एससीओ समिटः मोदी-जिनपिंग के बीच बातचीत और हालात
एससीओ समिट के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रवानगी के बाद भी चीन के राष्ट्रपति से भेंट-मुलाकात को लेकर भले संशय के बादल हैं लेकिन बातचीत के हालात बन रहे हैं। 2 साल की तनातनी के बीच 2 हफ्ते के घटनाक्रम के चलते तेजी से परिस्थितियां बदली हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एससीओ समिट में शामिल होने के लिए समरकंद रवाना हो चुके हैं। 2 साल से चीन की सेना के साथ तनातनी थी। चीन की सेना का गोगरा-हॉट स्प्रिंग से पीछे हटना शुभ संकेत है। चीन की सेना के बैकफुट पर आने से एक बार फिर मोदी-जिनपिंग के बीच बातचीत की परिस्थितियां बन गई हैं। ऐसे ही माहौल में पहले भी एक बार बातचीत का मार्ग प्रशस्त हुआ था।
दरअसल, 2016-17 में भी करीब-करीब ऐसी ही परिस्थितियां थीं। 2016 में दोकलम तनाव के बाद जब 2017 में ब्रिक्स सम्मेलन का मौका था, तब भी मोदी-जिनपिंग मुलाकात की पृष्ठभूमि ऐसे घटनाक्रम में तैयार हुई थी। अभी एक दिन पहले ही विदेश मंत्री जयशंकर ने संकेत दिए कि भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर एक समस्या थोड़ी कम हुई है।
जाहिर है ऐसे में यदि एससीओ समिट के बहाने मोदी-जिनपिंग की मुलाकात होती है, तो इस भेंट-मुलाकात में भले सीमा विवाद का हल पूरी तरह न निकले लेकिन यह उम्मीद तो जगेगी ही कि 2020 से पहले की स्थिति पूरी तरह बहाल हो जाए और सीमा विवाद के स्थायी निदान की दिशा में दोनों फिर से एक कदम और आगे बढ़ाने को सैद्धांतिक सहमति बना लें।
अभी चीन की सेना सिर्फ गोगरा-हॉट स्प्रिंग से बैकफुट पर है। दोकलम को लेकर खींचतान पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है। दोनों के बीच सीमा विवाद वर्षों पुराना है, जिसका स्थायी हल बाकी है।
चीन की सेना बैकफुट पर, बातचीत का मार्ग प्रशस्त
गलवान संघर्ष से करीब दो साल से गोगरा व हॉट स्प्रिंग में पेट्रोलिंग प्वाइंट 15 पर भारत और चीन की सेना के बीच तनातनी थी। तनातनी कम करने के लिए दोनों सेनाओं के बीच कमांडर स्तर की 16 दौर की वार्ता हुई। हर बार दोनों तरफ से पीछे हटने को लेकर उम्मीदें जगीं। सैद्धांतिक सहमति बनीं लेकिन जमीन पर दोनों सेनाएं आमने-सामने तनी रहीं।
चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ विदेश मंत्री जयशंकर की भी 5 दौर की वार्ता हुई। इसी साल मार्च में भारत दौरे पर आए चीन के विदेश मंत्री वांग यी को जयशंकर ने दो टूक संदेश भी दिया कि सीमा विवाद के निपटारे के लिए किसी भी पहल से पहले लद्दाख में 2020 से पहले की स्थिति बहाल हो। अब जब चीन की 12 सितंबर को बैकफुट पर चली गई है तो इससे फिर बातचीत का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
वार्ता और कूटनीति साथ-साथ, 2 हफ्ते में बदली परिस्थितियां
2 साल की तनातनी के बीच 2 हफ्ते के घटनाक्रम से परिस्थितियां काफी हद तक बदलीं। एक तरफ कमांडर स्तर की वार्ता तो दूसरी तरफ भारत की चौतरफा कूटनीति से चीन की सेना बैकफुट पर है। एससीओ समिट में मोदी-जिनपिंग के बीच वातचीत के कयास की कूटनीतिक वजहें भी हैं। इसी सितंबर के पहले हफ्ते (1 से 7 सितंबर के बीच) रूस में वोस्तोक संयुक्त सैन्य अभ्यास हुआ। रूस की धरती पर वोस्तोक सैन्य अभ्यास से भारत और चीन जुड़े। इससे पश्चिमी देश अमेरिका और जापान नाराज हुए। वोस्तोक संयुक्त सैन्य अभ्यास से रूस-चीन-भारत करीब आए। एससीओ समिट के दौरान भी मोदी की पुतिन से द्विपक्षीय बातचीत तय है।
युक्रेन से युद्ध के बाद दोनों की आमने-सामने पहली बार बात होगी। इससे पहले पुतिन से मोदी वर्चुअल शांति की अपील कर चुके हैं। वोस्तोक में सैन्य अभ्यास से कूटनीतिक और सामरिक नजरिये से चीन के साथ रिश्ते की भी नई जमीन तैयार हुई। इस वोस्तोक सैन्य अभ्यास से नाराज जापान के चलते भारत को नौसेना सामुद्रिक अभ्यास से पीछे कदम खींचना पड़ा, लेकिन भारत ने जापान के साथ 8 सितंबर को टु प्लस टु वार्ता के दौरान यह नाराजगी दूर कर ली।
दोनों के बीच सुरक्षा-सहयोग पर फिर से सहमति बनी। भारत-जापान वायु सैन्य अभ्यास के लिए अब रजामंद हो चुके हैं। हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामकता के बीच दोनों देशों ने अपनी-अपनी प्रतिबद्धताएं भी दोहराईं। इसी बीच, गत 2 सितंबर को भारत ने आईएनएस विक्रांत के स्वदेशी अवतार के जरिये दुनिया को सामुद्रिक सुरक्षा व ताकत का भी अहसास कराया।
जाहिर है, एससीओ समिट में पुतिन से प्रस्तावित द्विपक्षीय मुलाकात और पिछले हफ्ते जापान के साथ टु प्लस टु वार्ता के साथ-साथ वोस्तोक में संयुक्त सैन्य अभ्यास के जरिए भारत-चीन के बीच बातचीत का माहौल बनता नजर आ रहा है, इसलिए भले आधिकारिक तौर पर अभी भी मोदी-जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता को लेकर संशय के बादल हैं लेकिन 2 हफ्ते के घटनाक्रम से दोनों के बीच हाय-हैलो (द्विपक्षीय वार्ता) के हालात बन गए हैं, जैसा दोकलम के बाद हुआ था।
सीमा विवाद निपटारे की दिशा में मोदी-जिनपिंग के बीच यदि बातचीत की परिस्थितियां बन रही हैं तो यह शुभ संकेत है। उम्मीद की जाए कि एससीओ समिट के बहाने दोनों के बीच फिर से कुछ बात बन जाए...। हां- हां बात बन जाए।
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