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MCD election results 2022: केजरीवाल की सियासत से कांग्रेस दरकिनार, जनता की नजर में आप ही असली विकल्प

Thu, 08 Dec 2022 10:29 AM IST
Atul sinha अतुल सिन्हा
Updated Thu, 08 Dec 2022 10:29 AM IST
सार

मुफ्त और सस्ती बिजली, मुफ्त इलाज और बेहतर अस्पताल और मोहल्ला क्लिनिक के साथ सरकारी स्कूलों के कायाकल्प और महिलाओं को बसों में मुफ्त सफर की सुविधा देकर केजरीवाल ने लोगों का दिल जीता है। 

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MCD election results 2022 arvind kejariwal is the only option for public know the ground reality of bjp and co
एमसीडी में आप की जीत का विश्लेषण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली की सियासी हवा बदली बदली सी है। अरविंद केजरीवाल ने नतीजों के बाद अब राजनीतिक बयानबाजियों से बचते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोग से दिल्ली के विकास की बात की है। चुनावी रणनीति के तहत बेशक उनके निशाने पर भाजपा रहती आई हो, तमाम सवालों पर उप राज्यपाल से टकराव की खबरें भी सतह पर आती रही हों, लेकिन उन्हें भी पता है कि दिल्ली सिर्फ एक केन्द्र शासित प्रदेश नहीं है, देश की राजधानी भी है और केंद्र की मदद के बगैर उनकी सरकार चाहकर भी कोई खास बदलाव नहीं कर सकती। उनकी अपनी सीमाएं हैं और सियासत का मतलब सिर्फ चुनावी बयानबाजी होती है।

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दरअसल, केजरीवाल अब इस फार्मूले को समझ चुके हैं। इन नतीजों ने ये भी साबित किया है कि मनीष सिसोदिया, सत्येन्द्र जैन, कैलाश गहलोत और गोपाल राय के क्षेत्रों में आखिर भाजपा का अभियान कैसे रंग लाया? सत्येन्द्र जैन के जेल जाने और वहां से लगातार जारी होने वाले वीडियो ने कितना असर डाला, साथ ही सिसोदिया के खिलाफ चले अभियानों ने क्या गुल खिलाया।

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इन नेताओं के इलाकों में कैसे भाजपा ने अपना परचम लहराया और कुल मिलाकर देखें तो भाजपा के वोट प्रतिशत में कैसे और क्यों करीब साढ़े तीन फीसदी का इजाफा हो गया।  

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आंकलन करना होगा और गणित समझना होगा 

अगर कुछ देर के लिए एग्जिट पोल के नतीजों पर गौर करें तो ये साफ हो जाता है कि जिस तरह आप के बंपर जीत और भाजपा की बुरी तरह हार की भविष्यवाणियां की गई थी, वह गलत साबित हुईं। बेशक आप को बहुमत मिला लेकिन ऐसी तमाम सीटें हैं जहां जीत का अंतर बहुत ही कम रहा है और भाजपा ने कांटे की टक्कर दी है।

 

भाजपा और आप के इस खेल में कांग्रेस लगातार हाशिए पर खिसकती जा रही है। चाहे नगर निगम के चुनाव हों या विधानसभाओं के, कांग्रेस के लिए आम आदमी पार्टी एक बड़ी मुसीबत तो बन ही चुकी है, वहीं भाजपा के लिए ज्यादातर जगहों में इसकी मौजूदगी फायदेमंद साबित होती दिखती है।



 

MCD election results 2022 arvind kejariwal is the only option for public know the ground reality of bjp and co
अगर कुछ देर के लिए एग्जिट पोल के नतीजों पर गौर करें तो ये साफ हो जाता है कि जिस तरह आप के बंपर जीत और भाजपा की बुरी तरह हार की भविष्यवाणियां की गई थी, वह गलत साबित हुईं। - फोटो : अमर उजाला

आखिर क्या है कांग्रेस की हालत?

राहुल गांधी बेशक अपनी यात्रा से भारत को जोड़ने का दावा कर रहे हों, देश की नब्ज़ को टटोलने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन अभी उनकी इस यात्रा को कहीं से भी पार्टी का फायदा होता नहीं दिख रहा। अपनी निजी छवि बनाने की उनकी ये कोशिश सियासी तौर पर आने वाले दिनों में कितना असर दिखाएगी, यह तो 2024 के चुनावों में पता चलेगा, लेकिन फिलहाल उसका नतीजा कहीं नजर नहीं आ रहा।

वैसे भी गुजरात या दिल्ली में कांग्रेस ने पहले ही हथियार डाल रखे हैं और हिमाचल में अलग वह कांटे की टक्कर में है तो यह हिमाचल की जनता की मजबूरी कह सकते हैं और जयराम ठाकुर के गिरते ग्राफ का असर या फिर वहां का ‘सियासी रिवाज़’। लेकिन दिल्ली के नतीजे एक ऐसे मजबूत विकल्प और मजबूत विपक्ष का संकेत देते हैं जो कहीं न कहीं कांग्रेस के लिए एक राष्ट्रव्यापी खतरे के अंदेशे से भरा हुआ लगता है।

आप को भाजपा की बी टीम बताने वाली पार्टियां ये मानती रही हैं कि केजरीवाल कहीं न कहीं भाजपा की ही उपज हैं और उन्हें बढ़ाने के पीछे भाजपा की दूरगामी रणनीति है ताकि कांग्रेस को खत्म किया जा सके। लेकिन इन सियासी अटकलों के बावजूद ये देखने वाली बात है कि आखिर जनता का मूड क्या है और कैसे वह एक बेहतर विकल्प की तलाश में बेचैन है। उसे वह विकल्प आम आदमी पार्टी के रूप में दिखाई दे रहा है। उसे लगता है कि केजरीवाल की बातों में दम है और कम से कम दिल्ली की जनता को पिछले सात आठ सालों में केजरीवाल सरकार ने जो सहूलियत दी हैं, वह किसी सरकार ने नहीं दीं।


मुफ्त और सस्ती बिजली, मुफ्त इलाज और बेहतर अस्पताल और मोहल्ला क्लिनिक के साथ सरकारी स्कूलों के कायाकल्प और महिलाओं को बसों में मुफ्त सफर की सुविधा देकर केजरीवाल ने लोगों का दिल जीता है। बेशक आबकारी घोटाला या शराब की उनकी नीति ने उन्हें ज़रूर कठघरे में खड़ा किया हो लेकिन जनता ने उन्हें कम से कम नगर निगम में भाजपा से बीस ही माना है।

ये अलग सवाल है कि अब वो जिस कूड़े के पहाड़ को हटाने के नाम पर, यमुना की सफाई के नाम पर और एक स्वच्छ दिल्ली देने के नाम पर वह चुनाव जीते हैं, उसे व्यावहारिक तौर पर वह कैसे पूरा करते हैं। लेकिन अब तक प्रदूषण कम करने को लेकर की गई उनकी कोशिशें या जनता को दी जाने वाली अन्य सहूलियतों का ही असर है कि उन्हें सीधे तौर पर उसका फायदा मिला है।

जाहिर है चुनौतियां तमाम हैं, और भाजपा के साथ उनका सियासी टकराव भी उनके लिए इस खेल का हिस्सा बना रहेगा, उपराज्यपाल के साथ नए समीकरणों में उनके रिश्तों पर भी नजर बनी रहेगी, लेकिन ये तय है कि आम आदमी पार्टी ने जनता की नजर में खुद को एक मजबूत विकल्प के तौर पर पेश कर दिया है। बाकी तो सियासत है, चलती रहेगी।     

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें। 

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