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महाराष्ट्र चुनाव 2019ः बीजेपी के सामने आसान नहीं होगी कांग्रेसी-एनसीपी की राह

Hari Govind Vishwakarma हरगोविंद विश्वकर्मा
Updated Fri, 06 Sep 2019 08:24 AM IST
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Maharashtra assembly election BJP-SHIV SENA Amit Shah-Devendra Fadnavis
देवेंद्र फड़णवीस अपनी दूसरी पारी के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं। - फोटो : अमर उजाला

महाराष्ट्र और दूसरे राज्यों में विधानसभा चुनाव की तिथि की घोषणा से पहले ही पार्टी सक्रिय हो गई है। फिलहाल, भाजपा स्टार प्रचारकों को महाराष्ट्र के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में लोगों को संबोधित करने के लिए भेजा जा रहा है ताकि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35 ए को हटाए जाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के फैसले का विधानसभा चुनाव में अधिकतम लाभ लिया जा सके। अमित शाह और राम माधव समेत कई शीर्ष नेताओं की सभा हो चुकी है।

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मंगलवार को वर्सोवा में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की सभा भारी बारिश के चलते रद्द कर दी गई। 7 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा होने वाली है। मतलब, राज्य विधानसभा चुनाव का निर्वाचन आयोग की ओर से एलान अभी नहीं हुआ है, लेकिन राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच गई हैं।
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करीब सात दशक के राज्य के इतिहास में पूरे कार्यकाल तक सत्ता में रहने वाले दूसरे मुख्यमंत्री बनने का श्रेय पाने वाले देवेंद्र फड़णवीस अपनी दूसरी पारी के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं। उनकी ‘महाजनादेश यात्रा’ का दूसरा चरण अभी दो दिन पहले समाप्त हुआ है। सोलापुर के समापन समारोह में अमित शाह ने औपचारिक एलान कर दिया कि चुनाव में जीत के बाद फड़णवीस ही मुख्यमंत्री होंगे।
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वैसे मुख्यमंत्री की महाजनादेश यात्रा को राज्य भर में अच्छा प्रतिसाद मिला। हर जगह फड़णवीस को देखने सुनने बड़ी संख्या में लोग जुटे। दो चरणों वाली इस यात्रा की सफलता से उत्साहित फड़णवीस 13 सितंबर से तीसरा चरण शुरू करने जा रहे हैं। इसमें वह पश्चिम महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में लोगों से मिलेंगे।

महाजनादेश यात्रा में कहीं मुख्यमंत्री का स्वागत हो रहा था, तो कहीं वह जनता को संबोधित कर रहे थे। फड़णवीस ने खुद कहा था, “महाजनादेश यात्रा के माध्यम से मैं जनता को अपने पांच साल के कार्यकाल का हिसाब देने और अगले चुनाव का जनादेश लेने निकला हूं। हम अपनी सरकार के कार्यों के बदले जनता से महाजनादेश मांग रहा हूं।” 

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बहरहाल, यह भी कहा जा रहा था कि सत्तारुढ़ भगवा गठबंधन में मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान चल रही है। - फोटो : PTI

महाजनादेश के सभा प्रमुख और भाजपा मुंबई के नवनियुक्त महासचिव मोहित भारतीय के मुताबिक महाजनादेश यात्रा के माध्यम से मुख्यमंत्री 113 सभाएं करने वाले थे, लेकिन सुषमा स्वराज और अरुण जेटली के असामयिक निधन से कई सभाएं रद करनी पड़ी। फिर भी उन्होंने सौ से ज्यादा सभाओं को संबोधित किया।

अहम बात यह भी है कि फड़वणीस की महाजनादेश यात्रा के समांतर युवा शिवसेना प्रमुख आदित्य ठाकरे विजय संकल्प मेलावा पर निकले थे। वह भी जगह-जगह लोगों से मिले और राज्य में दोबारा भाजपा-शिवसेना सरकार बनाने के लिए सहयोग मांगा।

सभाओं में वह ‘नया महाराष्ट्र’ बनाने का आह्वान कर रहे थे। यात्रा के मामले में विपक्ष भी पीछे नहीं था। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की 6 अगस्त से नासिक से शुरू हुई पश्चिम महाराष्ट्र में शिव स्वराज्य यात्रा का दूसरा चरण पूरा हो चुका है। कांग्रेस इस मामले में पिछड़ गई और कई वरिष्ठ नेताओं के पार्टी छोड़ देने से पार्टी में अनिश्चितता का माहौल है।

बहरहाल, यह भी कहा जा रहा था कि सत्तारुढ़ भगवा गठबंधन में मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान चल रही है। शिवसेना की ओर से आदित्य ठाकरे का नाम आगे किया जा रहा है, लेकिन यह मात्र अटकल है, शिवसेना जानती है कि भाजपा के साथ रहना उसके लिए फायदेमंद है। फिलहाल पार्टी बार्गेन करने की स्थिति में नहीं है।

ताजा खबरों के मुताबिक भाजपा शिवसेना मिलकर चुनाव लड़ेंगे और दोनों के बीच सीटों का बंटवारे सहमति बन सकती है। अगर भगवा गठबंधन सत्ता में वापस लौटता है तो आदित्य नई सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं। वैसे मुख्यमंत्री जनादेश यात्रा में कह चुके हैं कि भाजपा कार्यकर्ता चाहते हैं कि भाजपा अकेले चुनाव लड़े और पार्टी उस स्थिति में है भी, लेकिन हम गठबंधन की धर्म निभाएंगे और लोकसभा चुनाव से पहले हुआ गठबंधन जारी रहेगा। भाजपा-शिवसेना साथ में चुनाव मैदान में उतरेंगे और आदित्य ठाकरे अगर चाहेंगे तो उनको उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।

दरअसल, इस बार विधानसभा चुनाव भाजपा-शिवसेना गंठबंधन के लिए वॉकओवर जैसा लग रहा है। अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाए का असर राज्य में हर जगह दिख रहा है। केंद्र के इस फैसले का विरोध कर कांग्रेस ने अपने पांव कुल्हाड़ी पर दे मारी है। भूपिंदर सिंह हुड्डा और ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरह यहां भी कई नेता तो खुलेआम केंद्र के फैसले का समर्थन कर रहे हैं।

बहरहाल, आम कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को इस मुद्दे पर जनता का सामना करने में असुविधा हो रही है। इसके अलावा, बड़ी संख्या में कांग्रेस और एनसीपी के नेता भाजपा में प्रवेश कर रहे हैं। विधानसभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे-पाटिल भाजपा में शामिल हुए और फड़णवीस ने उन्हें आवास मंत्री बना दिया। कई और बड़े नेता भाजपा में शामिल होने के लिए कतारबद्ध हैं। कतार लंबी होने के कारण इनमें से कई लोगों को शिवसेना में शामिल होने की सलाह दी जा रही है।

एनसीपी मुंबई अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री सचिन अहिर और कांग्रेस के अब्दुल सत्तार शिवसेना का दामन थाम चुके हैं। दोनों भाजपा में शामिल होना चाहते थे। पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के बाद एफआईआर दर्ज होने से भी पार्टी बैकफुट पर है।

 

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अगर फड़णवीस के पांच साल के कार्यकाल की बात करें तो वसंतराव नाईक के बाद वह पहले मुख्यमंत्री हैं जिसने लगातार पांच साल तक सरकार का नेतृत्व किया।

बहरहाल, अगर फड़णवीस के पांच साल के कार्यकाल की बात करें तो वसंतराव नाईक के बाद वह पहले मुख्यमंत्री हैं जिसने लगातार पांच साल तक सरकार का नेतृत्व किया। नाईक 1963 से लगातार 11 साल 77 दिन मुख्यमंत्री रहे थे। उसके बाद कोई भी मुख्यमंत्री पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया।

नाईक के बाद वसंतदादा पाटिल मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन वह केवल 3 साल 181 दिन ही राज कर सके। इमरजेंसी के बाद शरद पवार ने दल-बदल करके 1978 में उन्हें अपदस्थ कर दिया। उसी समय से पवार की इमैज पीठ में छुरा घोंपने वाले नेता की बनी। वैसे वसंतदादा दो बार और मुख्यमंत्री बने लेकिन उन्हें बीच में ही हटा दिया गया।

महाराष्ट्र राज्य बनने के बाद कांग्रेस की ओर से यशवंतराव चव्हाण मुख्यमंत्री बने, लेकिन 2 साल 202 महीने बाद ही वह अपने पद से हटा दिए गए। उनकी जगह एमएस कन्नमवर 1 साल 4 दिन के लिए मुख्यमंत्री बने। कन्नमवर को पीके सावंत ने रिप्लेस किया, लेकिन वह केवल 9 दिन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रहे। इसके बाद वसंतराव नाईक मुख्यमंत्री बने थे।

वैसे शरद पवार 3 बार राज्य के मुख्यमंत्री बने लेकिन उनका कुल कार्यकाल 6 साल 221 दिन का रहा। कांग्रेस के शंकरराव चव्हाण (4 साल 190 दिन) और विलासराव देशमुख (7 साल 123 दिन) दो-दो बार मुख्यमंत्री बने। पांच दशक में कांग्रेस बार-बार मुख्यमंत्री बदलती रही जिससे पृथ्वीराज चव्हाण, शिवाजीराव पाटिल निलंगेकर, अशोक चव्हाण, अब्दुल रहमान अंतुले, बालासाहेब भोसले, सुधाकरराव नाईक और सुशीलकुमार शिंदे को मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला।

मुख्यमंत्री बदलने का सिलसिला पिछले शिवसेना भाजपा गठबंधन में जारी रहा। सत्ता में आने के बाद शिवसेना मनोहर जोशी को चीफ मिनिस्टर बनाया, लेकिन 3 सील 323 महीने बाद उन्हें हटा दिया गया। उनकी जगह नारायण राणे को मुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन फिर भगवा गठबंधन चुनाव हार गया और इस तरह राणे केवल कुल 258 दिन ही सत्ता में रह सके। बार-बार मुख्यमंत्री बनाने का असर विकास पर पड़ा और राज्य दूसरे राज्यों खासकर गुजरात से पिछड़ता गया।

फड़णवीस के पांच साल सत्ता में रहने की नतीजा सकारात्मक रहा। बुनियादी ढांचे का विकास हर जगह हो रहा है। मुंबई में एक दर्जन से ज्यादा मेट्रो लाइन बिछाने का काम चल रहा है। मुंबई-नागपुर को जोड़ने के लिए 705 किलोमीटर समृद्धि महामार्ग का निर्माण कार्य शुरू है। कोस्टल रोड के अलावा मुंबई को नवी मुंबई से जोड़ने के लिए करीब 22 किलोमीटर लंबी ट्रांस-हारबर सी-लिंक बनाया जा रहा है।

इतना ही नहीं नवी मुंबई में नए एयरपोर्ट बनाने का कार्य भी प्रगति पर है। फड़णवीस इसका श्रेय स्थाई नेतृत्व को देते हैं। अनौपचारिक बातचीत में कहते हैं, “भाजपा शासन में मुख्यमंत्री बार-बार बदले नहीं जाते हैं, जैसा कि कांग्रेस शासन में होता था। इसका असर विकास पर पड़ा है। हर जगह विकास कार्य दिख रहा है।

हम ऐसा दावा नहीं कर रहे हैं कि राज्य की सभी समस्याएं हल कर ली गई है। मगर, मेरी सरकार ने पांच साल में पिछली (कांग्रेस-एनसीपी) सरकार से दोगुने से अधिक काम किए हैं। भविष्य में सरकार का हर जगह लक्ष्य पीने का पानी पहुंचाने का है। हम केंद्र के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। यही वजह है कि औद्योगिक विकास में महाराष्ट्र देश में अव्वल है और पूरे देश का 25 फीसदी रोजगार महाराष्ट्र यहां पैदा हो रहा है।”

देवेंद्र फड़णवीस के 2014 में 31 अक्टूबर को सत्ता संभाली थी, इस तरह राज्य में चुनावी प्रक्रिया तीसरे सप्ताह तक पूरी की जानी है और निर्वाचन आयोग किसी भी समय चुनावी कार्यक्रम की घोषणा कर सकता है।   

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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