फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   netaji jayanti 2019 subhash chandra bose birth anniversary and facts about death

क्या वाकई उस समय जिंदा थे नेताजी सुभाषचंद्र बोस? क्या था रूस में दिखाई देने का राज?

Tue, 22 Jan 2019 02:47 PM IST
kapil sharma डॉ.शंकर सुवन सिंह
डॉ.शंकर सुवन सिंह Published by: kapil sharma Updated Tue, 22 Jan 2019 02:47 PM IST
विज्ञापन
netaji jayanti 2019 subhash chandra bose birth anniversary and facts about death
सुभाष चंद्र बोस (नेता जी) की मृत्यु का सही कारण पता लगाने के लिए भारत की सरकारें मुखर्जी आयोग से पूर्व दो जांच आयोग गठित कर चुकी हैं। - फोटो : File Photo

सुभाष चंद्र बोस  (नेता जी) की मृत्यु का  सही कारण पता लगाने के लिए भारत की सरकारें मुखर्जी आयोग से पूर्व दो जांच आयोग गठित कर चुकी हैं। सबसे पहले शाहनवाज कमेटी बनाई गई जबकि उसके बाद खोसला आयोग का गठन किया गया। शाहनवाज कमेटी नेता जी की मौत का सही पता न लगा सकी। खोसला आयोग ने कई दस्तावेजों के आधार पर कहा था कि सुभाष चंद्र बोस (नेता जी) की मृत्यु के होने का कोई उचित साक्ष्य नहीं है।

विज्ञापन


केंद्र में जब 1998 में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार आई तब इसके गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने एक और आयोग का गठन किया, जिसे नेता जी की मृत्यु का सही कारण पता लगाने का कार्य सौंपा गया। इस आयोग को 2002 में रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन उसने 2005 में रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी। यह मुखर्जी आयोग पिछले आयोग के निष्कर्ष से एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई।

विज्ञापन

netaji jayanti 2019 subhash chandra bose birth anniversary and facts about death
8 नवंबर 2005 को जस्टिस एम. के. मुखर्जी ने भारत सरकार को नेता जी सुभाष चंद्र बोस के मृत्यु के सम्बन्ध में रिपोर्ट सौंपी। - फोटो : file photo

सुभाषचंद्र बोस पर आखिरी रिपोर्ट  
8 नवंबर 2005 को जस्टिस एम. के. मुखर्जी ने भारत सरकार को नेता जी सुभाष चंद्र बोस के मृत्यु के सम्बन्ध में रिपोर्ट सौंपी। नेता जी की मृत्यु कैसे हुई इस सम्बन्ध में किसी भी तथ्य की सच्चाई उजागर होने के बजाए और अनसुलझी पहले बन गई। जस्टिस मुखर्जी आयोग की जांच रिपोर्ट से साबित होता है कि नेता जी कि मृत्यु के सम्बन्ध में आज भी कुछ रहस्य है। मुखर्जी आयोग कि जांच रिपोर्ट में बताया गया कि 18 अगस्त 1945 को ताईवान में कोई विमान दुर्घटना नहीं हुई।

अब तक कहा जाता रहा है कि सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को ताईवान के ताईहोकू हवाई अड्डे पर,विमान दुर्घटना में आग में झुलस जाने से हुई थी। जांच आयोग को ताईवान ने पूरा सहयोग दिया और निष्कर्ष निकाला कि ताईवान के ताईहोकू हवाई अड्डे पर कोई विमान दुर्घटना नहीं हुई थी। नेता जी सुभाष चंद्र बोस से सम्बन्ध रखने वाले देश रूस,जापान व ब्रिटेन थे। रूस,जापान व ब्रिटेन ने जांच में आयोग को अपेक्षित सहयोग नहीं दिया।

जांच आयोग को रूस जाने की अनुमति यूपीए सरकार ने नहीं दी, जिससे जांच आयोग को जांच कार्य में बाधा पहुंची। जांच भी ठीक ढंग से न हो सकी। मुखर्जी जांच आयोग की फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट से ज्ञात होता है कि सुभाष चंद्र बोस 1946 में ज़िंदा थे। सुभाष चंद्र बोस रूस में देखे गए थे। इसके ठोस प्रमाण प्राप्त न हो सके क्योंकि भारत सरकार ने आयोग को जांच के लिए रूस जाने की अनुमति प्रदान नहीं की थी। अमेरिकी खुफिया एजेंसी (सी.आई.ए.)के अनुसार 18 अगस्त 1945 ई.को ताईवान में कोई विमान दुर्घटना नहीं हुई थी। इस प्रकार जांच आयोग की रिपोर्ट ने आशंका जताई कि स्टालिन ने ही नेता जी को फांसी पर लटका दिया था, जिससे कि उनकी मृत्यु हुई थी।

netaji jayanti 2019 subhash chandra bose birth anniversary and facts about death
देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य रहा कि वह नेताजी (सुभाष चंद्र बोस )की मृत्यु के कारणों का सही पता न लगा पाई। - फोटो : File Photo

अस्थियों में पर क्यों होता रहा विवाद?
के.जी.बी. से जुड़े दो जासूसों ने 1973 में वॉशिंगटन पोस्ट को बिना अपना नाम बताए कहा था कि जापान के टैनकोजी मंदिर में रखी हुई अस्थियां नेता जी की नहीं हैं। नेता जी के भतीजे अमियनाथ ने खोसला आयोग को बताया था कि एक बार उन्हें ब्रिटिश अधिकारी ने फोन पर जानकारी दी थी कि 1947 में नेता जी सुभाष चंद्र बोस के साथ रूसी अधिकारियों ने गलत और अपकृत्य व्यवहार किया था।

सुभाषचंद्र बोस के भाई शरत चंद्र बोस ने 1949 में कहा था कि सोवियत संघ में नेता जी को साइबेरिया कि जेल में रखा गया था तथा 1947 में स्टालिन ने नेता जी को फांसी पर चढ़ा दिया था। सुभाष चंद्र बोस के साथ विमान में यात्रा करने वाले कर्नल हबीब रहमान ने मृत्यु के कुछ दिन पूर्व यह स्वीकार किया था कि ताईवान में कोई विमान दुर्घटना नहीं हुई थी। देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य रहा कि वह नेताजी (सुभाष चंद्र बोस )की मृत्यु के कारणों का सही पता न लगा पाई। आयोग की जांच व भारत सरकार की निष्क्रियता का सबसे बड़ा प्रमाण यही है। 
 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है. आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं. लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed