क्या अब भी सियासत का बड़ा मुद्दा बना रहेगा राम मंदिर का मामला?

Satish Aliaसतीश एलिया Updated Fri, 07 Feb 2020 12:17 PM IST
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राम मंदिर पर ट्रस्ट निर्माण का एलान सरकार ने तय समय सीमा से पहले ही कर दिया।
राम मंदिर पर ट्रस्ट निर्माण का एलान सरकार ने तय समय सीमा से पहले ही कर दिया। - फोटो : self

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तीन दशक से ज्यादा अर्से से भारतीय राजनीति का सबसे अहम और भगवा सियासत के लिए सर्वाधिक मुददा अयोध्या मामला सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले और उसके बाद देश में उसकी स्वीकार्यता के बावजूद देश की राजनीति का सर्वाधिक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। यह आगे भी इसी तरह केंद्रीय भूमिका में बना रहेगा।
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भाजपा श्रेय लेना चाहे तब भी और न लेना चाहे तब भी अन्य दल भाजपा को श्रेय न लेने की नसीहतें दे देकर भाजपा को श्रेय दिलाती रहेंगी, भले आर्थिक मंदी, बेरोजगारी, महंगाई जैसे मुद्दों  पर भाजपा की प्रचंड ताकत से जीत से तामीर हुई मोदी 2.0 सरकार नाकाम नजर आ रही हो।


ताजा मामला सुप्रीम कोर्ट के आदेश में वर्णित का गठन तय समय सीमा तीन माह के चार दिन पहले यानी पांच फरवरी बुधवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के जरिए कर दिए जाने का है। सरकार के पास संसद में ऐलान करने का 7 फरवरी शुक्रवार तक का समय था, उसने दो दिन पहले ही कर दिया।

इसे लेकर कांग्रेस और दिल्ली में उसे पांच साल पहले सत्ता से हटाकर शून्य विधायक संख्या पर पहुंचा चुकी आम आदमी पार्टी ने इसे आठ फरवरी को हो रहे दिल्ली विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश करार दिया।

जाहिर है सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल तो सरकार को करना ही था, भाजपा को शाहीन बाग के नैरेटिव के बरअक्स एक और श्रेय लेने का मुद्दा लेने का अवसर था ही। लेकिन अपने काम के नाम पर मैदान में उतरकर आम आदमी पार्टी भाजपा पर भारी पड़ने के हालात के बावजूद इस मुददे पर वैसे ही घिर गई जैसी वो शाहीन बाग के समर्थन या विरोध से बचने की मुद्रा में नजर आ रही थी।
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