फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   maharashtra government formation live news sharad pawar ncp shivsena devendra fadnavis resign

महाराष्ट्रः गेमचेंजर' की गुगली से भाजपा क्लीन बोल्ड

Tue, 26 Nov 2019 06:54 PM IST
Atul sinha अतुल सिन्हा
Updated Tue, 26 Nov 2019 06:54 PM IST
विज्ञापन
maharashtra government formation live news sharad pawar ncp shivsena devendra fadnavis resign
शरद पवार की राजनीति बिसात के आगे शाह फेल हो गए। - फोटो : PTI

विज्ञापन

अब देवेंद्र फड़नवीस जो कहें,  भाजपा जितनी सफाइयां देती रहे लेकिन बड़े पवार ने छोटे पवार के साथ मिलकर जो खेल खेला उसने राजनीति के बड़े बड़े धुरंधरों को चक्कर में डाल दिया। तीन दिनों के इस पूरे ड्रामे को अगर अब गौर से देखें तो साफ हो जाता है कि शरद पवार और अजित पवार की सारी रणनीति सुनियोजित थी।

अजित पवार के रातोंरात भाजपा को समर्थन देने और उप मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद भी आखिर शरद पवार क्यों ज्यादा विचलित नहीं हुए, क्यों लगातार उनके चेहरे पर निश्चिंतता का भाव ही  रहा और क्यों उन्हें हमेशा ये आत्मविश्वास था कि अजित पवार वापस लौट आएंगे। उनकी कल की दोनों प्रेस कांफ्रेंस याद कीजिए। पत्रकारों के लगातार पूछने पर कि क्या अजित आपके इशारे पर ऐसा कर रहे हैं, वो रहस्यमय तरीके से मुस्कुरा कर रह गए। कोई जवाब नहीं दिया और हंसकर टाल गए।

विज्ञापन


दरअसल, पवार ने एक तीर से कई निशाने साध लिए। एक तो भाजपा को फिर से सत्ता का लॉलीपॉप देकर उन्होंने चंद ही घंटे में महाराष्ट्र से राष्ट्रपति शासन हटवा कर सरकार बनाने का रास्ता साफ करवा लिया। दूसरे कांग्रेस की ऊहापोह को एक झटके में खत्म करवा कर शिवसेना के साथ लाने का रास्ता एकदम खोल दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


दरअसल, एक महीने से कांग्रेस की हालत और रवैये को शरद पवार बारीकी से जांच परख रहे थे, पुराने कांग्रेसी होने के नाते पवार कांग्रेस की रग-रग से वाकिफ़ रहे हैं। उन्हें इस वक्त एक तरह से नेतृत्वविहीन कांग्रेस की हालत सबसे ज्यादा पता है।

याद कीजिए, जब चुनाव नतीजे के बाद राहुल गांधी ने पद छोड़ दिया और एकांत में चले गए और पार्टी के लिए नए अध्यक्ष की तलाश चल रही थी तब एकबार शरद पवार के नाम की भी चर्चा चली थी और कांग्रेस-एनसीपी विलय तक की बात उठने लगी थी।

 

maharashtra government formation live news sharad pawar ncp shivsena devendra fadnavis resign
शरद पवार के आगे भाजपा ने घुटने टेक दिए। - फोटो : PTI

जाहिर है कांग्रेस-एनसीपी मूल रूप से काफी हद तक एक ही रहे हैं। हां, महाराष्ट्र के संदर्भ में एनसीपी बेशक कांग्रेस पर हमेशा से भारी पड़ती रही है। शरद पवार के लिए अब बेशक कुर्सी मायने न रखती हो, लेकिन अजित पवार या सुप्रिया सुले के लिए तो उन्हें बहुत कुछ करना ही है। 

फिलहाल इस थ्रिलर फिल्म का मुख्य किरदार उन्होंने अजीत पवार को बनाया और इसकी पटकथा उन्होंने बहुत सोच-समझ कर लिखी। इस सियासी चौसर में उनके सामने अमित शाह जैसा मज़बूत और तिकड़मी खिलाड़ी था जिसने कई राज्यों में साम-दाम-दंड-भेद से भाजपा की सरकारें बनवाईं। कांग्रेस के ढुलमुल रवैये और हताशा ने उसे हर जगह पटकनी मिलती रही, लेकिन महाराष्ट्र में शरद पवार के रहते चौसर की यह बाज़ी शाह बुरी तरह हार गए।

अजित पवार और फड़नवीस के साथ आते ही फटाफट राष्ट्रपति शासन हटा, राज्यपाल महोदय ने झट से शपथ दिलवा दी, शपथ लेते ही चंद ही मिनटों में मोदी और शाह की बधाइयां आ गईं। यानी बड़े पवार का तीर एकदम निशाने पर बैठा।

कहानी का दूसरा पार्ट उसके बाद शुरू हुआ। शरद पवार शांत और संयम के साथ थे। अपने तय कार्यक्रम से काम करते रहे, बैठकें करते रहे और ये भरोसा जताते रहे कि भतीजा कहीं नहीं जाएगा, वापस आ जाएगा। कोई कार्रवाई भी नहीं और पार्टी में भी किसी की हिम्मत नहीं थी कि उनके खिलाफ कुछ बोल सके।

यह शरद पवार की संगठन क्षमता और परिपक्व नेतृत्व की ताकत ही है कि तीन दिनों में पूरी तस्वीर बदल गई। भाजपा चित्त हो गई और फिलहाल शिवसेना के मन की मुराद पूरी हो गई। इस पूरे घटनाक्रम के कई संदेश हैं । एक तो ये कि अब बेईमानी, संविधान की अनदेखी और लोकतंत्र का अपमान करने वाली पार्टी के तौर पर मशहूर हो चुकी भाजपा को आने वाले वक्त के लिए सबक लेने की जरूरत है।

दूसरे, कांग्रेस को अब ये तय करने में वक्त नहीं लगाना चाहिए कि आज उसके सामने पहला लक्ष्य भाजपा को सत्ता में न आने देना होना चाहिए और इसके लिए तात्कालिक तौर पर भाजपा विरोधी गठबंधन बनाने से हिचकना सही नहीं है और तीसरे ये कि महाराष्ट्र से सबक लेकर आने वाले चुनाव के लिए दोस्तों और दुश्मनों की पहचान अभी से करना शुरू हो। 

जाहिर है सत्ता के खेल में कोई दूध का धुला नहीं होता, लेकिन फिलहाल महाराष्ट्र के दिलचस्प खेल में गेम चेंजर फिर से पवार ही रहे। पहले छोटे पवार और इस बार बड़े पवार।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed