Rajasthan Election Result 2023: मोदी की गारंटी पर वोटर ने जताया भरोसा, सीएम के चेहरे पर असमंजस
राजस्थान में चुनाव परिणामोें के रुझानों से साफ है कि भाजपा सत्ता में लौट रही है और एक बड़ी जीत दर्ज कर रही है। एग्जिट पोल के बाद कांग्रेस को थोड़ी ऑक्सीजन मिलती दिख रही थी, लेकिन कांग्रेस के सारे पासे उल्टे पड़े हैं। बड़ा सवाल फिर वही कि भाजपा में कमान किसको मिलेगी?
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राजस्थान में अब रुझान सीटों में तब्दील होने लगे हैं और भाजपा ने दूदू सीट से जीत की शुरुआत कर अपना खाता खोल लिया है। यह चुनाव पूरी तरह अशोक गहलोत की गारंटी बनाम नरेंद्र मोदी की गारंटी पर लड़ा गया था।
रुझानों से साफ है कि भाजपा सत्ता में लौट रही है और एक बड़ी जीत दर्ज कर रही है। एग्जिट पोल के बाद कांग्रेस को थोड़ी ऑक्सीजन मिलती दिख रही थी, लेकिन कांग्रेस के सारे पासे उल्टे पड़े हैं। बड़ा सवाल फिर वही कि भाजपा में कमान किसको मिलेगी?
सुबह जब मतपत्रों से गिनती शुरू हुई तो भाजपा और कांग्रेस लगभग बराबरी पर थे तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओल्ड पेंशन स्कीम की गारंटी का थोड़ा असर देखने को मिला, लेकिन जैसे ही ईवीएम से वोटों की गिनती शुरू हुई तो थोड़ी ही देर में भारतीय जनता पार्टी ने निर्णायक बढ़त बनाना शुरू कर दी। दोपहर आते-आते यह बहुमत के आंकड़े से काफी ऊपर जा चुकी थी।
राजस्थान का सियासी रिवाज जनता ने निभाया
राजस्थान में 1993 से एक रिवाज चला रहा है, जब हर 5 साल में सरकार बदल जाती है। इस बार अपनी सरकार की योजनाओं के भरोसे अशोक गहलोत ने दम लगाया था कि वह इस रिवाज को बदल देंगे।
उन्होंने ओल्ड पेंशन स्कीम के अलावा चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना, महिलाओं को मोबाइल फोन, साल में 10,000 रुपए, वृद्धों को पेंशन, कॉलेज के छात्रों को लैपटॉप/टैबलेट जैसी कई लोक-लुभावन गारंटी दी थीं। नतीजे से साफ है कि गहलोत की गारंटियों को मतदाता ने सिरे से नकार दिया है। यहां तक की उनके कई मंत्री भी चुनाव हार रहे हैं।
दूसरी ओर, बिना चेहरे के भारतीय जनता पार्टी राजस्थान के चुनाव में उतरी थी। पार्टी ने युवाओं के पेपर लीक, किसानों के कर्जमाफी, महिलाओं के कानून व्यवस्था जैसे कई मुद्दे उठाए थे। भाजपा ने सनातन और तुष्टिकरण के मुद्दों पर भी चुनाव में बहुत अधिक फोकस किया था।
एक तरह से पूरा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चेहरे पर ले लिया था। कई बड़े नेता होने के बावजूद राजस्थान में चुनाव प्रधानमंत्री के इर्दगिर्द घूमा और इसका लाभ नतीजे में देखने को मिल रहा है।
कांग्रेस के लिए कितनी मुश्किलें?
लोकसभा चुनाव 2024 से पहले राजस्थान में कांग्रेस की हार के कई मायने हैं। राजस्थान ने गांधी परिवार को भी झटका दिया है और अशोक गहलोत, जो खुद को नरेंद्र मोदी के समकक्ष नेता बताने पर तूले थे, उनकी राजनीति को गहरा धक्का लगा है।
सचिन पायलट, जो इस पूरे चुनाव में खामोश रहे और बेहद कम सभाएं कीं और नतीजे से पहले कहीं नजर भी नहीं आ रहे तो यही माना जा रहा है कि अब अशोक गहलोत अध्याय समाप्त होकर सचिन पायलट अध्याय राजस्थान में फिर से शुरू होगा। जानकारों का तो यह तक कहना है कि गांधी परिवार भी शायद ही चाहता था।
दूसरी ओर, भाजपा में नेतृत्व को लेकर आगामी एक सप्ताह काफी मंथन वाला रहने वाला है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के अलावा केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल, बाबा बालक नाथ, दीया कुमारी समेत के नाम उनके समर्थक मुख्यमंत्री की रेस में बताते हैं, लेकिन भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा कि राजस्थान की कुर्सी पर कौन बैठेगा? कुल मिलाकर भाजपा ने राजस्थान में कांग्रेस को गहरा धक्का दिया है। यह मोदी की गारंटी और चेहरे की जीत है।