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राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2020ः देश के विकास की आधारशिला है विज्ञान

Fri, 28 Feb 2020 01:34 PM IST
Shankar Suwan Singh शंकर सुवन सिंह
Updated Fri, 28 Feb 2020 01:34 PM IST
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national science day 2020 importance and history
national science day 2019 theme - फोटो : Social Media

वास्तविक ज्ञान ही विज्ञान है। प्राकृतिक विज्ञान प्रकृति और भौतिक दुनिया का व्यवस्थित ज्ञान होता है, या फ़िर इसका अध्ययन करने वाली इसकी कोई शाखा। असल में विज्ञान शब्द का उपयोग लगभग हमेशा प्राकृतिक विज्ञानों के लिए ही किया जाता है। इसकी तीन मुख्य शाखाएं हैं: भौतिकी, रसायन शास्त्र और जीव विज्ञान। रसायन का वास्तविक ज्ञान, रसायन विज्ञान है। भौतिकी का वास्तविक ज्ञान, भौतिक विज्ञान है।

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जीव का वास्तविक ज्ञान, जीव विज्ञान है। कृषि का वास्तविक ज्ञान, कृषि विज्ञान है। खाद्य का वास्तविक ज्ञान, खाद्य विज्ञान है। दुग्ध का वास्तविक ज्ञान दुग्ध विज्ञान है। आदि ऐसे अनेक क्षेत्रों में विज्ञान हैं। रसायन, भौतिकी ,जीव-जंतु ,कृषि, खाद्य,दुग्ध,आदि अनेक क्षेत्रों के वास्तविक ज्ञान  से राष्ट्रहित संभव है। विज्ञान में जो महारथ हासिल कर ले वो वैज्ञानिक है। वो विज्ञान जो अविष्कार या खोज के द्वारा विश्व पटल पर चरितार्थ हो,राष्ट्रीय विज्ञान कहलाता है।

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भारत देश में अनेक वैज्ञानिक हुए जो विज्ञान के क्षेत्र में अनेक शोध या अविष्कार किए। उनकी यही खोज या अविष्कार, राष्ट्र को विश्व पटल पर चरितार्थ करता है। अतएव हम कह सकते हैं की ऐसा विज्ञान जो राष्ट्र को विश्व पटल पर चरितार्थ करे, वो राष्ट्रीय विज्ञान है। भारत में राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तत्वावधान में सन् 1986 से प्रतिवर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (नेशनल साइंस डे) मनाया जाता है।

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प्रोफेसर सी वी रमन (चंद्रशेखर वेंकटरमन) ने सन् 1928  में कोलकाता में इस दिन एक उत्कृष्ट वैज्ञानिक खोज की थी, जो ‘रमन प्रभाव’ के रूप में प्रसिद्ध है। रमन की यह खोज 28  फरवरी 1930 को प्रकाश में आई थी। इस कारण 28  फरवरी राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

इस कार्य के लिए उनको 1930 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इस दिवस का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति आकर्षित करना, प्रेरित करना तथा विज्ञान एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति सजग बनाना है। 

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस देश में विज्ञान के निरंतर उन्नति का आह्वान करता है, परमाणु ऊर्जा को लेकर लोगों के मन में कायम भ्रातियों को दूर करना इसका मुख्य उद्देश्य है तथा इसके विकास के द्वारा ही हम समाज के लोगों का जीवन स्तर अधिक से अधिक खुशहाल बना सकते हैं।

national science day 2020 importance and history
धूमधाम से मनाया गया राष्ट्रीय विज्ञान दिवस - फोटो : अमर उजाला

रमन प्रभाव में एकल तरंग- धैर्य  प्रकाश (मोनोक्रोमेटिक) किरणें, जब किसी पारदर्शक माध्यम ठोस, द्रव या गैस से गुजरती है तब इसकी छितराई किरणों का अध्ययन करने पर पता चला कि मूल प्रकाश की किरणों के अलावा स्थिर अंतर पर बहुत कमजोर तीव्रता की किरणें भी उपस्थित होती हैं। इन्हीं किरणों को रमन-किरण भी कहते हैं।

भौतिक शास्त्री सर सी वी  रमन एक ऐसे महान आविष्कारक थे, जो न सिर्फ लाखों भारतीयों के लिए बल्कि दुनिया भर के लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। यह किरणों के माध्यम से कणों के कम्पन्न एवं घूर्णन की वजह से मूल प्रकाश की किरणों में ऊर्जा में लाभ या हानि के होने से उत्पन्न होती हैं। रमन किरणों का अनुसंधान की अन्य शाखाओं जैसे  औषधि विज्ञान, जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान, खगोल विज्ञान तथा दूरसंचार के क्षेत्र में भी बहुत महत्व है।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की थीम 
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (नेशनल साइंस डे) सत्र 2020 ई का प्रसंग (थीम) है - "विज्ञान में महिलाएं" (वूमेंस इन साइंस)।  किसी ने क्या खूब कहा है - हर सफल इंसान के पीछे एक महिला का हाथ होता है, इसी प्रकार राष्ट्र निर्माण में  एक नहीं बल्कि सैकड़ों महिला वैज्ञानिकों का सहयोग होता है। महिलाएं सशक्त होंगी तभी देश बनेगा महाशक्ति।

सरल और सकारात्मक बुद्धिमान महिलाएं, जो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान के कई महत्वपूर्ण मिशनों का हिस्सा रहीं। इन महिलाओं के लिए सफलता की सीमा आकाश तक सीमित नहीं, बल्कि उससे आगे का जहां इनका है। ये जोश से भरी हुईं सशक्त और आत्मनिर्भर महिलाएं हमारे आसपास दिखाई देने वालीं सामान्य महिलाओं की तरह ही हैं, लेकिन वैज्ञानिक प्रभाव इन्हें कुछ खास बनाता है।

रितु करिढाल- ऋतु करिढाल भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ काम करने वाली एक भारतीय वैज्ञानिक हैं। वह भारत के मंगल कक्षीय मिशन, मंगलयान के उप-संचालन निदेशक थीं। उन्हें भारत की "रॉकेट वुमन" के रूप में जाना जाता है। वह लखनऊ में पैदा हुई थीं और एक एयरोस्पेस इंजीनियर थी। उन्होंने पहले भी कई अन्य इसरो प्रोजेक्ट्स के लिए काम किया है और इनमें से कुछ के लिए ऑपरेशन डायरेक्टर के रूप में काम किया है।

मौमिता दत्ता- मौमिता  विभिन्न प्रकार के कुलीन परियोजनाएं जैसे कि चंद्रयान-1, ओशियनसेट, रिसोर्ससैट और हाएसेट का हिस्सा रह चुकी हैं। उन्हें मंगल परियोजनाओं में मीथेन सेंसर के लिए परियोजना के आयोजक के तौर पर चुना गया था। वह ऑप्टिकल प्रणाली के विकास और सूचक के लक्षण वर्णन और अंशांकन के लिए जिम्मेदार थीं। इसरो की विभिन्न परियोजनाओं के लिए विभिन्न बहु-वर्णक्रमीय पेलोड और स्पेक्ट्रोमीटर के विकास में वे शामिल हैं।

नंदिनी हरिनाथ- नंदिनी हरिनाथ अपनी पहली नौकरी के तौर पर इसरो में शामिल हुई थीं और आज 20 साल हो गए, वे निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर हैं। कई दशकों पहले टीवी की दुनिया के प्रसिद्ध अमेरिकी विज्ञान कथा मनोरंजन कार्यक्रम, "स्टार ट्रेक"  सीरिज को देखने के बाद विज्ञान विषय पढ़ने के लिए प्रेरित हुईं।

शिक्षकों एवं इंजीनियरों के परिवार से होने के कारण विज्ञान और तकनीक के प्रति उनका स्वभाविक झुकाव था। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने 14 परियोजनाओं पर काम किया। इसरो के मंगलयान परियोजनाओं में इन्होंने मार्स ऑर्बिटर मिशन पर मिशन डिज़ाइन की परियोजना प्रबंधक और उप-ऑपेरशन संचालक के रूप में काम किया।

भारत के सफल मंगल अभियान से पहले मंगल ग्रह के लिए किए जाने वाले मिशन में सफलता की दर केवल 40% ही थी और भारत इसे पहली बार में और वह भी बहुत कम लागत और बहुत कम समय में पूरा करने वाला पहला देश है।

अनुराधा टी के-  वह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) में पहली महिलाएं हैं जिन्हें 2011 में अभियान (जीसैट 12) का निर्देशक बनाया गया। उम्र लगभग 9 साल रही होगी, जब उन्होंने यह जाना कि चंद्रमा पर पहुंचने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग थे। बस यही था एक अंतरिक्ष यात्री बनने का उनका पहला पाठ, जिससे वे सम्मोहित हुईं।

एक वरिष्ठ अधिकारी होने के नाते वे इसरो की हर महिला वैज्ञानिक के लिए एक प्रेरणास्त्रोत हैं। विद्यार्थी जीवन में उन्हें तार्किक विषयों को पढ़ने में अधिक रुचि थी, बजाए रटने या याद करने वाले विषयों के। आज वे इसरो के बेहद महत्वपूर्ण विभाग की प्रमुख होते हुए भी अपना वही तार्किक दिमाग लगाती हैं। उनका कहना है कि यहां समानता के व्यवहार के चलते कई बार उन्हें याद नहीं होता कि वे एक महिला हैं या अलग हैं।

एन वलारमथी- भारत के पहले देशज राडार इमेजिन उपग्रह, रिसेट वन की लांचिंग का एन वलारमथी ने प्रतिनिधित्व किया है। टी के अनुराधा के बाद वे इसरो के उपग्रह मिशन की प्रमुख के तौर पर वे दूसरी महिला अधिकारी हैं। एन वलारमथी ऐसी पहली महिला हैं जो रिमोट सेंसिंग सेटेलाइट में प्रयुक्त मिशन की प्रमुख रहीं ।

मीनल संपथ- मीनल संपथ को मिनल रोहित के नाम से भी जाना जाता है। यह स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (SAC), अहमदाबाद में एक वैज्ञानिक/ इन्जीनियर के तौर पर काम करती हैं। एक विधार्थी के तौर पर पीएसएलवी रॉकेट की निर्दोष उड़ान के सीधे प्रसारण से प्रभावित हो कर उन्होंने 1999 में बेंगलोर में स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान  केंद्र (ISRO) में कार्यभार संभाला।

दिलचस्पी की बात तो यह है कि वह डॉक्टर बनना चाहतीं थीं, पर दन्त विज्ञान में एक नंबर कम होने के कारण उन्हें दाखिला नहीं मिला और उन्होंने इंजिनियरिंग में दाखिला ले लिया।  बेंगलुरु से SAC 2004 तबादले के बाकी उन्हें ISRO के अध्यक्ष ई. एस किरण कुमार के साथ काम करने का अवसर मिला, जो कि सैक, अहमदाबाद में उनके समूह के निर्देशक थे।

देश के सबसे महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष परियोजना के सफलतापूर्वक पूरा करने की खातिर, दो साल तक मीनल संपथ ने भारत के मंगल मिशन में एक प्रणाली इंजीनियर के रूप में काम किया, जिसके दौरान वे अक्सर एक दिन में 18 घंटे काम करती थीं।

कीर्ति फौजदार- कीर्ति फौजदार इसरो की कम्प्यूटर वैज्ञानिक हैं जो उपग्रह को उनकी सही कक्षा में स्थापित करने के लिए मास्टर कंट्रोल फेसिलिटी पर काम करती हैं। वे उस टीम का हिस्सा हैं, जो उपग्रहों एवं अन्य मिशन पर लगातार अपनी नजर बनाए रखती हैं। कुछ भी गलत होने पर सुधार का काम वही करती हैं। उनके काम का समय कुछ अनियमित सा है, कभी दिन में तो कभी रात भर। वे बिना डरे शांति से काम करती हैं क्योंकि उन्हें बस अपने काम से प्यार है।

टेसी थॉमस- टेसी थॉमस (जन्म 1963) भारत की एक प्रक्षेपास्त्र वैज्ञानिक हैं। वे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन में अग्नि चतुर्थ की परियोजना निदेशक एवं एरोनाटिकल सिस्टम्स की महानिदेशक थीं। भारत में प्रक्षेपास्त्र परियोजना का प्रबन्धन करने वाली वे पहली महिला हैं। उन्हें 'भारत की प्रक्षेपास्त्रांगना' कहा जाता है।

48 वर्षीय भारतीय महिला वैज्ञानिक टेसी थॉमस को 1988 से अग्नि प्रक्षेपास्त्र कार्यक्रम से जुड़ने के बाद से ही अग्निपुत्री टेसी थॉमस के नाम से भी जाना जाता है। उनकी अनेक उपलब्धियों में अग्नि-2, अग्नि-3 और अग्नि-4 प्रक्षेपास्त्र की मुख्य टीम का हिस्सा बनना और सफल प्रशीक्षण है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम को अपना प्रेरणा स्रोत माना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में  केंद्र सरकार ने महिला विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित किया  है। भारत की महिलाएं राष्ट्र की प्रगति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और सरकार उनके योगदान और क्षमता को पहचानती है।

सरकार ने महिला सशक्तिकरण को लेकर कई मजबूत कदम उठाए हैं। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ से लेकर बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं और उनके दैनिक जीवन और उनकी दीर्घकालिक संभावनाओं को सुधारने के लिए कई पहल की है।

केंद्र  सरकार ने अपने कामकाज की बदौलत एक तरह से महिलाओं को एक साथ जोड़ दिया है। विज्ञान मिशन के लिए सबसे बड़ा बजट वर्ष 2020 में पेश किया गया। विज्ञान मिशन के लिए सबसे बड़ा बजट पेश करने वाली वित्त मंत्री भी एक महिला हैं जिनका नाम है निर्मला सीतारमण।

भारत सरकार ने वर्ष 2020 में विज्ञान और तकनीक विभाग के लिए पांच साल में आठ हज़ार करोड़ रूपए आवंटित करने का प्रावधान किया है। केंद्र सरकार ने क्वांटम टेक्नोलॉजीज़ एंड एप्लीकेशन्स पर एक राष्ट्रीय मिशन की घोषणा की है। वर्ष 2020 के  केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नई अर्थव्यवस्था,नई खोजों, बिज़नेस मॉडल,आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस,इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स , थ्रीडी प्रिंटिंग ,ड्रोन , डी एन ए डाटा स्टोरेज , क्वांटम कंप्यूटिंग विश्व की अर्थव्यवस्था की नई प्रथा लिख रही है।

निर्मला सीतारमण ने कहा क्वांटम तकनीक और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक विकास किया जाएगा।  भारत ने सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में चंद्रमा और मंगल की कक्षा में कृत्रिम उपग्रह को स्थापित किया  वह भी इतनी किफायत के साथ, कि विकसित देश भी इसकी सराहना करते हैं ।

अतएव हम कह सकते है की  भौतिक शास्त्री सर सी वी  रमन एक ऐसे महान आविष्कारक थे,जिन्होंने अपने अविष्कार (रमन इफेक्ट) के द्वारा, राष्ट्र को विश्व पटल पर चरितार्थ  किया।

राष्ट्र के विकास के तीन स्तम्भ हैं : जवान ,किसान और विज्ञान। हम कह सकते हैं जय जवान ,जय किसान और जय विज्ञान। जवान राष्ट्र की सुरक्षा के दृषिकोण से ,किसान राष्ट्र के खाद्यान  के दृष्टिकोण से, विज्ञान राष्ट्र  के प्रौद्योगिकी दृष्टिकोण से अहम् हैं, इसलिए हम कह सकते हैं कि विज्ञान राष्ट्र के विकास की आधारशिला है। 
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें  blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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