग कपल बस एक ही बच्चा चाहते हैं, लेकिन सिंगल चाइल्ड का ये ट्रेंड यदि इसी तरह फलता-फूलता रहा तो शायद एक दिन यह रिश्तों को ही खत्म न कर दे। यकीन न हो तो ज़रा अपने आसपास ऐसे ही सिंगल चाइल्ड वाले परिवार और उन अकेले बच्चों पर नज़र डालिए, कैसी है उनकी ज़िंदगी?

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मेरे पड़ोस में रहने वाली रागिनी की एक 7 वर्षीय बेटी है। चूंकि रागिनी और उसके पति दोनों पूरा दिन ऑफिस में रहते हैं तो बेटी को घर में अकेले एक मेड के भरोसे छोड़ा हुआ है। एक दिन उसकी बेटी कुहू सोसाइटी में बैठी मिली। बहुत उदास लग रही थी, तो मैंने पूछा बेटा क्या हुआ इतने मायूस क्यों हो, उसके बाद उस मासूम ने जो बात कही उसने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया।
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वो बोली आंटी क्या करुं समर वेकेशन शुरू हो गया है और मम्मी-पापा के पास मेरे लिए टाइम ही नहीं है। पूरा दिन घर में अकेले मैं बोर हो जाती हूं। टीवी, गेम्स और खिलौने तो बहुत हैं, लेकिन मुझे तो अपने साथ खेलने वाला कोई चाहिए। जैसे नेहल अपनी बहन (सोसाइटी में रहने वाली दूसरी बच्ची) के साथ खेलती है, वैसे ही मैं भी चाहती हूं कि मेरा भी कोई भाई या बहन हो जिसे मैं गोद में उठाऊं, उसके साथ खेलूं, लेकिन देखों न आंटी मम्मी मेरे लिए बाज़ार से खिलौने तो ले आती है, लेकिन भाई या बहन नहीं लाती।
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आंटी क्या आप उनसे कहोगी कि मुझे भाई/बहन लाकर दे?
 

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बच्चों की दुनिया को सूनी होने से कौन बचाएगा? - फोटो : फाइल फोटो

छोटी सी बच्ची के इन सवालों का क्या जवाब देती कुछ सूझ नहीं रहा था, लेकिन एक बात समझ आ गई कि हम पैरेंट्स तो अपनी सुविधा के लिए एक ही बच्चा काफी है कह देते हैं, लेकिन उस अकेले बच्चे के लिए अपना बचपन बिताना कितना मुश्किल हो जाता है यह नहीं सोचते। उसके साथ टॉफी शेयर करने वाला, शरारत करने वाला, कोई नहीं होता। बच्चे अपना ये अकेलापन किसी से शेयर नहीं कर पातें और करें भी कैसे किसके पास टाइम है उनसे ये सारी बातें करने के लिए।

कुहू की बातें मेरे दिलो-दिमाग से हटने का नाम नहीं ले रही थी। बेचारी बच्ची जिस उम्र में उसे हंसना-खिलखिलाना चाहिए, उस उम्र में ही उसे अकेलेपन का दर्द झेलना पड़ रहा है। कुहू के पैरंट्स की तरह ही यदि हर माता-पिता सिगल चाइल्ड ही करें तो ज़रा सोचिए स्थिति कितनी भयावह हो जाएगी।

मौसी, मामा, चाचा, चाची, बुआ जैसे रिश्ते तो शायद खत्म ही हो जाएंगे। कल को कुहू की शादी होगी तो मयाके में माता-पिता के अलावा तो कोई रहेगा ही नहीं और उनके जाने के बाद को मायका ही नहीं रहेगा, उसके बच्चे होंगे तो किसे मामा, मौसी कहेंगे? ननिहाल क्या होता है कभी जान ही नहीं पाएंगे।

इस तरह तो एक दिन सारे रिश्ते ही खत्म हो जाएंगे और जीवन एकदम एकाकी हो जाएगा। ऐसी बाते सोचते-सोचते ही मुझे नींद आ गई, लेकिन कुहू के सवाल का जवाब नहीं ढूंढ़ पाई कि क्या मैं उसकी मम्मी से कह सकती हूं बाज़ार से भाई/बहन लाने के लिए?

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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