Mahakumbh 2025: महाकुंभ में सिस्टम की लापरवाही से जूझता 'आम श्रद्धालु'
सरकार एक ओर जहां मेले को सफल और सुरक्षित बताती आ रही है, वहीं मौनी व्यवस्था की अलसुबह प्रशासन के लिए चुनौतियां इंतजार कर रही थी।संगम नोज पर अखाड़ों के अमृत स्नान से ठीक पहले मची भगदड़ ने प्रशासन के लिए मुश्किलें पैदा कर दीं। आखिर क्या कारण रहे, जो प्रशासन भीड़ को संभालने में असफल रहा।
सरकार एक ओर जहां मेले को सफल और सुरक्षित बताती आ रही है, वहीं मौनी व्यवस्था की अलसुबह प्रशासन के लिए चुनौतियां इंतजार कर रही थी।संगम नोज पर अखाड़ों के अमृत स्नान से ठीक पहले मची भगदड़ ने प्रशासन के लिए मुश्किलें पैदा कर दीं। आखिर क्या कारण रहे, जो प्रशासन भीड़ को संभालने में असफल रहा।
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मौनी अमावस्या से 4-5 दिन पहले ही प्रयागराज में महाकुंभ में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी थी। 144 साल के बाद बने विशेष योग में हर कोई पुण्य कमाने के लिए आतुर है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार भी अपनी मेला प्रबंधन की व्यवस्थाओं को लेकर लगातार बेहतर करने के दावे करती रही है। मौनी अमावस्या से एक दिन पहले सरकार ने आंकड़े जारी कर बताया कि अब तक 20 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पावन संगम में डुबकी लगा चुके हैं।
सरकार एक ओर जहां मेले को सफल और सुरक्षित बताती आ रही है, वहीं मौनी व्यवस्था की अलसुबह प्रशासन के लिए चुनौतियां इंतजार कर रही थी।संगम नोज पर अखाड़ों के अमृत स्नान से ठीक पहले मची भगदड़ ने प्रशासन के लिए मुश्किलें पैदा कर दीं। आखिर क्या कारण रहे, जो प्रशासन भीड़ को संभालने में असफल रहा।
बता दें कि मौनी अमावस्या पर अनियंत्रित भीड़ के दबाव से बैरिकेडिंग टूट जाने के बाद संगम नोज पर रात्रि एक से दो बजे के बीच भगदड़ मच गई। इसमें दम घुटने से 30 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और जबकि 60 लोग घायल हो गए।
13 जनवरी को जब से महाकुंभ मेला प्रारंभ हुआ है, तब से एक बात स्पष्ट रूप से नजर आ रही थी कि आम श्रद्धालुओं को मेले में तकलीफों से दो-चार होना पड़ रहा है। विशेष कर पुलिस का व्यवहार श्रद्धालुओं के प्रति सहयोगात्मक नहीं रहा है जिसे कतई उचित नहीं ठहराया जा सकता है। जगह-जगह बैरिकेडिंग, अंतिम समय पर पांटून पुलों को बंद करना या वाहनों को रोकना, पैदल भी निकलने नहीं देना, सड़कों पर जगह -जगह बैरिकेडिंग से एक तरह से श्रद्धालुओं के सब्र की परीक्षा ली जा रही है।
उपजिलाधिकारी की गाड़ी पर हमला
दो दिन पहले भी श्रद्धालुओं ने एक उपजिलाधिकारी की गाड़ी पर हमला बोलकर उसे तोड़ दिया था। हालांकि, इस घटना के बाद भी प्रशासन ने कोई खास सबक नहीं लिया। लोगों को बंद रास्तों के कारण कठिनाइयों का सामना करते रहना पड़ा है। पांटून पुलों के बंद होने के कारण वो अपने स्थान पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। लगातार खबरों के बावजूद प्रशासन ने कोई उचित प्रबंध नहीं किया। श्रद्धालुओं में वीवीआईपी कल्चर को लेकर भी एक तरह का रोष देखा गया, क्योंकि जहां श्रद्धालु कई-कई किलोमीटर पैदल चलकर संगम स्नान के लिए मेले में पहुंच रहे थे, वहीं वीवीआईपी के लिए दिनभर गाड़ियां दौड़ाई जा रही हैं। इससे आम श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
भीड़ को संगम नोज तक जाने से रोक नहीं पाई पुलिस
मौनी अमावस्या से ठीक पहले प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई उपाय करने का दावा किया था, लेकिन जब देर रात भीड़ संगम नोज की ओर बढ़ने लगी तो उसे दूसरे घाटों की तरफ डायवर्ट करने का कोई ठोस प्लान प्रशासन के पास नहीं दिखा। लाखों की भीड़ चंद घंटों में संगम नोज तक पहुंच गई। हालात कुछ ऐसे हुए कि न तो श्रद्धालु आगे जा सकते थे और न पीछे हट सकते थे। वो चारों ओर से घिरे नजर आने लगे थे। दूसरी ओर, अखाड़ों के अमृत स्नान को लेकर पुलिस-प्रशासन ने चारों ओर से बैरिकेटिंग कर रास्तों को रोका था।
मौनी अमावस्या के लिए नहीं बनी कोई भी ठोस कार्ययोजना
सवाल यह है कि जब प्रशासन को पहले से पता था और सरकार की ओर से दावे किए जा रहे थे कि 10 करोड़ श्रद्धालु मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में पावन संगम में डुबकी लगाने आ सकते हैं तो उसे लेकर कोई भी ठोस कार्ययोजना क्यों नहीं बनी? क्यों भीड़ को संगम की ओर आने दिया गया? अखाड़ों के अमृत स्नान से चंद घंटे पहले कैसे श्रद्धालुओं का जमावड़ा संगम नोज के आसपास हो गया? प्रशासन ने भगदड़ के बाद पांटून पुल तो खोला, लेकिन स्थिति बेकाबू हो गई। पांटून पुल पर श्रद्धालु फंस गए।
हालांकि, इतने बड़े मेले और श्रद्धालुओं को इतनी बड़ी संख्या को संभाल पाना आसान नहीं है, क्योंकि सरकार ने पहले ही इतनी भीड़ का अनुमान लगाया था और दावा किया था तो उस स्तर की तैयारियां क्यों नहीं की गईं? क्यों जिस समय भगदड़ की स्थिति बनी, उस समय घाट पर सुरक्षा की व्यवस्था चाक-चौबंद नहीं थी? भगदड़ की घटना का नतीजा यह रहा है कि जो अखाड़े अमृत स्नान के लिए संगम की ओर बढ़ रहे थे, वो लौट गए। अखाड़ों ने प्रशासन की तैयारियों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए सरकार को पहले से अधिक तैयारी करनी होगी। भीड़ नियंत्रण के लिए विशेषज्ञों से सहायता लेनी होगी। नहीं तो विशेष नक्षत्र का योग यूं ही लापरवाही की भेंट चढ़ जाएगा।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।