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मणिपुर चुनाव 2022: तो सरकार भाजपा बना ले जाएगी..!

satyanaryan mishra सत्यनारायण मिश्र
Updated Sun, 06 Feb 2022 12:24 AM IST
सार

मणिपुर ही नहीं पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी,  खासकर कांग्रेस से, भाजपा में विधायकों के दलबदल का सिलसिला आम रहा है। इसलिए चर्चा यह भी है कि किसी कारण कांग्रेस फिर बड़ी पार्टी बनकर उभरी तो भी सरकार भाजपा ही बना ले जाएगी।

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मणिपुर के विधानसभा चुनाव में इस बार भाजपा और कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर कोई खींचतान धरातल पर दिखाई नहीं दे रही। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रैलियों और जनसभाओं पर बंदिशों के बीच मणिपुर में भी चुनावी वातायन खुल चुका है। प्रमुख लड़ाका पार्टियां भाजपा और कांग्रेस अपने पूरे दमखम के साथ मतदाताओं तक पैठ बनाने में जुटी हैं। एनपीपी, एनपीएफ जैसी खास क्षेत्रीय पार्टियों के अलावा वामपंथी खेमा भी पीछे नहीं। यहां की राजनीतिक सोच देश के अन्य भागों की तुलना में काफी अन-अनुमानित (Unpredictable) है।

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पिछले चुनाव की ही बात करें तो बहुमत से महज 3 विधायक कम होने वाली कांग्रेस तत्काल निर्णय नहीं ले पाने के कारण ताकती रह गई थी,  जबकि 10 सीटें पीछे रहते हुए भी भाजपा सरकार बना ले गई। अभी तक के आसार ऐसे ही हैं कि कांग्रेस लाख जतन करे, भाजपा फिर डंका बजा लेगी।
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मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने राज्य के मूल निवासियों की नब्ज़ पकड़ रखी है। विकास, शांति, शिक्षा-स्वास्थ्य और बेहतर आवागमन संसाधनों की बात करते हुए बार-बार अफ्सपा हटाने को मुख्य चुनावी टूल बनाने से नहीं चूकते। उनकी बातें मतदाताओं को कितना लुभाती हैं, परिणाम इसी पर निर्भर है। पहले चरण के मतदान के लिए अभी 23 दिन बाकी हैं। बहुत कुछ राज्य में जारी तेज ठंड और मतदान के प्रतिशत पर भी निर्भर करेगा।

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क्या है कांग्रेस की स्थिति?

रोचक ढंग से पंजाब जैसे पाकिस्तान की सीमा से लगे राज्य के विपरीत म्यांमार से सटे मणिपुर के विधानसभा चुनाव में इस बार भाजपा और कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर कोई खींचतान धरातल पर दिखाई नहीं दे रही।

कांग्रेस में तो पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के प्रभामंडल को चुनौती देने वाला अभी तक नहीं उभरा। वे लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। मणिपुर कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष के मेघचंद्र के मुताबिक पार्टी के पास कई अनुभवी नेता हैं। इबोबी सिंह प्रमुख व्यक्ति हैं। हर कोई उनको जानता है, वे अभी भी शक्तिशाली हैं।

राज्य में कांग्रेस ने पांच अन्य राजनीतिक पार्टियों भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), सीपीआई (मार्क्सवादी), रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी), जनता दल (सेक्युलर) और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (एआईएफबी) से गठबंधन किया है।

कांग्रेस अध्यक्ष एन लोकेन सिंह ने कहा कि मणिपुर में भाजपा के शासन को हटाने के लिए यह गठबंधन किया गया है। भाजपा शासन में देश के अन्य भागों के साथ राज्य में भी स्थिति खराब है। इसलिये पार्टी ने समान विचारधारा वाली पार्टियों से गठबंधन बनाने की जरूरत महसूस की।


भाकपा सचिव एल. सोतिनकुमार के मुताबिक-

 

जहां वाम दलों के कोई प्रत्याशी नहीं हैं, वहां कांग्रेस को पूरा समर्थन दिया जाएगा। गठबंधन का न्यूनतम साझा कार्यक्रम सामने आना है। मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह ने भाजपा पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि इसके शासन में लोकतंत्र खतरे में है। भाजपा किसी भी परिस्थिति में राज्य पर पूर्ण नियंत्रण चाहती है।


ओकराम इबोबी सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस वर्ष 2017 के विधानसभा चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई थी। फिर भी सरकार नहीं बना पाने के बाद वह यहां लगातार कमजोर होती गई है। पिछले दिनों उसके दो वरिष्ठ विधायक चल्टनलियन एमो और काकचिंग वाई सुरचंद्र और बीते साल अगस्त में मणिपुर कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष गोविंददास कोंथाउजम भी भाजपा में शामिल हो गए थे।



मणिपुर ही नहीं पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी,  खासकर कांग्रेस से, भाजपा में विधायकों के दलबदल का सिलसिला आम रहा है। इसलिए चर्चा यह भी है कि किसी कारण कांग्रेस फिर बड़ी पार्टी बनकर उभरी तो भी सरकार भाजपा ही बना ले जाएगी।
 

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