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कमज़ोर मुख्यमंत्री के रूप में इस बार शपथ लेंगे फड़णवीस?

Hari Govind Vishwakarma हरगोविंद विश्वकर्मा
Updated Thu, 24 Oct 2019 05:20 PM IST
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maharashtra assembly election results 2019 BJP Shiv Sena devendra fadnavis
भाजपा के लिए बिना शिवसेना के सहयोग के सरकार बनाना संभव नहीं। - फोटो : Facebook

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव में बृहस्पतिवार को घोषित हुए नतीजे में भारतीय जनता पार्टी– शिवसेना के भगवा गठबंधन को दोबारा बहुमत मिलने के बाद देवेंद्र फड़णवीस भले दूसरी बार राज्य में सत्ता की बागडोर संभालें, लेकिन इस बार भाजपा को 22 सीटें कम मिलने से वह एक कमज़ोर मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। 

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चुनाव परिणाम के बाद संवाददाता सम्मेलन में फडणवीस ने कहा कि उनके नेतृत्व में मजबूत सरकार बनेगी और पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी। उन्होंने आगे कहा कि पिछली बार हम 260 से ज़्यादा सीटों पर लड़ी थी और 122 सीट जीती थी, इस बार भाजपा ने केवल 146 सीटों पर प्रत्याशी उतारे और 100 से ज्यादा सीट जीतने में सफल रही। इस तरह इस बार हमारे 70 फ़ीसदी उम्मीदवार जीतने में सफल रहे हैं।
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2014 के विधानसभा चुनाव में 122 सीट जीतने वाले भाजपा इस बार (अंतिम समाचार मिलने तक) 100 सीट तक सीमित रह गई है। हालांकि पिछली बार 63 सीटें जीतने वाली शिवसेना की भी सीटें इस बार घटी हैं। लेकिन राजनीतिक पंडित कह रहे हैं कि जिस तरह देवेंद्र फड़णवीस ने 2014 में ताक़तवर मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी और सरकार में शामिल मंत्रियों को अपनी इच्छा के अनुसार विभाग दिया था, वो सूरत-ए-हाल इस बार बदल गया है।
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पिछली बार लोक सभा चुनाव में चुनावी गठबंधन होने से पहले तक शिवसेना क़रीब-क़रीब विपक्ष की भूमिका में थी। इसकी मुख्य वजह थी शिवसेना को मुख्यमंत्री द्वारा कम महत्वपूर्ण विभाग देना। जब 1995 में शिवसेना-भाजपा गठबंधन की सरकार बनी थी तब शिवसेना मुख्यमंत्री मनोहर जोशी और नारायण राणे ने भाजपा को उपमुख्यमंत्री पद के साथ साथ महत्वपूर्ण गृह विभाग दिया था। जबकि 2014 में शिवसेना उपमुख्यमंत्री पद तो नहीं लेकिन गृह विभाग जरूर चाहती थी, लेकिन देवेंद्र फड़णवीस ने उन्हें गृह विभाग नहीं दिया। अलबत्ता शिवसेना को गृहराज्य मंत्री का पद ज़रूर दिया था।

दरअसल, पिछली बार भाजपा सत्ता से केवल 23 सीट दूर थी। इस तरह फडणवीस बिना शिवसेना के सहयोग से भी सरकार बनाने की स्थिति में थे, लेकिन इस बार सूरत-ए-हाल बिल्कुल अलग है। भाजपा के लिए बिना शिवसेना के सहयोग के सरकार बनाना संभव नहीं। उन्हें किसी भी सूरत में शिवसेना को साथ रखना होगा। वैसे शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने चुनाव परिणाम के बाद प्रेस कान्फ्रेंस में भाजपा के साथ गठबंधन का वादा किया है।
 

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सबसे बड़ी बात मुख्यमंत्री के रूप में दूसरा कार्यकाल पूरा करने की देवेंद्र फडणवीस की राह में शिवसेना एक बड़ी बाधा बन सकती है - फोटो : ani

सबसे बड़ी बात मुख्यमंत्री के रूप में दूसरा कार्यकाल पूरा करने की देवेंद्र फडणवीस की राह में शिवसेना एक बड़ी बाधा बन सकती है, विभाग बंटवारे में दोनों में पहले की तरह इस बार भी मतभेद हो सकता हैं। और खुद उद्धव ठाकरे कहते रहे हैं कि वे अपने पिता और शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे को यह वचन दे चुके हैं कि राज्य में एक न एक दिन किसी शिवसैनिक को मुख्यमंत्री बनाकर छोड़ेंगे और कांग्रेस-एनसीपी भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिए शिवसेना की अल्पमत संभावित सरकार को बाहर से समर्थन दे सकते हैं, क्योंकि मतगणना की पूर्व संध्या पर कांग्रेस नेता राजू वाघमार ने बयान दिया था कि आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने के लिए कांग्रेस-एनसीपी शिवसेना को समर्थन दे सकते हैं।

निश्चित रूप से यह चुनाव देवेंद्र फड़णवीस के लिए बहुत अच्छा नहीं रहा है। वह अपने दम पर बहुमत पाने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन एनसीपी ने उनका खेल बिगाड़ दिया। पिछली बार भाजपा का मुख्यमंत्री पद का कोई चेहरा नहीं था और पार्टी का शिवसेना से गठबंधन नहीं था, फिर भी भाजपा 122 सीट जीतने में सफल रही थी।

इस बार भाजपा शिवसेना का चुनावी गठबंधन था। भाजपा निर्विवाद बड़े भाई की भूमिका में थी, जबकि शिवसेना छोटे भाई के किरदार में थी। भाजपा 164 सीटों पर चुनाव लड़ी, जबकि शिवसेना को 124 सीट से ही संतोष करना पड़ा। इस बार चुनाव देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में लड़ा गया। इस परिस्थिति में फडणवीस पर सीटों की संख्या को 122 से ऊपर ले जाने की जिम्मेदारी थी, जिसमें वह सफल नहीं हुए, उल्टे सीटें 20 कम हो गईं। ऐसे में पार्टी के अंदर उनके विरोध जरूर मुखर होंगे। लिहाज़ा मुख्यमंत्री पर उनसे भी निपटने की जिम्मेदारी होगी।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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