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दूसरा पहलू: प्रकृति के अनदेखे नायकों का रहस्य; भारत पतंगों की दृष्टि से दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में से एक

Thu, 02 Jul 2026 08:35 AM IST
Pavan कुमार सिद्धार्थ
कुमार सिद्धार्थ Published by: Pavan Updated Thu, 02 Jul 2026 08:35 AM IST
सार

पतंगों के बिना जैव विविधता, कृषि व्यवस्था और खाद्य शृंखलाएं अधूरी हैं। भारत पतंगों की दृष्टि से दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में से एक है। यहां इनकी 12,000 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। जब पतंगे फूलों से रस ग्रहण करते हैं, तो परागण की प्रक्रिया पूरी होती है। बागवान कैटरपिलरों को देखकर कीटनाशकों का छिड़काव शुरू कर देते हैं, जिससे पतंगों की संख्या में कमी आ जाती है।

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Secret of nature's unseen heroes; India is one of the world's richest countries in terms of moths
अमर उजाला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पतंगे (मॉथ) प्रकृति के उन अनदेखे नायकों में शामिल हैं, जिनके बिना हमारी जैव विविधता, कृषि व्यवस्था और खाद्य शृंखला अधूरी पड़ सकती है। दुनियाभर में तितलियों के संरक्षण की बातें होती हैं, मधुमक्खियों के महत्व पर चर्चा होती है, पर पतंगों को शायद ही कभी वह महत्व मिलता है, जिसके वे हकदार हैं।
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हाल ही में ब्रिटेन में रॉयल हॉर्टिकल्चरल सोसाइटी व वाइल्डलाइफ ट्रस्ट्स ने लोगों से अपील की कि वे अपने बगीचों में पतंगों व उनके कैटरपिलरों (इल्ली) को पनपने दें। इस अभियान का संदेश सरल है कि यदि हमें प्रकृति को बचाना है, तो उन छोटे जीवों के लिए भी जगह बनानी होगी, जिन्हें हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं।
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भारत पतंगों की दृष्टि से दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में से एक है। यहां मॉथ की 12,000 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। पूर्वोत्तर भारत में मिलने वाला ‘एटलस मॉथ’ दुनिया के सबसे बड़े पतंगों में गिना जाता है। इसके पंखों का फैलाव लगभग 30 सेंटीमीटर तक हो सकता है। वहीं ‘इंडियन मून मॉथ’ की हरी चमकदार रंगत व लंबी पूंछनुमा संरचना उसे किसी जीवित कलाकृति जैसा बना देती है। तितलियों की तुलना में पतंगे हमेशा उपेक्षित रहे हैं। इसका एक कारण इनका रात्रिचर होना भी है। जो जीव दिन में दिखाई देते हैं, उन्हें हम आसानी से पहचान लेते हैं, लेकिन रात के अंधेरे में अपना काम करने वाले जीव अक्सर हमारी नजर से दूर रह जाते हैं।
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भारत में कई पौधे ऐसे हैं, जो शाम ढलने के बाद खिलते हैं व अपनी तीव्र सुगंध के जरिये पतंगों को आकर्षित करते हैं। जब पतंगे इन फूलों से रस ग्रहण करते हैं, तो अनजाने में परागण की प्रक्रिया भी पूरी करते हैं। अक्सर बागवान कैटरपिलरों को देखकर कीटनाशकों का छिड़काव शुरू कर देते हैं, जिससे पतंगों की संख्या में कमी आ जाती है।


विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रात के समय अनावश्यक बाहरी रोशनी को सीमित किया जाए। इससे पतंगों और अन्य रात्रिचर जीवों को लाभ मिलता है। भारत में मोबाइल एप व नागरिक विज्ञान (सिटिजन साइंस) मंचों के माध्यम से आम लोग भी वैज्ञानिक अनुसंधान में योगदान दे रहे हैं। रात के अंधेरे में फूलों का परागण करने वाले ये नन्हे जीव हमें याद दिलाते हैं कि प्रकृति का संतुलन अनेक अदृश्य धागों से बुना गया है। यदि इनमें से कोई एक धागा टूटता है, तो पूरा ताना-बाना कमजोर पड़ सकता है। पतंगे विशाल प्राकृतिक व्यवस्था के प्रतिनिधि हैं, जिनके सहारे हमारी खेती, हमारे जंगल और हमारा जीवन टिका हुआ है।
 
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