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नोबेल पुरस्कार 2023: किसके नाम होगा इस वर्ष साहित्य का नोबेल पुरस्कार?

Wed, 20 Sep 2023 07:09 PM IST
Dr. Vijay Sharma डॉ. विजय शर्मा
Updated Wed, 20 Sep 2023 07:09 PM IST
सार

अगले माह यानी अक्टूबर की शुरुआत में नोबेल पुरस्कारों की घोषणा होने जा रही है। 10 अक्टूबर को आयोजित समारोह में अपने-अपने क्षेत्र के दुनिया के दिग्गजों को उनकी मेहनत और रचनात्मकता के लिए नोबेल पुरस्कार से नवाजा जाएगा। विश्व साहित्य और विश्व सिनेमा की गंभीर अध्येता और सृजन के इस वैश्विक गलियारे पर करीब से नजर रखने वाली वरिष्ठ लेखिका डॉ. विजय शर्मा अमर उजाला ब्लॉग में बता रही हैं कि आखिर 2023 का साहित्य का नोबेल किसके नाम होगा? वे एक अनुमान लगा रही हैं, जाहिर है यह अनुमान ही है लेकिन विश्व साहित्य में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए किसी दिलचस्प बतकही और चर्चा से कम नहीं। 

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Nobel Prize 2023: Who will win the Nobel Prize for Literature
यह पुरस्कार साहित्य, मेडिसिन, इकॉनमिक्स, शांति, भौतिकी, रसायन विज्ञान विषयों में हर वर्ष सर्वोत्तम व्यक्ति/व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सितम्बर आते कास फूल अपने धवल हाथ हिला-हिला कर झूमने लगता है। संकेत है, त्योहारों का मौसम आ गया। दशहरा आने वाला है, दुर्गा पूजा की तैयारी शुरु कर दी जाए। और इसी समय विश्व साहित्य प्रेमियों का दिल गाने लगता है- ‘धीरे-धीरे मचल ऐ दिल-ए बेकरार, कोई आता है।’ मगर दिल कहां मानता है, वह जोर-जोर से धड़कता है, उसे आने वाले का बेसब्री से इंतजार होता है। वह जानना चाहता है कि इस वर्ष साहित्य का नोबेल पुरस्कार किसे प्राप्त होगा। 6-7 अक्टूबर से नोबेल पुरस्कारों की घोषणा होने लगती है।

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यह पुरस्कार साहित्य, मेडिसिन, इकॉनमिक्स, शांति, भौतिकी, रसायन विज्ञान विषयों में हर वर्ष सर्वोत्तम व्यक्ति/व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है। हम जैसे केवल और केवल साहित्य के नोबेल पर आंख गड़ाए रहते हैं। सांस रोक कर अनाउंसमेंट का इंतजार करते हैं।

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वैसे तो भविष्य किसने देखा है, मगर आदमी का मन सदा आगत में छलांग लगाता रहता है। वह अनुमान लगाता है और भविष्यवाणी करता है। नोबेल के संबंध में यह और भी कठिन है, क्योंकि कई अन्य पुरस्कारों की भाँति यहाँ न तो लॉन्ग लिस्ट बनती है और न ही शॉर्ट लिस्ट जारी की जाती है। इतना ही नहीं इसमें नामांकित होने वाले लोगों का नाम नोबेल समिति 50 सालों के बाद ही खोलती है।

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फिर भी साहित्य प्रेमी संभावित लेखकों की सूची बनाते हैं। न केवल अपने पसंददीदा लेखकों की लिस्ट तैयार करते हैं, उनके पक्ष में तगड़े तर्क देते हैं, बाकायदा उनके नाम पर सट्टेबाजी होती है, बोलियां लगती हैं। यह दीगर है कि इन सबको धता बताते हुए कभी-कभी नोबेल समिति ऐसे नाम पर मुहर लगाती है कि सब चकित रह जाते हैं और कई बार पूछते हैं, ‘हेरटा मूलर, हू?’ और जब गायक बॉब डिलेन को साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला तो सबने चकित हो कर कहा, ‘अच्छा वह साहित्यकार भी हैं..!’
 

कई बार समिति के सदस्यों में मतभेद होता है, एल्फ़्रिड येलेनिक के समय तो एक सदस्य ने गुस्से में समिति से इस्तीफ़ा दे दिया था।

 

कुछ रचनाकारों का नाम साल-दर-साल नोबेल के लिए उछलता रहता है, जैसे फिलिप रॉथ। वे हर साल पुरस्कार की घोषणा के पहले नया कोट-टाई पहन कर अपने नाम का इंतजार करते हैं। यह एक मखौल बन गया। वे उम्मीद छोड़ चुके थे और अंतत: 85 साल की उम्र में 2018 को वे गुजर गए। यही हाल मिलान कुंडेरा का हुआ। एक साल हम भारतीय कलेजा थाम कर घोषणा का इंतजार कर रहे थे क्योंकि उस साल उदय प्रकाश को नोबेल मिलने की संभावना लगाई जा रही थी। मार्ग्रेट एटवुड, जॉयस कैरोल ओट्स, गूगी वा थिओंग’ओ, रोहिंग्टन मिस्त्री, ए. एस. ब्याट जैसे कई दूसरे नाम साल-दर-साल उछलते हैं।


कई बेतुके तर्क भी इन अनुमानों के पीछे काम करते हैं, जैसे कई सालों से किसी अश्वेत अफ़्रीकी को नोबेल नहीं मिला है, कई साल हो गए किसी कवि को यह पुरस्कार नहीं दिया गया है आदि, आदि। कुछ लोग रूस को यह सम्मान दिलवा रहे होते हैं, तो कुछ लोग ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में वोट दे रहे होते हैं, कुछ का कहना होता है कि इस साल कोरिया को किसी हाल में नहीं मिलेगा यह तो चीन को मिलेगा।

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Nobel Prize 2023: Who will win the Nobel Prize for Literature
प्रभावित बहुमुखी प्रतिभावान उपन्यासकार, कहानीकार, अनुवादक, शिक्षक, बेस्टसेलर मुराकामी ने विपुल लेखन किया है। - फोटो : Twitter

18 सदस्यों वाली स्वीडिश अकादमी के चुनाव का अनुमान लगाना बहुत ही कठिन है। यह जटिल प्रक्रिया है। नॉर्वे की साहित्य की नोबेल समिति नामांकित साहित्यकारों का मूल्यांकन कर अपनी संस्तुति अकादमी को भेजती है और इन सिफारिशों में से अकादमी नोबेल पुरस्कार के लिए चुनाव करती है। अब तक उन्होंने भविष्यवक्ताओं को कई बार चौंकाया है, फिर भी, चलिए हम 2023 के साहित्य के नोबेल पुरस्कार पर कुछ अनुमान लगाते हैं।

2023 का साहित्य का नोबेल किसके नाम?

2023 में इस पुरस्कार की बेटिंग करने वालों की सूची में जापान के लेखक 74 वर्षीय हारुकी मुराकामी का नाम सबसे ऊपर है। दुनियाभर के उनके पाठक और प्रशंसक कई साल से आस लगाए बैठे हैं।

कहा जाता है कि इस प्रसिद्ध लेखक का नाम कई सालों से इस पुरस्कार के लिए प्रस्तावित है। लोगों का कहना है, समिति ने कई बार उनकी अवहेलना की है। सबसे पहले उनका नाम 2007 में उछला था।

काफ़्का और मिशिमा से प्रभावित बहुमुखी प्रतिभावान उपन्यासकार, कहानीकार, अनुवादक, शिक्षक, बेस्टसेलर मुराकामी ने विपुल लेखन किया है। उनका पहला उपन्यास ‘हियर द विन्ड सिंग’ 1979 में आया, जिस पर एक साल के भीतर फ़िल्म भी बनी। इस उपन्यास को नए लेखक के उत्तम साहित्य का पुरस्कार मिला। मुराकामी को पढ़ना और पचाना तनिक कठिन काम है। कुछ लोग उनकी अनेकार्थता की आलोचना करते हैं, तो कुछ को उनके लेखन में राजनीति का अभाव खटकता है। कुछ लोग उनके लेखन, खासकार प्रारंभिक लेखन को मात्र मनोरंजन के रूप में देखते हैं।


‘हियर द विन्ड सिंग’ त्रयी के अगले उपन्यास ‘पिनबॉल’, ‘ए वाइल्ड शीप चेज’ हैं। और इनके साथ-साथ वे साहित्य के विश्व-जगत में स्थापित हो गए। ‘हार्ड-ब्यॉल्ड वंडरलैंड एंड दि एंड ऑफ़ द वर्ल्ड’, ‘नॉर्वेजियन वुड’, ‘डॉन्स डॉन्स डॉन्स’, ‘द वाइंड-अप बर्ड क्रोनिकल’, ‘अंडरग्राउंड’, ‘स्पुतनिक स्वीटहार्ट’, ‘काफ़्का ऑन द शोर’, ‘आफ़्टर डार्क’ आदि उनके कुछ अन्य उपन्यास हैं।

‘आफ़्टर द क्वेक’, ‘दि एलिफ़ेंट वैनिशेस’, ‘ब्लाइंड विलो, स्लीपिंग वूमन’, ‘मेन विदआउट वीमेन’ आदि उनके कहानी संग्रह हैं। प्रिंसटन तथा टफ़्ट्स यूनिवर्सिटी में शिक्षण कर चुके हारुकी मुराकामी के संस्मरण की किताब का नाम, ‘व्हाट आई टॉक अबाउट व्हेन आई टॉक अबाउट रनिंग’ है। वे अमेरिकन साहित्य के सिद्ध अनुवादक हैं।

जापान को 1994 (केनज़ाबुरो ओए) के बाद काफ़ी समय से साहित्य का नोबेल नहीं मिला है। देखना है अकादमी के मानदंड पर हारुकी मुराकामी खरे उतरते हैं अथवा नहीं।

वैसे तो चीन की झोली में भी साहित्य के नोबेल को आए एक दशक से ऊपर हो चुका है। पिछली बार 2012 में चीन के मो यान को यह प्राप्त हुआ था। बाजी लगाने वालों के लिए चीन की कैन श्वे भी दौड़ में शामिल हैं और वे काफी ऊंचे स्थान पर हैं। 2019 में उनका नाम पहली बार इस संदर्भ में सामने आया था। कई साल सामान्य मजदूर रहने के बाद लेखक बनी कैन श्वे का वास्तविक नाम डेन्ग शाहू है। उनका पहला उपन्यास 1986 में ‘ओल्ड फ़्लोटिंग क्लाउड’ नाम से आया।

प्रतीकात्मक लेखन के द्वारा स्वप्न जैसे तथा फ़ंतासी दुनिया की सृष्टि करने वाली कैन श्वे का 2013 में एक महत्वपूर्ण कार्य ‘लव इन द न्यू मिलेनियम’ प्रकाशित हुआ है। वे अपनी महत्वाकांक्षी तथा प्रयोगात्मक शैली केलिए जानी जाती हैं। यदि उन्हें इस साल का साहित्य का नोबेल मिलता है, तो मुझे उन्हें पढ़ना होगा।

अनुमान लगाने वालों की लिस्ट में जेरॉल्ड मुर्नैन, गूगी वा थिओंग’ओ, जॉन फ़ोस, मार्ग्रेट एटवुड, जॉयस कैरोल ओट्स, स्टीफ़न किंग के नाम शामिल हैं। कई सालों से अनुमान लगाने और निराश होने वाले एलेक्स शेफ़र्ड की लिस्ट में कैन श्वे, गूगी वा थिओंग’ओ, जॉन फ़ोस तथा जेरॉल्ड मुर्नैन शामिल हैं। कई बार उनकी बात सच हो गई है और कई बार उन्हें भी निराशा हुई है।
 

बॉब डिलेन को नोबेल मिलने वाले साल उनका अनुमान था कि इसे तो पक्का नहीं मिलने वाला है। 2023 की उनकी सूची में ऑस्ट्रेलिया के 84 साल के जेरॉल्ड मुर्नैन सबसे ऊपर स्थान रखते हैं। ऑस्ट्रेलिया को अब तक केवल एक बार (1973, पैट्रिक व्हाइट) यह मिला है। थोड़े-से सनकी, सांस्कृतिक कार्यक्रमों से दूर रहने वाले, इंग्लिश के एक महान जीवित मुर्नेन लेखक को बहुत कम लोग जानते हैं।


वे विक्टोरिया के उस हिस्से में रहते हैं, जिसकी आबादी मात्र 300 है। कभी-कदा वे बार में नजर आते हैं। ‘टैमरिस्क रॉ’, ‘ए लाइफटाइम ऑन क्लाउड’, ‘द प्लैन्स’, ‘लैंडस्केप विद लैंडस्केप’, ‘इनलैंड’, ‘एमराल्ड ब्लू’ पैट्रिक व्हाइट पुरस्कार से सम्मानित मुर्नेन के उपन्यासों के नाम हैं। उनके काम पर फ़िल्में भी बनी हैं।

संभावनाशील लेखकों में कई सालों से गूगी वा थिओंग’ओ नाम प्रशंसकों-आलोचकों की जुबान पर हैं। आज 85 साल का यह साहित्यकार अफ्रीका के सबसे प्रभावशाली एवं महत्वपूर्ण पोस्टकॉलोनियल लेखक माना जाता है। उपनिवेश-विरोधी गूगी ने खूब लेखन किया है, उपन्यास, नाटक, साहित्यिक आलोचना आदि तमाम तरह का लेखन उनकी झोली में है।

‘पेटल्स ऑफ़ ब्लड’, ‘डेविल ऑनद क्रॉस’, ‘ए ग्रेन ऑफ़ व्हीट’, ‘विज़र्ड ऑफ़ द क्रो’ आदि उनके काम हैं। ‘विज़र्ड ऑफ़ द क्रो’ जादूई यथार्थवाद की संज्ञा दी जाती है। शायद नोबेल भी उनकी झोली में गिरे।

नाम तो हमारे इंग्लिश लेखक सलमान रुश्दी का भी हर साल लिया जाता है और पिछले साल लोगों को पक्का था कि उन्हें मिलेगा, क्योंकि प्रतिबद्ध लेखन के चलते उन्हें दशकों भूमिगत रहना पड़ा और पिछले साल उन पर जानलेवा हमला हुआ था।

पिछले साल एनी अर्नो को पुरस्कार दे कर समिति ने सबको चौंका दिया था। जबकि पोपुलर लेखक को नोबेल पुरस्कार देने का चलन नहीं है। अमेरिकी लेखक स्टेनगार्ड के अनुसार ‘कोई नहीं, मतलब कोई नहीं एक समूची दुनिया को अधिकार, मेधा, हास्य तथा सुंदरता के साथ रुश्दी जैसा जीवंत नहीं कर सकता है।’

‘विक्ट्री सिटी’ सलमान रुश्दी का 2023 में आया नवीनतम् उपन्यास है। उनके अन्य कार्यों पर खूब लेखन हुआ है, हिन्दी के पाठक उनसे बखूबी परिचित है। इसलिए उनके मात्र इस उपन्यास के बारे में कुछ बातें। ‘विक्ट्री सिटी’ एक स्त्री की गाथात्मक कहानी है। दो सौ सालों से अधिक की इस कहानी में विजयनगरम् के बनने, विकसित होने तथा पतन को बहुत गहराई से उकेरा गया है।

‘दि एटलांटा’ के अनुसार ‘विक्ट्री सिटी’ की सफ़लता का इसके होने मात्र में नहीं है, यह तो इसके सरासर अद्भुद होने में है। यदि उपन्यास प्रकाशित होते ही बेस्टसेलर हुआ तो क्या आश्चर्य! मेरी हार्दिक इच्छा औअर आशा है कि इस शानदार शैली के लेखक को इस साल का साहित्य का नोबेल पुरस्कार अवश्य मिलना चाहिए।

नाम तो कई और होंगे, लोगों की पसंद भी होगी। देखें नोबेल समिति की ज्यूरी किस नाम पर अपनी अंगुली धरती है, और इस साल कौन साहित्य का नोबेल विजेता बनता है। क्या पता समिति फ़िर एक ऐसे नाम का चुनाव करे, जो हमें चौंका दे। घोषणा के दिन का बहुत अपेक्षा के साथ इंतजार है।

घोषणा के दिन का बहुत अपेक्षा के साथ इंतजार है।

लेखक विश्व साहित्य और विश्व सिनेमा की गंभीर अध्येयता हैं और बीते दो दशकों से नोबेल पुरस्कारों पर लिख रही हैं. नोबेल पुरस्कार प्राप्त लेखकों पर उनकी छ: किताबें प्रकाशित हैं. 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकताु, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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