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दूसरा पहलू: समुद्र से उठता वैश्विक खतरा, अल नीनो की आहट से बढ़ी चिंता
Thu, 17 Sep 2026 06:48 AM IST
देवेश त्रिपाठी
मैंडी फ्रायंड
मैंडी फ्रायंड
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Thu, 17 Sep 2026 06:48 AM IST
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गर्मी, सूखा, जंगल की आग और चक्रवात बढ़ने का खतरा
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अमर उजाला प्रिंट
विस्तार
दुनिया एक ऐसे अल नीनो की ओर बढ़ रही है, जिसके सामने पिछली कई घटनाओं के रिकॉर्ड छोटे पड़ सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने चेताया है कि धरती अब चरम मौसमी घटनाओं के बढ़ते खतरे वाले दौर में प्रवेश कर चुकी है। वैज्ञानिक आंकड़े भी संकेत दे रहे हैं कि मौजूदा अल नीनो असाधारण रूप से शक्तिशाली हो सकता है।अल नीनो प्रशांत महासागर के तापमान और हवाओं में होने वाला प्राकृतिक बदलाव है, लेकिन इसका असर केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहता। यह दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में गर्मी, बारिश, सूखे और तूफानों के स्वरूप को प्रभावित करता है। मौजूदा अल नीनो की सबसे बड़ी चिंता इसकी असामान्य तेजी है। सामान्य तौर पर इसका प्रभाव नवंबर से जनवरी के बीच चरम पर पहुंचता है, पर इस बार अगस्त में ही समुद्र का तापमान सामान्य से 2.3 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया। वैज्ञानिकों को आशंका है कि यदि यह सिलसिला जारी रहा तथा अल नीनो और मजबूत हुआ, तो 2027 में वैश्विक तापमान नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। इसके संकेत दुनिया के कई हिस्सों में दिखने भी लगे हैं।
प्रशांत महासागर के आसपास के देशों में भीषण गर्मी, सूखे और जंगलों में आग का खतरा बढ़ रहा है। इंडोनेशिया में लगी भीषण जंगल की आग को भी मौजूदा अल नीनो की परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है। समुद्र की गर्मी चक्रवातों की गतिविधियों को भी प्रभावित कर रही है। प्रशांत क्षेत्र में जापान से हवाई तक कई उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की सक्रियता इस बदलते मौसम की तस्वीर पेश कर रही है। हालांकि, इतिहास बताता है कि हर अल नीनो का प्रभाव एक जैसा नहीं होता।
अल नीनो का खतरा इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि इसके साथ जलवायु परिवर्तन की चुनौती जुड़ चुकी है। बढ़ता वैश्विक तापमान इसके प्रभावों को और तीखा बना सकता है। मौजूदा अल नीनो सिर्फ मौसम का उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि बदलती जलवायु की गंभीर चेतावनी है। दुनिया को अब जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने होंगे।
-द कन्वर्सेशन