पेशाब कांड: मध्य प्रदेश में जो हुआ वो मनुष्यता को शर्मसार करने वाला है
हर किसी ने इस घटना पर अपने विचार रखे और इस हरकत को शर्मसार करने वाला बताया। लेकिन मामला सिर्फ इतने पर ही नहीं थमा बल्कि, अब तो नेता दशमत रावत को घर बुलाकर उनके पैर धोते हुए भी नजर आ रहे हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बीते दिनों मध्य प्रदेश से एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया या यूं कहे कि इंसान को इंसान कहने पर ही शर्म आने लगी। मामला कुछ यूं था कि बीजेपी के कार्यकर्ता और सीधी से बीजेपी विधायक केदार शुक्ला के प्रतिनिधि प्रवेश शुक्ला ने एक आदिवासी समाज के व्यक्ति दशमत रावत के सिर पर पैशाब कर दी। इस घटना का वीडियो सामने आया और खूब वायरल भी हुआ। वहीं, आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और साथ ही उस पर एनएसए लगाकर उसके घर को गिरा दिया गया है।
पर यहां सवाल आदिवासी, किसी व्यक्ति समाज या कथित धर्म का नहीं है बल्कि, मानवता सबसे बड़ा धर्म है और हम एक ऐसे समाज में रहते हैं और हमारे ही समाज में हमारी ही संस्कृति में वसुधैव कुटुंबकम की धारणा या उस धर्म को माना जाता है, तो फिर एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति पर पेशाब करना ये सवाल खड़ा करता है कि हम किस नैतिक-चारित्रिक पतन की तरफ जा रहे हैं?
हर किसी ने इस घटना पर अपने विचार रखे और इस हरकत को शर्मसार करने वाला बताया। लेकिन मामला सिर्फ इतने पर ही नहीं थमा बल्कि, अब तो नेता दशमत रावत को घर बुलाकर उनके पैर धोते हुए भी नजर आ रहे हैं। यही नहीं, सीएम शिवराज सिंह चौहान ने दशमत रावत को पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि और घर बनाने के लिए डेढ़ लाख रुपये की राशि भी स्वीकृत की।
भावुक हो गए शिवराज सिंह
जी हां, एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री आवास पर दशमत रावत को बुलाया। वहीं सीएम ने पीड़ित के पैर धोए, उन्हें माला पहनाई, शॉल और श्रीफल दिए। यही नहीं, दशमत को शिवराज सिंह ने मीठा भी खिलाया और अपने साथ नाश्ता भी कराया। जिस वक्त शिवराज सिंह पीड़ित के पैर धो रहे थे, उस वक्त वे भावुक नजर आए। उनके चेहरे के भाव बता रहे थे कि वे दिल से आहत हुए हैं और इस घटना से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है। सीएम ने पीड़ित के न सिर्फ पैर धोए बल्कि उस पानी को अपने सिर से भी लगाया। साथ ही एक शॉल उड़ाकर उन्हें माला भी पहनाई।
सीएम ने इस पर मीडिया से कहा कि, "भाई दशमत के साथ अन्याय हुआ। मेरा मन दर्द, पीड़ा और व्यथा से भर गया। इसलिए मैंने दशमत को यहां बुलाया और मन क्योंकि गहरी वेदना से भरा हुआ था। मन में बहुत तकलीफ थी कि एक बहुत अमानवीय घटना हमारे भाई के साथ घटी।" यही नहीं, इससे पहले मामला सामने आते ही सीएम ने कहा था कि 'आरोपी के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी और उसे छोड़ा नहीं जाएगा।'
सीएम शिवराज सिंह के इस कदम को बीजेपी ने खूब सरहाया, लेकिन विपक्ष मुख्यमंत्री पर सवाल खड़े करने लगा कि राज्य में आदिवासियों की क्या स्थिति है। कांग्रेस ने तो इसको लेकर पांच सदस्तीय टीम तक का गठन कर दिया है, जिसमें पूर्व सांसद मानिक सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष लाल चंद गुप्ता, पूर्व विधायक सरस्वती सिंह, जिला कांग्रेस कमेटी के सदस्य ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह और वरिष्ठ नेता बसंती कोल शामिल हैं। आज यानी 8 जुलाई 2023 तक इस टीम को अपनी जांच रिपोर्ट देने को कहा गया है।
कांग्रेस भी नहीं पीछे
यही नहीं, सीएम शिवराज सिंह के पीड़ित दशमत रावत का सम्मान करने के बाद कांग्रेस जिला अध्यक्ष ज्ञान सिंह पीड़ित के घर पहुंचे। जहां उन्होंने पहले गंगाजल छिड़कर दशमत रावत का शुद्धिकरण किया। फिर उनका गंगाजल से मुंह धोया और एक गमछे से मुंह और सिर को साफ भी किया। आखिर में ज्ञान सिंह ने पीड़ित को टीका लगाया।
क्या बीजेपी के लिए खतरे की घंटी?
इस घटना से जहां लोग आक्रोशित हैं, तो वहीं बीजेपी के लिए ये मामला चिंता का विषय बना हुआ है और हो भी क्यों न। दरअसल, एमपी में आदिवासी समाज की आबादी 21 प्रतिशत है और विधानसभा की 47 सुरक्षित सीटें आदिवासियों के लिए है। ऐसे में आंकड़ों के फेर को समझें तो नजर आता है कि जो बीजेपी आदिवासियों के वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी में थी, अब उसको कहीं न कहीं चोट पड़ती हुई नजर आ रही है।
कांग्रेस को भी है आस
बात अगर कांग्रेस की करें, तो वो इस मुद्दे को बिल्कुल सस्ते में छोड़ने के मूड में नहीं है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि वो जानती है कि राज्य में 47 सुरक्षित आदिवासी सीट हैं और मौजूदा समय में इसमें से 30 उनके पास है और बीजेपी के पास 16 सीट हैं। ऐसे में कांग्रेस इन कुल सीटों पर इस मुद्दे के जरिए अपना परचम लहराना चाहती है।
शिवपुरी से भी आया ऐसा ही मामला
वहीं, एक मामला शिवपुरी जिले से समाने आया, जहां पर दो युवकों के साथ अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया। आरोप है कि कुछ दिन पहले दो दलित युवकों को पहले तो चप्पलों की माला पहनाई गई और फिर उन्हें मल खिलाकर उनका जुलूस निकाला गया। इस मामले में पुलिस 7 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है और आरोपियों के घर पर बुलडोजर चला दिया गया है।
ऐसे में सवाल ये नहीं कि चुनाव के दौरान राज्य के मुख्या या अन्य नेता उस आदिवासी के पैर क्यों धो रहे हैं? बल्कि, इसे प्रतीक के तौर पर ठीक माना जा सकता है। सरकार ऐसे लोगों का सम्मान करती है, तो इससे पता चलता है कि सरकार आखिरी छोर पर बैठे व्यक्ति के बारे में भी विचारनीय है। पर राजनीति से इतर सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्या हो गया है कि समाज का नौतिक और चारित्रिक पतन इतना हो गया है? हमारे घर के संस्कार, परिवार द्वारा दी गई अच्छी सीख की क्या गति हो गई है? क्या वे इतने रसातल में पहुंच गए हैं?
वहीं, सवाल ये भी उठता है कि संस्कृति, धर्म, परिवार और नैतिक मूल की दुहाई देने वाली एक बड़ी पार्टी, जिसका राजनैतिक परिवेश या कहें कि सामाजिक परिवेश आरएसएस जैसे संगठन से जुड़कर के आता है तो फिर ऐसी कौन से संस्कारों की कमी रह गई कि एक मनुष्य दूसरे मनुष्य पर अपनी विष्ठा और मल का त्याग कर रहा है। आखिर वो इस मनोस्थिति तक कैसे पहुंचा या उसकी सोच इस घटिया स्तर पर कैसे पहुंची?
जाहिर है कि शिवराज सिंह चौहान ने पीड़ित व्यक्ति का सम्मान किया और बताया कि उनकी अंतर आत्मा कितनी दुखी है और इसे स्वीकार भी कर लिया जाए और दुखी होना जायजा भी बनता है और उन्होंने एक अच्छा काम किया। पर सवाल ये है कि भविष्य में इस तरह के कृत्य न हो, इसको लेकर क्या स्थिति है? इस घटना का वीडियो तो सामने आ गया था। यदि वीडियो नहीं आता तो इसके पीछे का काला सच हमें नहीं नजर आता?
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।