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क्या भाजपा और देवेंद्र फडणवीस के लिए भस्मासुर साबित हो सकती है शिवसेना?

Hari Govind Vishwakarma हरगोविंद विश्वकर्मा
Updated Thu, 03 Oct 2019 06:39 PM IST
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Maharashtra Election 2019: BJP Devendra Fadnavis  Shiv Sena  Uddhav Thackeray
आदित्य ठाकरे को चुनाव मैदान में उतार चुकी शिवसेना की नज़र दरअसल मुख्यमंत्री की कुर्सी पर है - फोटो : PTI

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में वैसे तो सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के बीच गठबंधन की औपचारिक घोषणा हो गई है। दोनों दलों के नेता नामांकन पत्र भर रहे हैं। इस बीच शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की महाराष्ट्र में भगवा गठबंधन में ‘बड़ा भाई’ बनने की दबी हसरत भविष्य में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र में भाजपा के लिए भस्मासुर साबित हो सकती है।

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मुंबई की वर्ली सीट से आदित्य ठाकरे को चुनाव मैदान में उतार चुकी शिवसेना की नज़र दरअसल मुख्यमंत्री की कुर्सी पर है, जिसके चलते भविष्य में इन दोनों भगवा दलों के बीच गतिरोध पैदा हो जाए तो कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए।
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कहीं शिवसेना की नजर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर तो नहीं?
भगवा गठबंधन के दोनों प्रमुख दलों के बीच सीटों के बंटवारे पर समझौता भले ही हो गया है, लेकिन मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री पद को लेकर दोनों के बीच अब भी गतिरोध जारी है। कभी राज्य में बड़े भाई का किरदार निभा चुकी शिवसेना उपमुख्यमंत्री पद लेकर संतुष्ट नहीं होने वाली क्योंकि उसकी नज़र मुख्यमंत्री की कुर्सी पर है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे बार-बार कह रहे हैं कि उन्होंने अपने पिता और शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे को वचन दिया है कि महाराष्ट्र में एक न एक दिन शिवसैनिक को मुख्यमंत्री बनाकर ही रहेंगे।
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भाजपा के अंदर भी फडणवीस को लेकर विरोध के सुर
इसके अलावा भाजपा के अंदर एक धड़ा शुरू से ही किसी गैर-मराठा को मुख्यमंत्री बनाने का विरोध करता रहा है। वह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गैर-मराठा होने के चलते विरोध करता रहा है। धाकड़ नेता एकनाथ खडसे फिलहाल हाशिए पर हैं, उनका टिकट लगभग कट चुका है, क्योंकि उम्मीदवारों की पहली दो सूचियों में उनका नाम नहीं है। इसी बिना पर कोंकण के विनोद तावड़े का भी टिकट काट दिया गया।

अब मुंबई भाजपा अध्यक्ष रह चुके आशिष शेलार जैसे नेता अंदर ही अंदर देवेंद्र फडणवीस की सत्ता को चुनौती देने से नहीं चूकेंगे। राजनीति के जानकार मान रहे हैं कि भाजपा को इस बार विधानसभा चुनाव में सबसे ज़्यादा ख़तरा अपने दल के असंतुष्ट नेताओं और फडणवीस विरोधियों से भी है।

 

Maharashtra Election 2019: BJP Devendra Fadnavis  Shiv Sena  Uddhav Thackeray
शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत बार-बार बयान दे रहे हैं कि युवा नेता आदित्य ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनेंगे। - फोटो : Facebook

कभी मुंबई में शिवसेना बड़े और भाजपा छोटे भाई के किरदार में थी
दरअसल, 1988-89 में जब प्रमोद महाजन और बाल ठाकरे ने भाजपा और शिवसेना के बीच गठबंधन का फैसला किया तब भाजपा को राज्य में कोई ख़ास जनाधार नहीं था। उस समय शिवसेना बड़े भाई और भाजपा छोटे भाई के किरदार में थी। 1995 में जब भगवा गठबंधन की सरकार बनी तब शिवसेना के मनोहर जोशी मुख्यमंत्री और भाजपा के गोपीनाथ मुंडे उपमुख्यमंत्री बने थे।

यह सिलसिला 2014 के लोकसभा चुनाव तक जारी रहा, लेकिन 2014 के विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद भाजपा बड़े भाई के किरदार में आ गई। इस अदला-बदली को उद्धव मन से कभी स्वीकार नहीं कर सके।

आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने के संकेत दे चुकी है शिवसेना!
शिवसेना अभी से इसका संकेत दे रही है कि अभी गठबंधन केवल सीटों पर हुआ है, मुख्यमंत्री पद के लिए दोनों दलों के बीच कोई समझौता नहीं हुआ है। शिवसेना के मुखपत्र सामना के कार्यकारी संपादक और प्रवक्ता संजय राउत बार-बार बयान दे रहे हैं कि युवा नेता आदित्य ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनेंगे। अभी शिवसेना की रैली में राउत ने कहा कि तकनीकी ख़राबी के चलते भले चंद्रयान चांद पर लैंड नहीं कर पाया लेकिन शिवसेना का सूर्ययान (आदित्य) मंत्रालय की छठवीं मंजिल (मुख्यमंत्री कार्यालय) पर शर्तिया लैंड करेगा।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि संजय राऊत जानबूझ एक योजना के तहत बार बार आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने वाला बयान दे रहे हैं।

 

Maharashtra Election 2019: BJP Devendra Fadnavis  Shiv Sena  Uddhav Thackeray
यह भी संभव है कि शिवसेना मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला लेकर आगे आए और भाजपा पर दबाव बनाए।   - फोटो : Facebook

दरअसल, इस बार भाजपा 146 सीट और शिवसेना 124 सीट पर अपने उम्मीदवार उतारने जा रही हैं। शेष 20 सीट सहयोगी दलों के लिए छोड़ा गया है। शिवसेना लोकसभा चुनाव से पहले हुए समझौते का हवाला देते हुए बराबर की सीट यानी 144 सीट पर दावा कर रही थी और यह भी ज़ोर दे रही थी कि मुख्यमंत्री पद पर दोनों दल ढाई-ढाई साल रहेंगे, लेकिन देवेंद्र फडणवीस ने यह फॉर्मूला मानने से इनकार कर दिया। भाजपा तो शिवसेना को 120 सीट से अधिक नहीं देना चाहती थी, लेकिन अंततः वह सहयोगी को 124 सीट देने के लिए तैयार हो गई।

शिवसेना जानती है भाजपा के साथ मिलकर लड़ना लाभदायक है
सन् 2014 के महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव के पहले शिवसेना बड़े भाई के किरदार में थी। वह भाजपा को 127 सीट से अधिक देने को तैयार नहीं थी, क्योंकि वह ख़ुद 151 सीटों पर लड़ना चाहती थी। लिहाजा, उसने इसके लिए 25 साल पुराना गठबंधन तोड़ दिया। चुनाव प्रचार में भी उद्धव अपने ऊपर नियंत्रण नहीं रख सके थे और भाजपा नेताओं को जमकर कोसा था।

ऐसी भी बातें कहने लगे, जो परिपक्व नेता नहीं कहता। बहरहाल, उस चुनाव में पूरी ताक़त लगाने के बावजूद बड़ा भाई बनना चाह रही शिवसेना 63 सीट से आगे नहीं बढ़ पाई, जबकि भाजपा 122 सीट जीतने में सफल रही। इस समय का चक्र कहेंगे कि इस बार शिवसेना ख़ुद 124 सीट पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो गई। शिवसेना जानती है कि कांग्रेस एनसीपी का गठबंधन हो गया है, लिहाजा, भाजपा के साथ लड़ना लाभदायक होगा।

मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला ला सकती है शिवसेना 
दरअसल, शिवसेना ने इस बार विधान चुनाव में पूरी ताकत से लड़ने की घोषणा की है, क्योंकि वह अपने विधायकों की संख्या बढ़ाना चाहती है। चुनाव में शिवसेना अगर पिछली बार से 25-30 सीट ज्यादा जीतने में सफल रहती है तो वह भाजपा को चैन से सरकार नहीं चलाने देगी। यह भी संभव है कि शिवसेना मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला लेकर आगे आए और भाजपा पर दबाव बनाए।   

 

Maharashtra Election 2019: BJP Devendra Fadnavis  Shiv Sena  Uddhav Thackeray
राजनीति के पंडित कहने लगे हैं कि आदित्य ठाकरे की राजनीति में एंट्री के बाद शिवसेना किसी भी सूरत में उन्हें मख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाना चाहेगी। - फोटो : ANI

आदित्य को सीएम नहीं बनाया गया तो शिवसेना ले सकती है एनसीपी का सहयोग
राजनीति के पंडित कहने लगे हैं कि आदित्य ठाकरे की राजनीति में एंट्री के बाद शिवसेना किसी भी सूरत में उन्हें मख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाना चाहेगी। इसलिए सीटें बढ़ने पर शिवसेना ऐसा दावा कर सकती है। अगर भाजपा इसके लिए तैयार न हुई तो शिवसेना एनसी का सहयोग ले सकती है।

यानी विधानसभा चुनाव के बाद एक नया गठबंधन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। शरद पवार की शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के दौस्ताना रिश्ता था। संबंधों में वह मीठापन अभी तक बरकरार है।

सबसे अहम भाजपा शिवसेना गठबंधन की घोषणा से एक दिन पहले संजय राउत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व रक्षामंत्री शरद पवार से मिलने उनके दक्षिण मुंबई के सिल्वर ओक बंगले पर गए थे। इतना ही नहीं, शिवसेना ने शरद पवार के खिलाफ महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले में एफआईआर दर्ज करने के प्रवर्तन निदेशालय के कदम का भी कड़ा विरोध किया था। इसके अलावा मुंबई में आरे कॉलोनी में मेट्रो कारशेड के लिए 2700 पेड़ काटने के मुद्दे पर भी भाजपा और शिवसेना में बहुत गंभीर मतभेद है।

चुनाव में एनसीपी और कांग्रेस की सीटें बढ़ने की उम्मीद
राज्य राजनीति पर नज़र रखने वाले जानकार कहते हैं कि इस बार चुनाव में एनसीपी और कांग्रेस दोनों की सीटें बढ़ने की संभावना है। पीएमसी बैंक में कथित तौर पर भाजपा विधायक सरदार तारा सिंह के बेटे समेत भाजपा के 11 नेताओं का नाम आने से भाजपा बैकफुट पर है।

विपक्ष बैंक घोटाले को जम कर उठा रहा है। इसके अलावा विपक्ष ने छत्रपति शिवाजी महाराज स्मारक में घोटाले का आरोप लगाया है। इन तमाम मुद्दों का असर चुनाव पर पड़ सकता है। इसके अलावा शरद पवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की ख़बर का एनसीपी लाभ लेने की कोशिश कर रही है।

 इसके अलावा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को उनके 2014 के हलफनामे के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से झटका भी अहम है। गौरतलब हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने अभी हाल ही में फडणवीस पर  हलफनामे में जानकारी छुपाने के चलते उनके खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत  मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। यह मुद्दा फड़णवीस के गले की फांस बन सकता है।   

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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