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स्मृति शेष: देशभक्ति फिल्मों को नया मुकाम देने वाला गुमनामी में चला गया...

Fri, 04 Apr 2025 01:49 PM IST
Vinod Patahk विनोद पाठक
Updated Fri, 04 Apr 2025 01:49 PM IST
सार

मनोज कुमार, जिनका असली नाम हरिकृष्ण गोस्वामी था, उन बॉलीवुड अभिनेताओं में शामिल थे, जो अविभाजित भारत में पैदा हुए और जिन्होंने बंटवारे के दंश को झेला।

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manoj kumar passes away at 87 Worked in many patriotic films
87 साल की उम्र में हुआ मनोज कुमार का निधन। - फोटो : ANI

विस्तार

अभिनेता मनोज कुमार अब हमारे बीच नहीं रहे। उन्हें भारत कुमार के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि उन्होंने देशभक्ति से ओत-प्रोत कई फिल्मों में न केवल किरदार निभाया, बल्कि उनका निर्माण भी किया। मनोज कुमार को देशभक्ति की फिल्मों के लिए तो सदैव याद किया जाएगा, लेकिन उन्होंने भ्रष्टाचार और आम आदमी जुड़े विषयों को लेकर जो फिल्में बनाईं तथा किरदार निभाए, वो भी अविस्मरणीय हैं।

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फिल्म शोर में लाचार पिता का किरदार हो या फिल्म क्लार्क में गरीबी से छुटकारा पाने के लिए भ्रष्ट बनने का रोल, मनोज कुमार ने आम आदमी की भावनाओं के बखूबी छुआ। फिल्म रोटी, कपड़ा और मकान का गीत 'महंगाई मार गई' तो आज भी राजनीतिक दलों को प्रिय है।  
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मनोज कुमार, जिनका असली नाम हरिकृष्ण गोस्वामी था, उन बॉलीवुड अभिनेताओं में शामिल थे, जो अविभाजित भारत में पैदा हुए और जिन्होंने बंटवारे के दंश को झेला। साल 1937 में एबटाबाद (अब पाकिस्तान में) में जन्मे मनोज कुमार का परिवार 1947 में बंटवारे के समय दिल्ली आ गया था।
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उनके परिवार से कोई भी फिल्मों में नहीं था, लेकिन 6 फीट 1 इंच लंबे मनोज कुमार ने फिल्मों से जुड़ने का सपना देखा। मुंबई पहुंचने के बाद उनका यह सपना बहुत जल्द पूरा भी हुआ। मात्र 20 साल की उम्र में उन्होंने फैशन नाम की फिल्म में अभिनय किया। फिर अगले दो दशक तक मनोज कुमार ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 

मनोज कुमार ने 60 और 70 के दशक में एक से बढ़कर एक हिट फिल्में दीं। बेहद कम उम्र में वो डायरेक्टर की भूमिका में आ गए थे। क्रांतिकारी भगत सिंह पर बॉलीवुड में कई फिल्में बनीं, लेकिन मनोज कुमार की फिल्म शहीद और भगत सिंह का निभाया उनका किरदार ही याद किया जाता है। उनके डायरेक्शन में 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध पर बनी फिल्म उपकार ने फिल्मफेयर अवॉर्ड फंक्शन में झंडे गाड़ दिए थे।

पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के कहने पर बनी फिल्म उपकार ने चार फिल्मफेयर पुरस्कार जीते, जिसमें सर्वश्रेष्ठ फिल्म, डायरेक्टर, स्टोरी और डायलॉग शामिल हैं। उन्हें फिल्म उपकार के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए नामित किया गया था। इस फिल्म के लिए मनोज कुमार को नेशनल अवॉर्ड भी मिला। साल 1969 में आई फिल्म बेईमान के लिए उन्हें फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, 1972 में आई फिल्म शोर के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनय, 1975 में आई फिल्म रोटी, कपड़ा और मकान के लिए सर्वश्रेष्ट निर्देशक का अवॉर्ड मिला।

साल 1970 में आई फिल्म यादगार का गीत 'इक तारा बोले तुन-तुन' तो आज के हालात का वर्णन है। साल 1999 में फिल्मफेयर ने उन्हें लाइफ टाइम में अचीवमेंट अवॉर्ड दिया। भारत सरकार ने साल 1992 में मनोज कुमार को पद्मश्री और 2016 में दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से नवाजा। 

हालांकि, साल 1981 के बाद मनोज कुमार की बॉलीवुड में सक्रियता बेहद कम हो गई। 1981 में उन्होंने देशभक्ति पर आधारित फिल्म क्रांति, 1987 में कलयुग की रामायण, 1979 में संतोष व क्लर्क, 1991 में देशवासी और उनकी अंतिम फिल्म 1995 में मैदान-ए-जंग रही। उसके बाद वो फिल्मों में नजर नहीं आए। यूं लगा कि बॉलीवुड ने उन्हें उसके बाद भुला सा दिया।

अगर यह कहा जाए कि उन्हें बॉलीवुड ने इग्नोर किया तो गलत नहीं होगा। साल 2007 में शाहरुख खान की फिल्म ओम् शांति ओम् में उनका मजाक तक उड़ाया गया, जिससे खफा होकर वो कोर्ट तक चले गए थे। हालांकि, शाहरुख खान ने माफी मांग कर विवाद को खत्म करने का प्रयास किया। 

देशभक्ति को लेकर बॉलीवुड ने फिल्में तो बहुत बनाई हैं, लेकिन जो पहचान मनोज कुमार ने देशभक्ति फिल्मों को दी, वो शायद कोई अन्य अभिनेता या निर्माता-निर्देशक नहीं कर पाया। फिल्म पूरब और पश्चिम में उन्होंने भारतीय संस्कृति और गौरव को लेकर जो डायलॉग बोले, वो कालजयी हो गए हैं।

उनका यह गीत 'जब जीरो दिया मेरे भारत ने' आज भी सुपरहिट गीतों की श्रेणी में आता है। मनोज कुमार ने राजनीति में भी हाथ आजमाने का प्रयास किया और साल 2004 में वो भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। हालांकि, उन्हें चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला। दुःखद यह है कि 55 फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाने वाले मनोज कुमार जीवन के अंतिम दशकों में गुमनामी सा जीवन जीते हुए ही विदा हो गए।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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