क्या चिदंबरम की गिरफ्तारी से बेहद सतर्क हैं शरद पवार?
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ऐसे समय जब महाराष्ट्र में विधान सभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है और प्रमुख दलों के मुखिया विधान सभा में उम्मीदवारों के नाम को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। ठीक ऐसे व्यस्त समय देश के रक्षा एवं कृषि मंत्री और तीन बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके शरदचंद्र गोविंदराव पवार महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले में अपना नाम आने से सकते में हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से बैंक घोटाले में पवार, उनके भतीजे अजित पवार और जयंत पाटिल समेत 70 लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज करने से महाराष्ट्र की राजनीति में तूफान आ गया है।
शरद पवार पिछले महीने आईएनएक्स घोटाले में कांग्रेस के धाकड़ नेता और पूर्व वित्त एवं रक्षा मंत्री पी चिंदबरम की गिरफ़्तारी से बेहद सतर्क हैं। संभवतः उन्हें भी लग रहा है कि बैंक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने भले ही अभी एफआईआर ही दर्ज किया है।
कल को जांच एजेंसी उनके घर नोटिस चस्पा कर सकती है या पूछताछ के लिए बुला सकती है। जैसा सीबीआई ने गिरफ्तारी से पहले चिदंबरम के साथ किया था। इसीलिए मराठा क्षत्रप ने एहतियात के तौर पर घोषणा कर दी है कि 27 सितंबर को वह खुद प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के पास जाएंगे और जांच में एजेंसी को पूरा सहयोग देंगे।
सबसे अहम बात प्रवर्तन निदेशालय ने बैंक घोटाले में अभी पवार के ख़िलाफ़ केवल एफआईआर ही दर्ज किया है। जांच एजेंसी ने पवार को किसी तरह के स्पष्टीकरण या पूछताछ के लिए अभी तक बुलाया नहीं है। प्रशंसकों और कार्यकर्ताओं ने ‘साहेब’ के रूप में लोकप्रिय पवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के विरोध में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय के मुंबई दफ्तर के सामने प्रदर्शन किया। पवार के गृह नगर बारामती में लोगों ने विरोध स्वरूप बंद रखा। एनसीपी के नेता इसे चुनावी हथकंडा बता रहे हैं।
पवार मंगलवार को दिन भर महाराष्ट्र में विधान सभा के चुनावी हलचल में व्यस्त थे। कांग्रेस के साथ 125-125 सीट पर चुनाव लड़ने का समझौता होने के बाद वह उम्मीदवारों के नाम को अंतिम रूप देने में मशगूल हैं, लेकिन शाम को ईडी की ओर से घोटाले में एफआईआर दर्ज करने की खबर फ्लैश होने के बाद उनकी प्राथमिकताएं अचानक बदल गईं।
पवार ने आनन-फानन में संवाददाता सम्मेलन बुलाया और कहा, “एमएससी बैंक मामले में मेरा नाम दर्ज किया गया है। मैं एजेंसियों की जांच में सहयोग करूंगा। 27 सितंबर को मैं ईडी के सामने पेश होऊंगा। करीब 60 साल के मेरे राजनीतिक जीवन में यह दूसरी बार है, जब मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है।
इससे पहले 1980 में मुझे एक आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किया गया था।” प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवार इमोशनल कार्ड भी खेल गए। उन्होंने छत्रपति शिवाजी से अपनी तुलना की। पवार ने कहा, “महाराष्ट्र के इतिहास ने हमें दिल्ली सल्तनत के आगे झुकना नहीं सिखाया है। मैं छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्शों पर चलता हूं। उन्होंने हमें बचपन से ही सिखाया है कि दिल्ली की ताकत के आगे कभी नहीं झुकना है। उन्होंने मेरे खिलाफ मामला दर्ज किया है, तो मैं स्वागत करता हूं। मैं राज्य भर में इसके खिलाफ जबरदस्त प्रतिक्रिया देख रहा हूं। मुझे संविधान और न्याय पर विश्वास है।”
हालांकि प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई कोर्ट के आदेश पर हो रही है। दरअसल, महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में है। पिछले 22 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस एससी धर्माधिकारी और जस्टिस एसके शिंदे की बेंच ने मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को घोटाले में अजित पवार समेत 70 लोगों के खिलाफ पांच दिन के अंदर केस दर्ज करने का आदेश दिया था।
कोर्ट ने माना था कि घोटाला इन सभी आरोपियों के संज्ञान में था। पवार और जयंत पाटिल समेत बैंक के दूसरे निदेशकों के खिलाफ बैंकिंग एवं आरबीआई अधिनियमों के कथित उल्लंघन का आरोप है। घोटाले में बैंक की 34 शाखाओं के कई अधिकारी भी शामिल हैं। अब उसी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है।
महाराष्ट्र में चुनाव से पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दो प्रमुख नेताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। चुनाव से पहले एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार और उनके भतीजे अजीत पवार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने महाराष्ट्र के चर्चित कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में केस दर्ज किया है। ईडी ने शरद पवार समेत 70 अन्य लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग समेत अन्य मामलों में केस दर्ज किया है। करीब 25 हजार करोड़ के इस घोटाले में पहले मुंबई पुलिस की ओर से भी एक एफआईआर दर्ज की गई थी।
आरोप है कि पवार समेत बैंक के निदेशकों ने कथित तौर पर चीनी मिल को कम दरों पर कर्ज दिया था। चीनी मिलों तथा कताई मिलों को ऋण देने और उनकी वसूली में अनियमितता के कारण बैंक को 2007 से 2011 के बीच करीब 1000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। यह भी आरोप है कि डिफॉल्टर्स की संपत्तियों को सस्ते दाम पर बेच दिया था। अजित पवार उस समय एमएससीबी के निदेशक थे। महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव सोसायटी अधिनियम के तहत इस मामले की नाबार्ड ने जांच की और अपनी रिपोर्ट में पवार, हसन मुश्रीफ, कांग्रेस नेता मधुकर चव्हाण और अन्य लोगों को बैंक घोटाले का दोषी करार दिया था।
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