फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   Rajasthan Election 2023: Clash Between Sachin Pilot And Ashok Gehlot And BJP Planning To Win The Election

राजस्थान: कांग्रेस की सत्ता में वापसी की राह में रोड़े ही रोड़े

Tue, 16 May 2023 04:15 PM IST
Vinod Patahk विनोद पाठक
Updated Tue, 16 May 2023 04:15 PM IST
सार

सचिन की नजर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रही है और गहलोत सचिन को पार्टी से बाहर निकालने की मंशा रखते हैं। कई अवसरों पर गहलोत, सचिन को लेकर बेहद आक्रमक बयानबाजी तक कर चुके हैं।

विज्ञापन
Rajasthan Election 2023: Clash Between Sachin Pilot And Ashok Gehlot And BJP Planning To Win The Election
राजस्थान में पायलट बनाम गहलोत - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कर्नाटक चुनाव में बंपर जीत से भले ही कांग्रेस सातवें आसमान पर है, लेकिन राजस्थान में कांग्रेस की राह आसान नहीं है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, सरकार रिपीट होने का लगातार दावा कर रहे हैं, लेकिन उनका खुद का इतिहास इस दावे को कमजोर करता है। वर्ष 2003 और 2013 में जब गहलोत मुख्यमंत्री रहते हुए चुनाव में गए थे तो पार्टी की शर्मनाक हार हुई थी।

विज्ञापन


गहलोत के पूर्व डिप्टी सचिन पायलट, जिन्होंने इस समय कांग्रेस में रहकर ही बगावती तेवर अपनाए हुए हैं, भी इसी मुद्दे को बार-बार उठाकर अशोक गहलोत पर हमला कर रहे हैं। कुल मिलाकर अशोक गहलोत की चौतरफा घेराबंदी शुरू हो चुकी है। 

विज्ञापन

राजस्थान में सरकार के खिलाफ बगावती सुर

11 अप्रैल को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक दिवसीय अनशन करने के बाद 11-15 मई तक सचिन पायलट ने पेपर लीक और भ्रष्टाचार को लेकर अजमेर से जयपुर तक जनसंघर्ष पदयात्रा कर गहलोत सरकार को खुली चुनौती दे दी है। पांच दिन पायलट के निशाने पर अशोक गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे रहीं, लेकिन जब जयपुर में यह पदयात्रा समाप्त हुई तो गहलोत सरकार के मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने अपनी ही सरकार को भाजपा की कर्नाटक सरकार से ज्यादा भ्रष्ट बता डाला।

विज्ञापन
विज्ञापन


गुढ़ा ने तो यहां तक कहा कि हमारी सरकार का एलाइनमेंट खराब हो चुका है। कर्नाटक में 40% कमीशन की सरकार थी, हमारी उससे भी ऊपर है। भ्रष्टाचार के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। अब यदि सरकार का मंत्री ही इस तरीके के आरोप लगाए तो इससे ज्यादा शर्मनाक एक मुख्यमंत्री के लिए क्या हो सकता है? एक और मंत्री हेमाराम चौधरी, जो सचिन के बेहद करीबी हैं, पहले से ही सरकार के खिलाफ आरोप लगाते रहे हैं।

सचिन गुट में नेताओं की लिस्ट भी बढ़ती जा रही है। सचिन पायलट अशोक गहलोत को लेकर वर्ष 2020 से आक्रमक रुख अपनाए हुए हैं। तब वह 19 विधायकों को लेकर मानेसर चले गए थे और सरकार संकट में आ गई थी। तभी से सचिन और गहलोत एक-दूसरे को देखना नहीं चाहते हैं।


पायलट बनाम गहलोत

सचिन की नजर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रही है और गहलोत सचिन को पार्टी से बाहर निकालने की मंशा रखते हैं। कई अवसरों पर गहलोत, सचिन को लेकर बेहद आक्रमक बयानबाजी तक कर चुके हैं और सचिन के साथ मानेसर गए विधायकों पर 10-20 करोड़ रुपये भाजपा से लेने तक का आरोप लगा चुके हैं। सचिन भी खुलकर कह चुके हैं कि वो मुख्यमंत्री को बदलना चाहते थे। सचिन तो पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को अशोक गहलोत की नेता तक बता चुके हैं।

कमाल तो यह है कि दोनों नेताओं पर न तो कांग्रेस आलाकमान का कोई बस चल रहा है, न गांधी परिवार का। दोनों ही गुट एक-दूसरे को निपटाना चाहते हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जिन योजनाओं के सहारे सरकार रिपीट का दम भर रहे हैं, उसके मायने खत्म हो जाते हैं। आम जनता में भी यही संदेश है कि सरकार आपसी झगड़े में फंसी हुई है। 
 

Rajasthan Election 2023: Clash Between Sachin Pilot And Ashok Gehlot And BJP Planning To Win The Election
Rajasthan Election 2023 - फोटो : सोशल मीडिया

पांच साल के बाद सरकार बदलाव का ट्रेंड

राजस्थान में एक चलन ऐसा चला रहा है, जो गहलोत के खिलाफ जाता है। यहां पांच साल कांग्रेस रहती है तो पांच साल भाजपा की। इस ट्रेंड को तोड़ना बेहद मुश्किल है। यह ट्रेंड केवल जनता को लोकलुभावन योजनाएं देने से बदल जाएगा, ऐसा कहना मुश्किल है, क्योंकि राजस्थान में कानून-व्यवस्था, परीक्षाओं के पेपरलीक, भ्रष्टाचार, तुष्टीकरण, अवैध खनन, गैंगवार जैसे बड़े मुद्दे इस समय जनता को साफ-साफ नजर आ रहे हैं।

गहलोत के आगे सबसे बड़ा संकट यह है कि वर्ष 2003 में जब मुख्यमंत्री रहते वो चुनाव में गए थे तो 150 सीटों से 56 सीटों पर आ गए थे और उसके बाद कभी कांग्रेस चुनाव में 100 पार का आंकड़ा पार नहीं कर पाई। वर्ष 2009 में कांग्रेस सत्ता में लौटी, पर उसे 200 में से सिर्फ 96 सीटें मिलीं और गहलोत ने जोड़-तोड़ कर बसपा के विधायकों को कांग्रेस में शामिल करा लिया।

सरकार किसी तरह चलती रही, लेकिन वर्ष 2013 में तो कांग्रेस पार्टी 21 सीटों पर रह गई थी। वर्ष 2018 में कांग्रेस पुनः सत्ता में आई पर 100 सीटें ही पार्टी को मिलीं। सचिन बार-बार कह रहे हैं कि गहलोत के नेतृत्व में पार्टी हारती है। हालांकि, अब चुनाव इतना नजदीक है कि कांग्रेस पंजाब जैसा फैसला, जहां कैप्टन अमरिंदर सिंह को बदल दिया गया था, राजस्थान में नहीं लेना चाहेगी। 

अब तक सचिन पायलट को लेकर जो संकेत मिल रहे हैं, उनके अनुसार वो कांग्रेस की ओर से कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं, ताकि खुद को शहीद दिखाकर इमोशनल कार्ड खेल सकें। अशोक गहलोत गुट भले सचिन पर कार्रवाई चाहता हो, लेकिन पार्टी अब तक इस दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ती नहीं दिख रही।

कर्नाटक में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की जोड़ी की भांति कांग्रेस राजस्थान में भी गहलोत-पायलट को एक रखकर चुनाव में जाना चाहती है। फिलहाल तो इसकी संभावना बिल्कुल भी नजर नहीं आती। एक संभावना जो सबसे प्रबल है, वह यह है कि सचिन नई पार्टी बनाकर तीसरे मोर्चा का गठन कर सकते हैं।

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल लगातार सचिन को रिझाने में लगे हैं। यदि ऐसा होता है तो गुर्जर-जाट समीकरण कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी, दोनों को परेशान कर सकता है। 


भाजपा के लिए भी कई चुनौतियां

जहां तक राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी का सवाल है तो अधिकांश नेता यही मानकर खुद को तसल्ली दे रहे हैं कि पांच साल बाद राज्य में सरकार तो बदलती ही है। राज्य में पार्टी के नेतृत्व को लेकर भी एक असमंजस की स्थिति है।

पार्टी अब तक इस संकट को यह कहकर दूर करती आ रही है कि चेहरा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ही रहेगा। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पिछले कुछ दिनों से सक्रिय हुई हैं। वह दो बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और दोनों ही बार उनके नेतृत्व में पार्टी सत्ता से बेदखल हुई है। ऐसे में उन पर पार्टी दांव लगाएगी, इसकी संभावना कम नजर आती है। 

पार्टी में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को भी एक प्रमुख चेहरा माना जाता है। इसके अलावा अर्जुनराम मेघवाल से लेकर सतीश पूनिया और एक लंबी लिस्ट नेताओं की है, जो खुद को प्रोजेक्ट करते रहते हैं। चुनाव के समय सत्ता के लिए बहुमत वाले नंबर आते हैं तो किसके सिर मुख्यमंत्री का ताज आएगा? यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की जोड़ी ही जानती होगी। फिलहाल तो मौसम की गर्मी से ज्यादा राजस्थान में राजनीति की रेत गर्म होती जा रही है।

---------------------
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकताु, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed