फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   patna bihar flood situation and weather climate change

Patna flood: बिहार में बाढ़ और जलवायु परिवर्तन के खतरनाक संकेत, क्या बदल रहा है भारत का मौसमी चक्र?

Amalendu Upadhyay अमलेंदु उपाध्याय
Updated Tue, 01 Oct 2019 03:41 PM IST
विज्ञापन
patna bihar flood situation and weather climate change
बारिश से बिहार और विशेष रूप से पटना शहर को खास नुकसान पहुंचा है। - फोटो : Amar Ujala

उत्तर भारत के राज्य खासकर बिहार, उत्तर प्रदेश इस समय असामान्य रूप से भारी मानसून की वर्षा के चलते भारी बाढ़ की चपेट में है। सितंबर 2019 के अंतिम सप्ताह में, प्रायद्वीपीय भारत (हैदराबाद और पुणे), तटीय क्षेत्र (कोलकाता, गुजरात, गोवा, मछलीपट्टनम और विजाग) और उप-हिमालयी क्षेत्र (असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिज़ोरम, त्रिपुरा, के कई हिस्से) बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश) में भारी तबाही मची है।

विज्ञापन


इन क्षेत्रों में हाल के इतिहास में अभूतपूर्व बारिश हुई है। भारी बारिश के चलते बिहार में सरकार लाचार है और खुद उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी तीन दिन बाद अपने घर से रेस्क्यू किए गए। सरकारी बचाव और राहत कार्य नाकाफी साबित हो रहे हैं और जब राजधानी पटना में ही जल कर्फ्यू की स्थिति है तो समझा जा सकता है कि राज्य के दूर-दराज के ग्रामीण अंचल की क्या स्थिति होगी।
विज्ञापन


राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जहां इसे प्रकृतिक आपदा कहकर मौसम विज्ञान के ऊपर ठीकरा फोड़ रहे हैं कि उसने तो भविष्यवाणी की थी कि 26 सितंबर को मानसून चला जाएगा, तो केंद्र सरकार में मंत्री अश्विनी चौबे इसके लिए हथिनी नक्षत्र को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग भारत की जलवायु और ऊर्जा संबंधित समाचारों की एक संस्था कार्बन कॉपी, जो वैश्विक जलवायु नीति, ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर एक भारतीय दृष्टिकोण के माध्यम से कार्य करती है ने इस भारी वर्षा और जलवायु परिवर्तन का संबंध स्थापित करते हुए एक शॉर्ट नोट जारी किया है।

इस नोट के मुताबिक सामान्य तौर पर, जलवायु परिवर्तन इस अत्यधिक वर्षा को और अधिक सामान्य बना देता है। इसका एक महत्वपूर्ण कारण यह है कि एक वायुमंडल जो अपेक्षाकृत गर्म है वह अधिक जल वाष्प धारण कर सकता है। पूर्व-औद्योगिक समय से दुनिया अब तक लगभग 1° C गर्म हो चुकी है और दुनिया भर में, भारी वर्षा में वृद्धि हुई है।

patna bihar flood situation and weather climate change
दुनिया में बढ़ते तापमान का असर भारत में अतिवृष्टि के रूप में दिखाई दे रहा है। - फोटो : पीटीआई

बताते चलें कि कई वैज्ञानिक अध्ययनों से यह पता चला है कि जैसे-जैसे दुनिया अधिक गर्म हो रही है वैसे-वैसे भारत में अधिक चरम वर्षा हो रही है। 2012 के एक अध्ययन के अनुसार, देशभर में, मध्यम बारिश की घटनाओं में कमी आई है, लेकिन चरम घटनाओं में वृद्धि हुई है।


यह अध्ययन नेचर पत्रिका में वर्ष 2012 में प्रकाशित हुआ, जिसके शोधकर्ता यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ़ रीडिंग, के मौसम विज्ञान विभाग, नेशनल सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक साइंस-क्लाइमेट से संबद्ध एंड्रयू जी टर्नर और यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई'' मनाया में इंटरनेशनल पैसिफिक रिसर्च सेंटर, स्कूल ऑफ ओशन एंड अर्थ साइंस, से संबद्ध एच. अन्नामलाई हैं।


एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि उत्तरी अरब सागर में गर्म होने के परिणामस्वरूप 1950 से मध्य भारत में व्यापक रूप से अत्यधिक वर्षा हुई है। जबकि एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि उत्तर भारत में आंधी तूफान 50% अधिक सामान्य और 80% लंबा हो गया है।


2013 में उत्तर भारत में आई एक विशेष भारी वर्षा की घटना को देखने वाले वैज्ञानिकों ने पाया कि जलवायु परिवर्तन ने इस घटना को अवश्यंभावी बना दिया। अमेरिकी मौसम विज्ञान सोसायटी के बुलेटिन के विशेष पूरक में प्रकाशित इस अध्ययन में 'ईवेंट एट्रिब्यूशन' का इस्तेमाल किया गया, जो एक पद्धति है जो विशेष रूप से मौसम की घटनाओं पर मानव-कारण वार्मिंग के प्रभाव को देखती है। उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में आई इस बाढ़ ने 5,800 से अधिक लोगों की जान ले ली थी।


दुनिया भर में 30 से अधिक अन्य घटनाओं के अध्ययनों में भी जलवायु परिवर्तन और भारी वर्षा की विशेष घटनाओं के बीच एक कड़ी मिली है। भारत में अधिक अप्रत्याशित और अत्यधिक वर्षा की प्रवृत्ति दर्शाती है कि अगर उत्सर्जन में कमी नहीं की जाती है, तो जलवायु परिवर्तन के कारण वैज्ञानिक मौसम की सही भविष्यवाणी नहीं कर पाएंगे।


कार्बन कॉपी ने विश्व बैंक का हवाला देते हुए कहा है कि तापमान में वृद्धि से भारत में गर्मी और मानसून दोनों के अप्रत्याशित होने की संभावना है। विश्व बैंक यह भी कहता है कि उच्च उत्सर्जन जारी रहने का मतलब होगा कि मानसून बहुत चरम पर होता है जो वर्तमान में केवल एक बार होता है, बल्कि एक दशक में एक बार होता है।


जलवायु प्रभाव अनुसंधान जर्मनी के लिए पोट्सडैम संस्थान के आरती मेनन, एंडर्स लीवरमैन, जैकब शेहेव के एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि मानसून की वर्षा दिन-प्रतिदिन के आधार पर अधिक अप्रत्याशित हो जाएगी, यदि परिवर्तनशीलता जारी रहती है तो परिवर्तनशीलता इस सदी में 50% तक बढ़ जाएगी।


इतना ही नहीं अल नीनो जलवायु चक्र और भारत में सूखे के बीच भी एक संबंध है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की जलवायु विज्ञान की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर निरंतर उच्च उत्सर्जन जारी रहता है तो अल नीनो और ला नीना, विपरीत पैटर्न के अधिक चरम बनने की संभावना है।

patna bihar flood situation and weather climate change
पटना में बारिश ने पूरे शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाया है। - फोटो : PTI

कार्बन कॉपी ने भारतीय मौसम विज्ञान संस्थान से संबद्ध वैज्ञानिक और महासागरों और क्रायोस्फीयर पर आईपीसीसी की विशेष रिपोर्ट के सह-लेखक डॉ. रॉक्सी मैथ्यू कोल के हवाले से कहा है कि बिहार और उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड बेल्ट के कुछ हिस्सों में पहले से ही भारी वर्षा की घटनाओं के मामले में एक बढ़ती प्रवृत्ति प्रदर्शित होती है।


हालांकि हम हर घटना के लिए जलवायु परिवर्तन को दोषी नहीं ठहरा सकते हैं, जब तक कि हम इसका गहराई से अध्ययन न कर लें। यद्यपि यह संभावना प्रबल है कि वैश्विक और स्थानीय तापमान में वृद्धि ने असामान्य बारिश, विशेष रूप से, व्यापक रूप से भारी वर्षा जिसके परिणामस्वरूप बाढ़ मध्य और पश्चिमी तट और उत्तर / उत्तर-पूर्व भारत के कुछ हिस्सों में बढ़ रही है, में योगदान दिया है।


मैथ्यू कोल कहते हैं कि मानसून कम दबाव प्रणाली और उस क्षेत्र में एक मजबूत मानसून गर्त से जुड़ी बंगाल की खाड़ी से उच्च नमी की मात्रा थी। नमी की यह उच्च उपलब्धता शायद जलवायु परिवर्तन कारक है जिस पर हमें ध्यान देने की आवश्यकता है। मौसम विज्ञान विभाग ने इस घटना की भविष्यवाणी 26 सितंबर 2019 को पहले ही कर दी थी।


भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने 26 सितंबर की प्रेस विज्ञप्ति में कहा था कि 22 सितंबर से 25 सितंबर के दौरान अरब सागर के ऊपर एक बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान 'हीका' (HIKAA) बना था। यद्यपि अपने प्रारंभिक चरण में यह कोंकण और दक्षिण गुजरात पर भारी वर्षा का कारण बना। क्योंकि यह हीका भारतीय तट से दूर, ओमान की ओर, चली गया तो भारत में इस प्रणाली के कारण कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं था ”।


मौसम विज्ञान विभाग ने पंजाब और मध्य प्रदेश, झारखंड और गंगीय पश्चिम बंगाल के आसपास के क्षेत्रों, मध्य प्रदेश, आंतरिक महाराष्ट्र, उत्तर ओडिशा, गुजरात, मिजोरम, त्रिपुरा, केरल और लक्षद्वीप में 27 सितंबर से 3 अक्तूबर के दौरान सामान्य से अधिक वर्षा की भविष्यवाणी की थी।
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed