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पाकिस्तान में चुनावी गणित: इमरान क्यों हो रहे हैं और मजबूत, क्यों उड़ी शहबाज सरकार की नींद?

Mon, 15 May 2023 08:06 PM IST
Atul sinha अतुल सिन्हा
Updated Mon, 15 May 2023 08:06 PM IST
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सार
जुलाई 2018 में हुए पाकिस्तान के पिछले आम चुनाव में जिस तरह इमरान खान सबसे मजबूत नेता बनकर उभरे और सरकार बनाई उसके बाद से ही उनके खिलाफ तमाम विपक्षी पार्टियों ने मोर्चा खोल दिया। पाकिस्तान की सियासत में मजबूत दखल देने वाले और हर मसले पर खुलकर अपनी बात कहने वाले इमरान खान के कामकाज को अगर देखें, तो वो उनके लिए सबसे मुश्किल दौर रहा था...
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Pakistan: Why is Imran khan getting stronger, why is Shehbaz government had sleepless nights?
इमरान खान। - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पाकिस्तान में इमरान खान के खिलाफ चल रही कार्रवाइयों और सत्ताधारी पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) के अभियान ने जो हालात बना दिए हैं, उससे साफ है कि इमरान खान और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की ताकत और बढ़ गई है। इस बीच कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। मसलन, पाकिस्तान में गृह युद्ध जैसे हालात हैं, वहां मार्शल लॉ लग सकता है, इमरजेंसी लागू की जा सकती है, इमरान खान को एक के बाद एक नए-नए मामलों में फंसा कर किसी न किसी तरह जेल में डालने की तैयारी है। दरअसल इमरान खान की लगातार बढ़ती लोकप्रियता और चुनाव से पहले उनके धुआंधार अभियानों ने शहबाज सरकार की नींद उड़ा रखी है।

जुलाई 2018 में हुए पाकिस्तान के पिछले आम चुनाव में जिस तरह इमरान खान सबसे मजबूत नेता बनकर उभरे और सरकार बनाई उसके बाद से ही उनके खिलाफ तमाम विपक्षी पार्टियों ने मोर्चा खोल दिया। पाकिस्तान की सियासत में मजबूत दखल देने वाले और हर मसले पर खुलकर अपनी बात कहने वाले इमरान खान के कामकाज को अगर देखें, तो वो उनके लिए सबसे मुश्किल दौर रहा था। कोरोना काल के संकट भरे दो-ढाई सालों में दुनिया के ज्यादातर देशों की नज़र में हमेशा से खटकने वाले पाकिस्तान को संभालने और अवाम के भीतर हिम्मत के साथ इस संकट से जूझने का पैगाम इमरान हमेशा देते रहे। विपक्ष के चौतरफा हमलों से लगातार घिरे रहने वाले इस लोकप्रिय क्रिकेटर और सियासत की अहम शख्सियत ने बार-बार अपने अवाम को बताने की कोशिश कि जो लोग उनके खिलाफ अभियान चला रहे हैं, वो भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में फंसे हुए हैं। इमरान हमेशा कहते रहे कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज)– पीएमएलएन के नेता और उनका परिवार आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे रहे हैं। वो अपने खिलाफ होने वाली कार्रवाइयों से डरे हुए हैं, इसलिए उन्हें किसी भी तरह सत्ता से हटाना चाहते हैं।

दो साल पहले आखिरकार ये विपक्षी नेता एकजुट हुए, पीएमएलएन, पीपीपी समेत कई छोटी छोटी विपक्षी पार्टियों ने मिलकर पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) के नाम से गठबंधन बनाया और संसद में इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर 10 अप्रैल 2022 को उन्हें कुर्सी छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। संसद में 174 सदस्यों ने उनके खिलाफ वोट देकर उन्हें बाहर कर दिया। आपको याद होगा कि इससे पहले जब नवाज़ शरीफ की सरकार थी, तो पनामा पेपर लीक मामले में जिन भ्रष्ट नेताओं के नाम सामने आए तो नवाज़ शरीफ समेत उनका पूरा परिवार किस तरह के गंभीर आरोपों में फंसा, आरोप साबित हुए और नवाज़ को कुर्सी छोड़नी पड़ी, गिरफ्तार हुए और इमरान सरकार के आने के बाद ही इलाज कराने के नाम पर नवाज़ शरीफ को लंदन जाने की इजाजत मानवीयता के आधार पर इमरान खान ने ही दी। बाद में नवाज़ शरीफ लगातार लंदन से ही अपनी सियासत करते रहे और आखिरकार अपने भाई शहबाज़ और बेटी मरियम के जरिये उनकी अपमे मुल्क में सियासत मजबूत होती रही। जाहिर है जब इमरान की सरकार गई तो पीडीएम के सबसे कद्दावर नेता के तौर पर शहबाज शरीफ ने कुर्सी संभाली।

इमरान से क्यों डरते हैं शहबाज और पीपीपी के नेता

पाकिस्तान में इसी साल चुनाव हैं। वक्त पर चुनाव होते तो वहां जुलाई से पहले नई सरकार बन जाती। लेकिन मौजूदा शहबाज सरकार चुनाव को सितंबर के बाद कराने की कोशिश में है। इमरान वक्त से पहले चुनाव की मांग करते रहे हैं। अदालत ने भी पाकिस्तानी चुनाव आयोग को 14 मई तक चुनाव कार्यक्रम घोषित करने को कहा था, लेकिन आयोग इसके लिए सरकार से जो मदद और सहयोग मांग रहा था, वह उसे नहीं दिया गया। यहां तक कि सरकार ने संसद में ये मामला ले जाकर चुनाव के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध कराने की मांग को नामंजूर कर दिया। जाहिर ये यह शहबाज सरकार की चुनाव को आगे खींचने की रणनीति का ही हिस्सा है। ऐसे में सोमवार को यानी 14 मई की तारीख निकलने के बाद 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में फिर ये मामला आया, तो मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने सरकार और विपक्ष के बीच चुनाव को लेकर संवाद कायम करने और देश में शांति स्थापित करने की बात कही और मामले की सुनवाई एक हफ्ते के लिए टाल दी।

दूसरी तरफ, शहबाज सरकार खुलकर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ मोर्चा खोल चुकी है। इमरान खान को हर मामले में जमानत दिए जाने के मामले में और साथ ही चीफ जस्टिस के इमरान खान को यह कहे जाने पर कि ‘आपसे मिलकर खुशी हुई’, सरकार ने खुलकर चीफ जस्टिस को इमरान का आदमी बताना शु़रू कर दिया है। ऐसे में शहबाज सरकार और पीडीएम को डर है कि इस चीफ जस्टिस के रहते चुनाव होंगे तो इमरान खान की जीत पक्की है। चीफ जस्टिस उमर अता बंदियाल को इमरान का समर्थक माना जाता है। उनकी नियुक्ति भी इमरान खान के कार्यकाल में ही हुई थी। बंदियाल इस साल सितंबर में रिटायर हो रहे हैं। इसलिए शरीफ सरकार चाहती है कि चुनाव सितंबर के बाद हों। फिलहाल चीफ जस्टिस के खिलाफ शरीफ सरकार ने खुलकर मोर्चा खोल रखा है। उसके समर्थकों ने सुप्रीम कोर्ट के बाहर प्रदर्शन किया और चीफ जस्टिस को हटाने की बेहद आक्रामक तरीके से मांग की, मरियम नवाज से लेकर संसद में गृह मंत्री तक ने चीफ जस्टिस के खिलाफ बयान दिया, इससे सरकार और न्यायपालिका खुलकर आमने सामने आ गई है।

इसके अलावा भी जो तथ्य शहबाज सरकार को डरा रही है, वह है पाकिस्तान के मौजूदा राष्ट्रपति आरिफ अल्वी का इमरान समर्थक होना। आरिफ अल्वी पर पहले भी पीएमएलएन और पीपीपी ये आरोप लगाती रही हैं कि राष्ट्रपति इमरान खान के इशारों पर काम करते हैं। ऐसे में राष्ट्रपति और चीफ जस्टिस का इमरान समर्थक होना मौजूदा सरकार के लिए मुश्किलें पैदा कर रहा है। जाहिर है इस वक्त अगर चुनाव होते हैं तो इसमें कोई शक नहीं कि इमरान भारी बहुमत से वापसी कर सकते हैं। लेकिन शहबाज सरकार इमरान के खिलाफ इस तरह की कार्रवाइयां करके उन्हें और मजबूत बनाने की गलती भी कर रही है। सत्ता की इस जंग में इस वक्त पाकिस्तान बहुत ही दिलचस्प मोड़ पर खड़ा है, जहां एक तरफ सेना, आईएसआई और सरकार है तो दूसरी तरफ इमरान की पीटीआई और कथित तौर पर राष्ट्रपति, चीफ जस्टिस और जनता का भारी समर्थन। जाहिर है आने वाले दिनों में पाकिस्तान के सियासी हालात और दिलचस्प होने वाले हैं। फिलहाल वहां की अवाम को जल्द से जल्द चुनाव का इंतजार है।

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