डॉ. वेद प्रताप वैदिक स्मृति शेष: सर्वाधिक 'युवा बुजुर्ग' पत्रकार का यूं अचानक चले जाना
छोटा हो या बड़ा सबसे वो सहज भाव से मिलते थे। युवा पत्रकारों के लिए वो प्रेरणास्रोत थे तो समकालीनों के लिए हमेशा सखा भाव उनके भीतर था।
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वेद प्रताप वैदिक जी से मेरी मुलाकात पहली बार तब हुई, जब मैंने नवभारत टाइम्स में बतौर उप संपादक काम करना शुरू किया, ये 1985 की बात होगी। हालांकि उनका नाम और उनके भाषा आंदोलन समाजवादी विचारों के कारण मैं उनके व्यक्तित्व से परिचित था। जल्दी ही मेरा परिचय निकटता में बदल गया।
संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में अंग्रेजी की अनिवार्यता खत्म करने और हिंदी सहित संविधान की आठवीं सूची में शामिल सभी भारतीय भाषाओं में कराने का आंदोलन। धरना और अनशन शुरू हुआ तो मेरी वैदिक जी से निकटता और बढ़ गई। हालांकि तब वो नवभारत टाइम्स छोड़कर हिन्दी समाचार एजेंसी भाषा के संपादक बन चुके थे। इसके बाद भाषा स्वदेशी जैसे मुद्दों और धार्मिक पाखंड सांप्रदायिकता जातिवाद के खिलाफ संघर्ष में हम लगातार साथ रहे।
स्वामी अग्निवेश और कैलाश सत्यार्थी द्वारा चलाए गए तमाम अभियानों आंदोलनों में वैदिक जी की सक्रिय भागीदारी होती थी और बतौर पत्रकार मैं भी उनसे जुड़ता था।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों की समझ थी लाजवाब
वैदिक जी के साथ मेरा मिलना जुलना और संवाद लगातार बना रहा। उनकी अंतरराष्ट्रीय समझ और संपर्कों के सभी कायल थे। देश-विदेश के हर बड़े राजनेता के साथ उनका सीधा रिश्ता था। अपने लेखन और संबोधन में वो बेहद बेबाक थे। उन्होंने सत्ता या सरकार से कभी कोई सौदा या समझौता नहीं किया। जिन मुद्दों और मूल्यों के लिए उन्होंने संघर्ष किया उन्होंने आजीवन उसका पालन किया। उम्र पद और अनुभव की वरिष्ठता उन पर कभी भी हावी नहीं रही।
छोटा हो या बड़ा, सबसे वो सहज भाव से मिलते थे। युवा पत्रकारों के लिए वो प्रेरणास्रोत थे तो समकालीनों के लिए हमेशा सखा भाव उनके भीतर था। ''न काहू सन दोस्ती न काहू सन वैर'' उनके जीवन का मूल मंत्र था।
आतंकवादी संगठन लश्कर ए तैयबा प्रमुख हाफिज सईद से उनकी मुलाकात बेहद चर्चित हुई। उन्हें तारीफ और आलोचना दोनों मिली पर वो अविचलित रहे और अपनी बात पर डटे रहे। कई मामलों में वेद प्रताप वैदिक बेजोड़ थे और जीवन के चौथे पहर में भी उनकी सक्रियता किसी युवा से भी ज़्यादा थी। इस लिहाज से उन्हें वर्तमान में भारतीय पत्रकारिता का सर्वाधिक युवा बुजुर्ग पत्रकार माना जा सकता है। पत्रकारिता के शिखर पुरुष वेद प्रताप वैदिक के अचानक चले जाने से देश ने एक बुजुर्ग लेकिन बेहद सक्रिय पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता खो दिया है।
विनम्र श्रद्धांजलि
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