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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा: तेज गेंदबाजी करते थे रविचंद्रन अश्विन, बीमारी ने बनाया था ऑफ स्पिनर

Wed, 18 Dec 2024 02:04 PM IST
Vinod Patahk विनोद पाठक
Updated Wed, 18 Dec 2024 02:04 PM IST
सार

अश्विन ने क्रिकेट खेलने के साथ इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बी.टेक की डिग्री हासिल की है। घरेलू क्रिकेट में कुछ वर्ष बिताने के बाद अश्विन को इंटरनेशनल क्रिकेट में खेलने का मौका मिला। उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ वर्ष 2010 में वनडे खेला और इसी साल टी-20 मैचों में भी पदार्पण किया।

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Ravichandran Ashwin retirement used to bowl fast illness made him an off spinner
रविचंद्रन अश्विन ने क्रिकेट से लिया संन्यास। - फोटो : BCCI

विस्तार

रविचंद्रन अश्विन अब नीली जर्सी में नजर नहीं आएंगे। अश्विन ने ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड में जब इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की तो फैन्स हैरान रह गए, क्योंकि किसी को टीम इंडिया के इस बेहतरीन ऑलराउंडर के एकाएक ऐसा निर्णय लेने की उम्मीद नहीं थी। जैसे, पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर कहा करते हैं- 

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क्रिकेटर को तब संन्यास लेना चाहिए, जब फैन्स पूछें- क्यों ले लिया?


अश्विन ने ऐसा ही कुछ किया है। निश्चित रूप से अश्विन की कमी टीम इंडिया को खलने वाली है। उन्होंने टीम इंडिया के लिए तीनों फॉर्मेट में 287 मैच खेलकर 765 विकेट लिए हैं। उनसे आगे केवल पूर्व कप्तान अनिल कुंबले हैं, जिनके नाम 953 विकेट हैं। अश्विन को क्रिकेट विरासत में मिला। उनके पिता स्वयं तेज गेंदबाज थे और बेटे को भी तेज गेंदबाज बनाना चाहते थे। हालांकि, किस्मत ने अश्विन को ऑफ स्पिनर बना दिया।

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चेन्नई में जन्में अश्विन की तमन्ना बल्लेबाज बनने की थी, लेकिन पिता की इच्छा का ख्याल रखते हुए वो तेज गेंदबाजी करते थे। 14 साल की उम्र में अश्विन के बाएं पैर के लिगामेंट में दिक्कत आ गई। एकबार को लगा कि उनका क्रिकेट करियर खत्म हो जाएगा। डॉक्टरों की सलाह पर सालभर बेड रेस्ट के बाद अश्विन फिट हो गए।

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यहीं से उनके क्रिकेट करियर में सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट आया। अश्विन बीमारी से उठकर आए थे और उनकी स्कूल टीम को स्पिनर की जरूरत थी। शारीरिक रूप से कमजोर अश्विन ने इस अवसर को पकड़ लिया और ऑफ स्पिन गेंदबाजी शुरू कर दी।


अश्विन ने क्रिकेट खेलने के साथ इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बी.टेक की डिग्री हासिल की है। घरेलू क्रिकेट में कुछ वर्ष बिताने के बाद अश्विन को इंटरनेशनल क्रिकेट में खेलने का मौका मिला। उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ वर्ष 2010 में वनडे खेला और इसी साल टी-20 मैचों में भी पदार्पण किया।

अगले ही साल उन्हें वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में खेलने का मौका मिल गया। फिर रविचंद्रन अश्विन ने पलट कर नहीं देखा। अश्विन ने 14 साल के इंटरनेशनल क्रिकेट करियर में 116 वनडे में 156 विकेट, 106 टेस्ट में 537 विकेट और 65 टी-20 मैचों में 72 विकेट लिए हैं।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे तेज 700 विकेट लेने वाले गेंदबाजों में वो दूसरे नंबर पर हैं। उन्होंने मात्र 351 मैचों में यह करिश्मा किया। उनसे आगे केवल श्रीलंका के एम.मुरलीधरन थे, जिन्होंने 308 मैचों में 700 विकेट लिए थे। स्पिन के जादूगर शेन वॉर्न भी इस मामले में रविचंद्रन अश्विन से पीछे हैं और उन्हें 354 मैचों में 700 विकेट लिए थे।

अश्विन ने केवल गेंद से कमाल नहीं कर रहे थे, बल्कि टेस्ट मैचों में 6 शतकीय पारी में खेलीं और 14 अर्धशतक जमाए। 106 टेस्ट मैचों में उनके 3503 रन हैं, जबकि 116 वनडे में 707 रन और टी-20 में 65 मैचों में 184 रन हैं। 

सुखद बात यह है कि अश्विन भले इंटरनेशनल मैचों में खेलते नजर नहीं आएंगे, लेकिन आईपीएल और क्लब क्रिकेट में उनका जलवा देखने को मिलता रहेगा। अश्विन ने अपने रिटायरमेंट की घोषणा करते हुए कहा कि उन्होंने अपने क्रिकेटिंग करियर का आनंद लिया, लेकिन यह बात सही है कि क्रिकेट फैन्स ने भी अश्विन की गेंदबाजी का वैसे ही आनंद लिया है।

अश्विन अगली पीढ़ी के क्रिकेटरों को भी तैयार करने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। चेन्नई में पिछले कई साल से अश्विन जेन नेक्स्ट क्रिकेट इंस्टिट्यूट को चला रहे हैं। उम्मीद यही है कि उनके इंस्टिट्यूड से भारत को और अश्विन मिलेंगे।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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