Mango Diplomacy: दक्षिण एशिया में आम की मिठास और 'कूटनीति' की चतुर चाल, भारत-बांग्लादेश के बीच घुलेगी मिठास
भारत और बांग्लादेश के बीच मौजूदा कटुता के बीच, बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने भारत को 1000 किलो 'हरीबंगा' आम भेजे हैं। यह 'आम डिप्लोमेसी' की पुरानी परंपरा का हिस्सा है। सवाल यह है कि क्या ये आम दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ पिघला पाएंगे?
भारत और बांग्लादेश के बीच मौजूदा कटुता के बीच, बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने भारत को 1000 किलो 'हरीबंगा' आम भेजे हैं। यह 'आम डिप्लोमेसी' की पुरानी परंपरा का हिस्सा है। सवाल यह है कि क्या ये आम दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ पिघला पाएंगे?
विस्तार
Mango Diplomacy India Bangladesh: 'आम के आम, गुठलियों के दाम', 'आम खाओ, पेड़ मत गिनो' यह कुछ प्रचलित कहावतें हैं, जो भारत के आम जनमानस में खासी प्रचलित हैं। भारत या कहें दक्षिण एशिया में आम केवल एक फल नहीं है, बल्कि कूटनीति (डिप्लोमेसी) का एक बड़ा साधन भी है। भारत हो, पाकिस्तान हो या फिर बांग्लादेश, यहां आम डिप्लोमेसी का बड़ा महत्व है। अपने देश की प्रसिद्ध आमों की किस्मों को प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति दूसरे देश के समक्ष नेताओं को भेजकर मित्रता का संदेश देते हैं। कुछ ऐसा ही काम अब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस ने किया है।
मो. यूनुस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत के प्रमुख राजनयिकों और दूसरे अधिकारियों को 'हरीबंगा' आम, जो बांग्लादेश की प्रसिद्ध किस्म है, के हजार किलो आम भेजे हैं। इनदिनों दोनों देशों के बीच संबंधों में कटुता चल रही है। क्या मो. यूनुस के आम इस कटुता में मिठास में बदलने का काम करेंगे?
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भारत में आम को फलों का राजा कहते हैं। दुनिया का 45 प्रतिशत आम भारत में पैदा होता है। हमारे यहां आम की दर्जनों किस्में होती हैं। आम की कुछ प्रजातियां पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी पाई जाती हैं, जिनमें बांग्लादेश का 'हरीबंगा' आम प्रमुख है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है, जब मो. यूनुस ने भारत के साथ आम डिप्लोमेसी की हो। वो केंद्र सरकार के अलावा त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को आम भेज चुके हैं।
इधर, वर्ष 2023 में अपने निर्वासन से पहले बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'हरीभंगा आम' भेजे थे। माना जाता है कि उन्होंने यह कदम उस समय तीस्ता नदी जल बंटवारे पर रुकी हुई बातचीत के दौरान मित्रता के भाव से उठाया था।
वर्ष 2008 में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. मनमोहन सिंह को आम भेजे थे, ताकि दोनों देशों के बीच दो पक्षीय संवाद को फिर से प्रारंभ किया जा सके। पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आम भेजकर मैत्रीपूर्ण संकेत दिया था।
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय से भारत के पत्रकारों और नेताओं को अक्सर आम भेंट स्वरूप भेजे जाते रहे हैं। पाकिस्तान से ‘अनवर रटोल’ किस्म के आम अवश्य भेजे जाते हैं। रटोल उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले का एक कस्बा है। उसी के नाम पर यह किस्म है। इस किस्म की आम की पौध को बंटवारे के समय कुछ लोग पाकिस्तान ले गए थे।
भारत और आम से होती कूटनीति
भारत की ओर से भी आम डिप्लोमेसी अपनाई जाती रही है। पश्चिमी देशों में आम एक प्रचलित फल है। 1950 के दशक में भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत बनाने के लिए राजनयिक स्तर पर आम की पेटियां अमेरिकी नेताओं को भेंट स्वरूप दी जाती थीं। ऐसा कहा जाता है कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. जवाहर लाल नेहरू अमेरिकी नेताओं को आम भेजते थे। हालांकि, इस बात के कोई आधिकारिक दस्तावेज या पुष्टि नहीं है।
वर्ष 1986 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी ने फिलीपींस की पूर्व राष्ट्रपति कोराजोन एक्विनो को अपनी सरकारी यात्रा के दौरान आम उपहार स्वरूप दिए थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. मनमोहन सिंह के समय पाकिस्तान के नेताओं को सिंधरी और चौसा किस्म के आम भेजे गए थे। वर्ष 2021 में जब कोरोना काल चल रहा था, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश, अफगानिस्तान, भूटान, श्रीलंका और मालदीव को दशहरी, लंगड़ा, चौसा जैसी किस्मों के आम भेजे थे। आम भेजने के पीछे उनका संदेश यही था कि भले ही सीमाएं बंद हों, लेकिन दिलों की दूरी नहीं होनी चाहिए।
अब देखना यह है कि मो. यूनुस के आम क्या भारत-बांग्लादेश के बीच जम चुकी बर्फ को पिघलने का काम करेंगे, क्योंकि भारत की ओर से बांग्लादेश को लेकर सख्ती बरती जा रही है। व्यापार समेत कई पाबंदियां लगाई गई हैं। भारतीय क्रिकेट टीम का बांग्लादेश दौरा पिछले दिनों रद्द कर दिया गया था। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार काफी सख्त है। दूसरी ओर, बांग्लादेश पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत में रहने को लेकर नाराजगी जाहिर करता रहता है। यह आम दोनों के रिश्तों में मिठास घोलेगा या नहीं, यह आने वाले दिनों में दिख जाएगा। अभी तो बस आम खाओ, गुठलियां मत गिनो...।
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