जल जीवन मिशन: पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट और राजनीति के मकड़जाल में उलझा ‘पानी’
दो साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल जीवन मिशन की घोषणा की थी। मिशन अच्छा था लेकिन जमीन पर इसके उतरने और नीतियों के क्रियान्वयन में एक ही अलग ही कहानी चल रही है। पढ़ें राजस्थान से यह ग्राउंड रिपोर्ट।
विस्तार
बाड़मेर (राजस्थान) के समदड़ी गांव में पाइप से पानी आया तो महिलाओं के चेहरे खिल उठे। एक साधारण नल ने उन चेहरों पर अमूल्य मुस्कान बिखर दी, जिन्हें रेगिस्तानी क्षेत्र की चिलचिलाती धूप में पानी के लिए मीलों पैदल चलना पड़ता है। बूंद-बूंद पानी की कीमत राजस्थान के निवासियों से बेहतर कौन समझ सकता है? लेकिन, समदड़ी जैसी किस्मत राज्य के सभी गांवों की नहीं है। राजस्थान में पानी की लाइन राजनीति के मकड़जाल में उलझ गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट और समस्याएं
ग्रामीण भारत में हर घर नल से पानी पहुंचाने का जल जीवन मिशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है और राजस्थान जैसे जल संकट वाले रेगिस्तानी राज्य में इसे लागू करने की जिम्मेदारी कांग्रेस की सरकार के कंधों पर है। जहां एक ओर गोवा, तेलंगाना, बिहार जैसे राज्यों ने जल जीवन मिशन में अभूतपूर्व प्रगति की है, वहीं राजस्थान, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश जैसे राज्य निचले पायदान पर खड़े हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो साल पहले लालकिले की प्राचीर से जल जीवन मिशन की घोषणा की थी। उन्होंने वर्ष 2024 तक देश के हर ग्रामीण घर तक नल से शुद्ध जल पहुंचाने का संकल्प लिया था। इसे मिशन 2024 कहा जाए तो गलत नहीं होगा।
जल जीवन मिशन को लेकर सबसे ज्यादा खुशी राजस्थान के निवासियों को हुई थी, क्योंकि जिस जलशक्ति मंत्रालय के जिम्मे जल जीवन मिशन है, उसकी कमान भी राजस्थान के जोधपुर से सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत के हाथों में है।
जल जीवन मिशन की दो साल की प्रगति पर नजर डालें तो राजस्थान में स्थिति चिंताजनक ही कही जाएगी। विगत् 24 महीने में जल जीवन मिशन के माध्यम से जहां देश के 1 लाख से ज्यादा गांवों और 50,309 पंचायतों में प्रत्येक परिवार को स्वच्छ जल मिलने लगा है, वहीं राजस्थान में यह संख्या केवल 582 गांव और 63 पंचायतें ही है।
मिशन की घोषणा और जमीनी आंकड़े
15 अगस्त, 2019 को जब जल जीवन मिशन की घोषणा हुई थी, तब राजस्थान में 11,74,131 (11.59 प्रतिशत) ग्रामीण घरों में नल से जल आता था। 24 महीनों में जहां देशभर में 4,48,78,920 (23.69 प्रतिशत) ग्रामीण घरों तक शुद्ध जल पहुंचने लगा, वहीं राजस्थान में 8,63,451 (8.52 प्रतिशत) ग्रामीण घर ही ऐसे थे।
आठ जिले जैसलमेर, प्रतापगढ़, भरतपुर, बांसवाड़ा, धौलपुर, दौसा, बारां और बाड़मेर में 10 प्रतिशत के लक्ष्य को भी हासिल नहीं किया जा सका है। जैसलमेर जिले के 1,04,124 ग्रामीण घरों में से सिर्फ 3862 के पास नल कनेक्शन हैं, यानी 96.29 प्रतिशत परिवार बिना पानी कनेक्शन के जीवन यापन कर रहे हैं।
राजस्थान का 33 में से एक भी जिला ऐसा नहीं है, जहां आधी ग्रामीण आबादी को राज्य सरकार नल का कनेक्शन दे पाई हो। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले जोधपुर की तीन पंचायतों खरबेरा पुरोहितन, सलावास और रायसर में ही सौ प्रतिशत घरों में नल कनेक्शन लग सका है।
राजस्थान के 101.32 लाख ग्रामीण घरों में से केवल 20,37,582 (20.11 प्रतिशत) में नल से जल की सुविधा उपलब्ध है। राज्य में टेंडर समेत दूसरी प्रक्रियाओं में सरकारी व्यवस्था उलझी हुई है। आरोप-प्रत्यारोप जारी है। आए दिन अफसर बदल दिए जाते हैं।
राज्यों के सहयोग से चलाए जा रहे 3.6 लाख करोड़ रुपए के जल जीवन मिशन में आधी राशि केंद्र और आधी राज्य सरकार को वहन करनी है, लेकिन पहले दिन से राजस्थान सरकार 90 प्रतिशत अनुदान की मांग पर अडिग है। एक और सरकार अधिक राशि की डिमांड कर रही है, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय अनुदान को पूरी तरह उपयोग में नहीं ले रही है।
आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो वर्ष 2019-20 में राज्य को 1,301.71 करोड़ का केंद्रीय अनुदान जारी किया गया, जबकि राज्य के पास उस समय 313.67 करोड़ का ओपनिंग बैलेंस मौजूद था।
वर्ष के अंत में इसमें से 995.07 करोड़ रुपए खर्च नहीं हो पाए। वर्ष 2020-21 में राज्य को 2,522.03 करोड़ का केंद्रीय अनुदान आवंटित किया गया, जिसमें से राज्य सरकार ने केवल 630.51 करोड़ रुपए लिए, यानी 1,891.52 करोड़ की अनुदान राशि ली नहीं।
राज्य उपलब्ध केंद्रीय अनुदान की राशि में से 863.53 करोड़ खर्च नहीं कर पाया। वर्ष 2021-22 के लिए राज्य को केंद्रीय अनुदान चार गुना बढ़ाकर 10,181 करोड़ रुपए आवंटित किया गया है। राजस्थान सरकार के पास वर्तमान में 22,494 करोड़ का विशाल कोष उपलब्ध है।
भाजपा शासित राज्य उत्तर प्रदेश की स्थिति
राजस्थान जैसी ही स्थिति गैर भाजपा शासित राज्य पश्चिम बंगाल की है। पश्चिम बंगाल में 1, 63,25,869 ग्रामीण घर हैं। 15 अगस्त, 2019 को राज्य के 2,14,588 (1.31%) ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन लगा था, जो 16 जुलाई, 2021 को 17,76,277 (10.88%) तक पहुंचा, यानी 24 महीने में 15,61,689 (9.57%) ग्रामीण आवासों तक पानी पहुंचा। अभी राज्य की 9 पंचायतें और 1414 गांव हर घर जल गांव बन पाए हैं। 22 जिलों में से 12 जिलों में तो 10 प्रतिशत कवरेज भी नहीं हुआ है।
हालांकि, भाजपा शासित राज्य उत्तर प्रदेश की स्थिति भी बेहतर नहीं कही जा सकती। यूपी में 2, 63, 38,776 ग्रामीण घर हैं। इनमें 15 अगस्त, 2019 को 5,16,221 (1.96%) में नल कनेक्शन लगे थे। 16 जुलाई, 2021 को यह आंकड़ा 31,23,270 (11.86%) तक पहुंचा। 24 महीने में 26,07,049 (9.90%) ग्रामीण घरों तक पाइप से पानी पहुंचा है। उत्तर प्रदेश का एक भी जिला या ब्लॉक अभी तक 100 प्रतिशत हर घर जल के लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाया है।
भाजपा शासित एक और महत्वपूर्ण राज्य मध्य प्रदेश की गति भी धीमी है। मध्य प्रदेश में 1,22,27,914 ग्रामीण घर हैं। 15 अगस्त, 2019 को यहां 13,53,151 (11.07%) घरों तक पानी पहुंच रहा था। 16 जुलाई, 2021 को यह संख्या बढ़कर 39,26,748 (32.11%) हो गई। मध्य प्रदेश में एक भी जिला या ब्लॉक 100 प्रतिशत के लक्ष्य को हासिल नहीं कर सका है। केवल बुरहानपुर 100 प्रतिशत के लक्ष्य को हासिल करने के करीब है।
वैसे, एनडीए शासित बिहार ने जल जीवन मिशन में उल्लेखनीय प्रगति की है। बिहार में 1,72,20,634 ग्रामीण घर हैं। 15 अगस्त, 2019 को यहां 3,16,391 (1.84%) ग्रामीण घरों में नल से जल आता था, जो 16 जुलाई, 2021 को 1,46,37,413 (85%) हो गया, यानी 24 महीने में 1, 43, 21,022 (83.16%) घरों को कवर कर लिया गया।
जब जल जीवन मिशन की घोषणा हुई थी, तब देश के कुल 19.20 करोड़ ग्रामीण आवासों में से 3.23 करोड़ (17 प्रतिशत) में नल से जल की सुविधा उपलब्ध थी। वर्तमान में 7,72,41,758 (40.77 प्रतिशत) ग्रामीण आवासों तक नल से जल पहुंच रहा है।
गोवा, तेलंगाना जैसे राज्य 100 प्रतिशत के लक्ष्य को प्राप्त कर चुके हैं, जबकि हरियाणा, हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में तेजी से काम हो रहा है। यदि दलगत् राजनीति से ऊपर उठकर सरकारें कार्य करें तो जल संकट से जूझ रही ग्रामीण जनता के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं होगा।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।