फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   See Yourself in the Context of the Universe: Albert Einstein Timeless Message for Humanity

हरेक को ब्रह्मांड के संदर्भ में देखें: अल्बर्ट आइंस्टीन का संदेश, जो जीवन की सोच बदल सकता है

Sat, 06 Jun 2026 06:52 AM IST
शिवम गर्ग अल्बर्ट आइंस्टीन
अल्बर्ट आइंस्टीन Published by: शिवम गर्ग Updated Sat, 06 Jun 2026 06:52 AM IST
सार

जब आप स्वयं को केवल एक व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि पूरे ब्रह्मांड के संदर्भ में देखने लगते हैं, तब पाते हैं कि आपकी व्यक्तिगत चिंताओं से कहीं अधिक विशाल, महत्वपूर्ण और सुंदर सत्य इस संसार में मौजूद है।

विज्ञापन
See Yourself in the Context of the Universe: Albert Einstein Timeless Message for Humanity
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिन्ट/एजेंसी

विस्तार

मनुष्य उस विराट सत्ता का एक छोटा-सा अंश है, जिसे हम ‘ब्रह्मांड’ कहते हैं। उसका अस्तित्व समय व स्थान की सीमाओं में बंधा हुआ है। वह स्वयं को, अपने विचारों को और अपनी भावनाओं को बाकी सृष्टि से अलग अनुभव करता है। यह अलगाव वास्तव में उसकी चेतना का एक भ्रम है। यही भ्रम एक ऐसी अदृश्य कैद बन जाता है, जो उसे उसकी निजी इच्छाओं, स्वार्थों और केवल कुछ निकटतम लोगों तक सीमित प्रेम के दायरे में बांध देता है।

विज्ञापन


हमारा उद्देश्य इस कैद से मुक्ति होनी चाहिए। यह तब संभव है, जब हम अपनी करुणा और प्रेम का विस्तार करें। हमें अपने हृदय को इतना विशाल बनाना चाहिए कि उसमें केवल अपने प्रियजन ही नहीं, बल्कि सभी जीवित प्राणी और संपूर्ण प्रकृति अपनी समस्त सुंदरता के साथ समा सकें। यद्यपि कोई भी व्यक्ति इस आदर्श को पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं कर सकता, फिर भी उसकी ओर निरंतर बढ़ते रहना ही स्वतंत्रता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जीवन का मूल्य तभी समझ में आता है, जब हम स्वयं को किसी बड़े उद्देश्य से जोड़ते हैं।
विज्ञापन


इसलिए सफलता के पीछे भागने के बजाय मूल्यवान बनने का प्रयास कीजिए। सफलता क्षणिक हो सकती है, लेकिन मूल्य स्थायी होता है। एक सच्चा मूल्यवान व्यक्ति वह होता है, जो जीवन से जितना प्राप्त करता है, उससे अधिक समाज, मानवता और संसार को लौटाने का प्रयास करता है। कुछ ऐसा सृजित कीजिए, जो दुनिया को बेहतर बनाए। यह भी सुनिश्चित कीजिए कि आपकी रचनात्मकता मानवता के लिए अभिशाप न बने। ज्ञान, विज्ञान व प्रतिभा तभी सार्थक हैं, जब वे मनुष्य और प्रकृति के कल्याण में योगदान दें। जब आप स्वयं को केवल एक व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि पूरे ब्रह्मांड के संदर्भ में देखने लगते हैं, तब आपके भीतर एक गहरी आवाज जन्म लेती है। वह आपको याद दिलाती है कि आपकी व्यक्तिगत चिंताओं से कहीं अधिक विशाल, महत्वपूर्ण व सुंदर सत्य इस संसार में मौजूद है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed