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26 January Republic Day 2020: विकास की राह पर चलता दुनिया का सबसे बड़ा गणतंत्र

Sun, 26 Jan 2020 10:26 AM IST
Shankar Suwan Singh शंकर सुवन सिंह
Updated Sun, 26 Jan 2020 10:26 AM IST
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Republic day 2020 History, significance and facts
26 जनवरी 1950 से पहले भारत संवैधानिक तौर पर गणराज्य नहीं बल्कि राजतंत्र ही था। - फोटो : PTI

भारत में गणतंत्र दिवस को बहुत अहम दिन माना जाता है। इस दिन हमारे देश का संविधान लिखा गया था। गणतंत्र दिवस से सभी भारतीयों की भावनाएं जुडी हुई हैं। गणतंत्र के 70 वर्ष पूरे हो गए हैं। आजादी के बाद देश को चलाने के लिए डॉ भीमराव अम्बेडकर के नेतृत्व में हमारे देश का संविधान लिखा गया, जिसे लिखने में पूरे 2  साल 11 महीने और 18 दिन लगे। 26 जनवरी 1950 को सुबह 10:18 मिनट पर भारत का संविधान लागू किया गया था और इसी उपलक्ष्य में हम 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाने लगे।

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26 जनवरी 1950 से पहले भारत संवैधानिक तौर पर गणराज्य नहीं बल्कि राजतंत्र ही था। 26 जनवरी 1950 से पहले गर्वनमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 के तहत भारत में शासन चलाया जाता था। दिल्ली में 26 जनवरी, 1950 को पहली गणतंत्र दिवस परेड, राजपथ पर न होकर इर्विन स्टेडियम (आज का नेशनल स्टेडियम) में हुई थी। 1955 को दिल्ली के राजपथ पर गणतंत्र दिवस की पहली परेड हुई थी।
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गणतंत्र दिवस के मौके  पर राजपथ पर परेड आयोजित की जाती है और इस परेड की सलामी देश के राष्ट्रपति लेते हैं। हर साल 21 तोपों की सलामी दी जाती है। 1950 से हम गणतंत्र दिवस को हर वर्ष ढ़ेर सारे हर्ष और खुशी के साथ मनाते हैं। 1950 से ही भारत दूसरे देश के राष्ट्रप्रमुखों को गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि के तौर पर आमंतित्र करता आ रहा है। ब्राजील  के राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो गणतंत्र दिवस समारोह 2020 के मुख्य अतिथि हैं। गणतंत्र दिवस की संध्या पर भारत के राष्ट्रपति पद्म पुरस्कार देते हैं।
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गणतंत्र दिवस समारोह का समापन 'बीटिंग रिट्रीट' सेरेमनी से 29 जनवरी को किया जाता है, जबकि स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त ) के जश्न का समापन उसी दिन ही किया जाता है। गणतंत्र दिवस की परेड में गीत अबाईड विथ मी (मेरा साथ दो ) बजाकर समारोह का समापन किया जाता था। इस बार से (26 जनवरी 2020) गीत अबाईड विथ मी की जगह वन्देमातरम के साथ गणतंत्र दिवस कार्यक्रम का समापन होगा। जब इस धुन को बजाया जाता है तो इसे बीटिंग रिट्रीट कहते हैं।

बीटिंग रिट्रीट समारोह सदियों पुराने उस सैन्य परंपरा को दर्शाती है जिसमें इन सैन्य धुनों के बजने पर सेना लड़ना बंद कर देती है और अपने हथियार रख देती है। बाइबिल से लिया गया अबाईड विथ मी गीत महात्मा गांधी का पसंदीदा गीत माना जाता था। गणतंत्र दिवस के समापन पर सैन्य बैंड के 45 मिनट लम्बे कार्यक्रम का समापन इसी गीत से किया जाता है। 2020 में 71 वां गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है। कैप्टन तान्या शेरगिल गणतंत्र दिवस 2020 परेड का नेतृत्व करेंगी। 

 

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गणतंत्र दिवस समारोह का समापन 'बीटिंग रिट्रीट' सेरेमनी से 29 जनवरी को किया जाता है - फोटो : अमर उजाला

आरक्षण का अर्थ है सुरक्षित करना। हर स्थान पर अपनी जगह सुरक्षित करने या रखने की इच्छा प्रत्येक व्यक्ति को होती है, चाहे वह रेल के डिब्बे में यात्रा करने के लिए हो या किसी अस्पताल में अपनी चिकित्सा कराने के लिए विधानसभा या लोकसभा का चुनाव लड़ने की बात हो तो या किसी सरकारी विभाग में नौकरी पाने की।

लोग अनेक तरह की दलीलें  देकर अपनी जगह सुनिश्चित करवाने और सामान्य प्रतियोगिता से अलग रहना चाहते हैं। केवल जाति, धर्म और धन के आधार पर आरक्षण से, गुणी व्यक्तियों को पीछे धकेल कर, हम देश को नुकसान ही पहुंचा रहे हैं। यह देश जाति-धर्म, धनी-गरीब आदि आधारों पर और अधिक विभाजित  होता जा रहा है।

संविधान में आरक्षण की व्यवस्था समाज में सामाजिक न्याय स्थापित करते हुए विधायिका, नौकरशाही एवं न्यायपालिका में सभी प्रकार के जाति-समूहों की समान सहभागिता बढ़ाने के उदेश्य से की गई थी परंतु वोटों के लालच में कोई भी राजनीतिक दल जातिगत सोच से ऊपर नहीं उठ सका तथा सामाजिक समानता प्राप्त करने का अस्त्र आरक्षण सामाजिक वैमनस्य का माध्यम बन गया है।
 

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आरक्षण देने की समय सीमा तय होनी चाहिए जिससे दबे कुचले लोग उभर सकें। - फोटो : Pixabay

संविधान में आरक्षण के साथ-साथ समाज-सुधारकों, राजनेताओं एवं सरकारों को जातिगत सोच से ऊपर उठकर अस्पृश्यता, जातिगत भेद-भाव को समाप्त करने का सामाजिक आंदोलन चलाने की आवश्यकता थी; किंतु ऐसा न होकर राजनीतिक दलों ने जातिगत समीकरणों के आधार पर संसद, विधानसभा एवं पंचायतीराज संस्थाओं के लिए उम्मीदवार खड़े किए और वोट मांगे, राजनेताओं द्वारा जातिगत आधार पर खड़े किए गए संगठनों, शिक्षा संस्थाओं, होस्टलों, पूजास्थलों आदि को प्रश्रय दिया।

लोगों को जातिगत आधार पर नाम रखने के लिए हतोत्साह एवं वर्जित नहीं किया गया, परिणामस्वरूप जातिगत भेदभाव जिस तीव्र गति से कम होना चाहिए था वह कम नहीं हुआ और इस जातिगत भेदभाव की विद्यमानता को बताकर सभी राजनीतिक दलों ने एक स्वर से आरक्षण की अवधि बढ़ाने के लिए संशोधन अधिनियम पारित किए। सत्य और अहिंसा विरोधी रथ पर सवार हो सत्ता के चरम शिखर पर पहुंचने वाले सुधारकों की मनोदशा ठीक नहीं है। सुधारकों की प्रवृत्ति ठीक होती तो देश में आरक्षण को लेकर राजनीति न होती।

शिक्षा समाज का दर्पण है। इस परिपेक्ष्य में शिक्षा का बहुजन हिताए स्वरूप प्रधान होकर गरीब तथा वंचित वर्ग का नेतृत्व करता दिखाई देता है। भारत में शैक्षिक प्रबंधन अच्छा नहीं है। आजादी के बाद देश को चलाने के लिए डॉ भीमराव अम्बेडकर के नेतृत्व में हमारे देश का संविधान लिखा गया। दो शब्दों से मिलकर बना है गणतंत्र। गण और तंत्र। गण का शाब्दिक अर्थ है दल/समूह/लोक। तंत्र का शाब्दिक अर्थ है डोरा/सूत (रस्सी)। अर्थात् ऐसी रस्सी/डोरा,जो लोगों के समूह को जोड़े,लोकतंत्र कहलाता है।

भारत में लोकतंत्र है और राजनेताओं ने  लोकतंत्र का आधार, आरक्षण को बना दिया है। भ्रष्ट प्रशासन, शिक्षा से लेकर न्याय तक का राजनैतिककरण होना, लोकतंत्रात्मक प्रणाली का जुगाड़ तंत्रात्मक हो जाना आदि अन्य सामाजिक कुरीतियों ने जन्म ले लिया। 25/08/1949  में संविधान सभा में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति आरक्षण को मात्र 10 वर्ष तक सीमित रखने के प्रस्ताव पर एस. नागप्पा व बी. आई. मुनिस्वामी पिल्लई आदि की आपत्तियां आई।

डॉक्टर अम्बेडकर ने कहा- मैं नहीं समझता कि हमे इस विषय में किसी परिवर्तन की अनुमति देनी चाहिए। यदि 10 वर्ष में अनुसूचित जातियों की स्थिति नहीं सुधरती तो इसी संरक्षण को प्राप्त करने के लिए उपाए ढूंढ़ना उनकी बुद्धि शक्ति से परे न होगा। आरक्षणवादी लोग, डॉ अम्बेडकर की राष्ट्र सर्वोपरिता की क़द्र नहीं करता। आरक्षणवादी लोगों ने राष्ट्र का संतुलन ख़राब कर दिया है। आरक्षण वादी लोग वोट की राजनीति करने लगे हैं न कि डॉ अम्बेडकर के सिद्धांत का अनुपालन कर रहे हैं ।

आरक्षण देने की समय सीमा तय होनी चाहिए जिससे दबे कुचले लोग उभर सकें। जब आरक्षण देने की तय सीमा के अंतर्गत दबे कुचले लोग उभर जाएं तो आरक्षण का लागू होना सफल माना जाए। 

अतः राष्ट्र के विकास को जीवित रखने के लिए आरक्षण को वोट कि राजनीति से दूर रखना होगा। आरक्षण,  विकास का आधार नहीं हो सकता। आरक्षण लोकतंत्र का आधार नहीं हो सकता। 
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें  blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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