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नरेंद्र मोदी@75: टेक्नोलॉजी से बदल दिया देश का रुख, दुनिया ने माना हाईटेक नेता

Wed, 17 Sep 2025 10:37 AM IST
Vinod Patahk विनोद पाठक
Updated Wed, 17 Sep 2025 10:37 AM IST
सार

प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी का भरपूर उपयोग किया है। मोदी योजनाओं की समीक्षा और भाषणों की तैयारी लैपटॉप एवं टैबलेट पर करते हैं। अक्सर उन्हें एप्पल मैकबुक और आईपैड का उपयोग करते देखा गया।

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Narendra Modi Technology has transformed the country, and the world has recognized it as a high-tech leader
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन। - फोटो : ANI

विस्तार

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 75 वर्ष के हो गए। जब भारत के पड़ोस में सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर सरकारें अपदस्थ हो रही हैं, तब नरेंद्र मोदी ने न केवल सोशल मीडिया को अपनी मजबूती बनाया है, बल्कि स्वयं को दुनिया के सबसे हाईटेक नेता के रूप में स्थापित किया है। जबसे नरेंद्र मोदी ने राजनीति में कदम रखा है, वो चुनावी राजनीति में अजेय रहे हैं।

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विपक्ष अब केवल नरेंद्र मोदी के रिटायरमेंट की कामना करके हुए सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाता है। हालांकि, नरेंद्र मोदी ने अब तक ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है कि वो कहीं जा रहे हैं। 
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देश की राजनीति ने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के साथ एक ऐसा मोड़ लिया, जिसने संवाद और चुनावी रणनीतियों को हमेशा के लिए बदल दिया। नरेंद्र मोदी ऐसे नेता के रूप में उभरे, जिन्होंने सोशल मीडिया को सिर्फ प्रचार का साधन नहीं बनाया, बल्कि जनता से सीधे जुड़ने का पुल बना दिया। दरअसल, नरेंद्र मोदी का टेक्नोलॉजी से जुड़ाव अचानक की घटना नहीं थी।
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जिस दौर में भारत का युवा कंप्यूटर और लैपटॉप पर काम करना सीख रहा था, तब भाजपा संगठन में काम करते हुए वर्ष 1998-99 के दौरान नरेंद्र मोदी ने तकनीक के इन दोनों टूल्स का प्रयोग शुरू कर दिया था। वर्ष 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद से उन्होंने सरकारी कामकाज में ई-गवर्नेंस, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग को अपनाया।

प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी का भरपूर उपयोग किया है। मोदी योजनाओं की समीक्षा और भाषणों की तैयारी लैपटॉप एवं टैबलेट पर करते हैं। अक्सर उन्हें एप्पल मैकबुक और आईपैड का उपयोग करते देखा गया।

जब दुनिया का बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया को मनोरंजन का साधन मान रहा था, तब नरेंद्र मोदी इसे राजनीति और जनसंपर्क का भविष्य समझ चुके थे। नरेंद्र मोदी ने ट्विटर (अब एक्स) और फेसबुक पर अपनी मजबूत उपस्थिति पहले से बना ली थी। वर्ष 2009 के बाद से उन्होंने सोशल मीडिया पर सक्रियता बढ़ाई।

धीरे-धीरे स्वयं की एक डिजिटल नेता की छवि गढ़ी। एक्स पर लाखों फॉलोअर्स बनाने वाले वे भारत के पहले बड़े नेता बने थे। फेसबुक और यूट्यूब पर उनके वीडियो एवं पोस्ट युवाओं में लोकप्रिय होने लगे।

यदि यह कहा जाए कि सोशल मीडिया ने नरेंद्र मोदी को सीधे जनता तक पहुंचाया तो गलत नहीं होगा। वे किसी भी मुद्दे पर तुरंत ट्वीट या पोस्ट कर अपनी राय देते और लोगों की भावनाओं को समझते।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव को भारत का पहला सोशल मीडिया चुनाव कहा जा सकता है। यह चुनाव भारत की राजनीति में डिजिटल क्रांति का प्रतीक बना। नरेंद्र मोदी और उनकी टीम ने इसे सोशल मीडिया आधारित चुनाव बना दिया। नरेंद्र मोदी ने चुनावी कैंपेन को पारंपरिक रैलियों या पोस्टरों से आगे बढ़ाकर सोशल मीडिया पर उतार दिया।

ट्विटर, फेसबुक, यूट्यूब, गूगल हैंगआउट और वॉट्सएप को हथियार बनाया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर चाय पर चर्चा कार्यक्रम चलाया। लाखों लोग सोशल मीडिया से जुड़कर एक साथ नरेंद्र मोदी से संवाद करते थे। यह पहल जनता के दिलों तक पहुंच गई। भारत में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में युवा वोट डालने वाले थे।

टीम मोदी ने युवाओं को आकर्षित करने के लिए सोशल मीडिया पर जीवंत और आकर्षक कंटेंट तैयार किया। ग्राफिक्स, छोटे वीडियो, स्लोगन और इन्फोग्राफिक्स तैयार किए। #AbKiBaarModiSarkar, #ModiForPM जैसे हैशटैग सोशल मीडिया पर लगातार ट्रेंड करते रहे। नरेंद्र मोदी की छवि डिजिटल युग के नेता के रूप में मजबूत होती चली गई।

नरेंद्र मोदी ने 3डी होलोग्राम रैलियों के जरिए एक साथ कई स्थानों पर दिखाई देते थे। सोशल मीडिया ने इसे और वायरल कर दिया। यहां तक कि विदेशी मीडिया ने नरेंद्र मोदी के डिजिटल अभियान को India’s first social media election कहा। इसने न सिर्फ देश में, बल्कि विदेशों में भी नरेंद्र मोदी की पहचान बनाई।

नरेंद्र मोदी सोशल मीडिया की शक्ति को पहचान चुके थे, यही कारण रहा कि उन्होंने वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद सोशल मीडिया का व्यापक प्रयोग किया। आज नरेंद्र मोदी एक्स और इंस्टाग्राम पर दुनिया के सबसे अधिक फॉलो किए जाने वाले नेताओं में शामिल हैं।

कांग्रेस समेत दूसरी विपक्षी पार्टियों को नरेंद्र मोदी की सोशल मीडिया शक्ति कुछ देर से समझ में आई। वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव आते-आते विपक्षी पार्टियां भी सोशल मीडिया वार में कूद चुकी थीं।

हालांकि, इन्हें वर्ष 2024 के चुनाव में अपनी सोशल मीडिया कैंपेन का लाभ हुआ और भाजपा बहुमत के आंकड़े से कुछ पीछे रह गई। हकीकत यह है कि अब राजनीति धरातल से अधिक सोशल मीडिया पर हो रही है, जिसके नरेंद्र मोदी पुराने खिलाड़ी हैं।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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