फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   Maha Shivratri 2026 lord shiva The triangle of life balance

शिव, काम और रति: जीवन-संतुलन का त्रिकोण

सार

Maha Shivratri 2026: शिव‘ महादेव हैं और काम रूप-सौन्दर्य का देवता। दोनों एक ही कुल अर्थात देव-समूह के हैं, लेकिन लोकजीवन में दोनों के प्रतीकार्थ भिन्न हैं। शिव कल्याण के प्रतीक हैं और कामदेव कामनाओं के मनुष्य की विविध प्रकार की अभिलाषाओं के प्रतीक हैं।

विज्ञापन
Maha Shivratri 2026 lord shiva The triangle of life balance
शिव, काम और रति: जीवन-संतुलन का त्रिकोण - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

पौराणिक आख्यानों के अनुसार सौन्दर्य के देवता कामदेव ने भगवान शिव की तपस्या में विघ्न उत्पन्न किया और भगवान शिव ने उसे अपने तृतीय नेत्र की क्रोधाग्नि से भस्म कर दिया, लेकिन जब काम की पत्नी रति ने शिव से प्रार्थना की और अपने पति को पुनः जीवित करने का वरदान मांगा तब शिव ने काम को देह रहित रूप में संसार को प्रभावित करने की शक्ति देकर उसे पुनर्जीवित कर दिया तथा वह मानसिक स्तर पर सक्रिय होकर संसार को संचालित करने लगा। उसके नए नाम मनसिज, मनोज, अनंग आदि प्रचलित हो गए।

विज्ञापन


शिव‘ महादेव हैं और काम रूप-सौन्दर्य का देवता। दोनों एक ही कुल अर्थात देव-समूह के हैं, लेकिन लोकजीवन में दोनों के प्रतीकार्थ भिन्न हैं। शिव कल्याण के प्रतीक हैं और कामदेव कामनाओं के मनुष्य की विविध प्रकार की अभिलाषाओं के प्रतीक हैं। शिव अर्थात कल्याण का स्वरूप स्थिर है। वह परिवर्तित नहीं होता। वह शाश्वत है, सनातन है। इसीलिए शिव उच्च स्तर पर प्रतिष्ठित महादेव हैं और अधिक शक्ति सम्मान्न है। कामदेव का स्वरूप वैविध्यपूर्ण है। वे अपनी सकारात्मकता में रचनात्मक हैं किन्तु नकारात्मकता में भयंकर विध्वंसात्मक भी हैं। अतः वह देवता होकर भी महादेव के समकक्ष नहीं हैं। 
विज्ञापन


शिव द्वारा काम-दहन की कथा कल्याण के पथ पर कामनाओं के नियंत्रण का संदेश है। अच्छी-बुरी अनंत कामनाओं को साथ लेकर मनुष्य अपना कल्याण नहीं कर सकता, साथ ही वह समस्त कामनाओं को त्यागकर भी जीवित नहीं रह सकता। जीवन में सुख शांति और आनंद की प्राप्ति के लिए अच्छी कामनाओं का होना भी आवश्यक है। कामनाएं ही मनुष्य को कर्मपथ पर प्रेरित करती हैं। इसीलिए शिव एक बार काम को पूर्णतया समाप्त करके उसे पुनः जीवन देते हैं। अभिप्राय यह कि मानव-मन में निहित समस्त दुरभिलाषाओं को समाप्त कर संसार के कल्याण के लिए आवश्यक अभिलाषाओं को पुनः प्रोत्साहित करना मानव जीवन की महत्त्वपूर्ण आवश्यकता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

 

Maha Shivratri 2026 lord shiva The triangle of life balance
shiva - फोटो : Adobe stock

कामदेव सौन्दर्य के देवता हैं। सौन्दर्य सदा आकर्षित करता है तथा मन में इच्छाओं को जन्म देता है। वे इच्छाएं जब मानवीय गरिमा, सामाजिक मर्यादा और न्यायसंगत होती हैं तब शिव की कल्याणरुपिणी शक्ति बनती हैं, लेकिन जब मानव मूल्यों के विरुद्ध निजी दुरभिलाषाओं और स्वार्थों के लिए सक्रिय होती हैं तब उनका नाश करना अथवा संयम के बल पर उन्हें नियन्त्रित करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। काम के इस अशिव रूप का नाश किए बिना शिव अर्थात कल्याण प्राप्ति की साधना पूर्ण नहीं हो सकती।

कामदेव को भस्म करने वाला शिव का तृतीय नेत्र ज्ञान और वैराग्य का प्रतीक है। जब तक तीसरा नेत्र नहीं खुलता तब तक कामनाएं भस्म नहीं होतीं। ज्ञान और वैराग्य का तीसरा नेत्र जब खुलता है तब मनुष्य के मन में संयम, संतोष, त्याग, परोपकार, अपरिग्रह जैसे मूल्य पुष्ट होते हैं और लोभ, मोह, अभिमान, स्वार्थपरता, हिंसा, व्यभिचार जैसी दुर्वृत्तियां समाप्त हो जाती हैं और कल्याण की प्राप्ति होती है।  

भगवान शिव की रोषानल काम की देह को भस्म करती है। देह भौतिकता की प्रतीक है और सांसारिक प्रलोभनों की ओर संकेत करती है। कल्याण का विचार वही क्रियान्वित कर सकता है जो भौतिक सुख-सुविधाओं और लौकिक आकर्षणों से परे है। कामदेव का देहनाश जर-जोरू और जमीन के लिए होने वाले संघर्ष को विराम देने का अर्थ व्यक्त करता है, क्योंकि काम के इस भौतिक स्वरूप का नाश हुए बिना शिव की तपस्या अर्थात कल्याण की प्राप्ति असंभव है।

 काम के अनेक अर्थ हैं। काम को स्त्री-पुरुष के शारीरिक संबंध के अतिरिक्त धन, पद, यश, सम्मान आदि कामनाओं के अर्थ में भी ग्रहण किया जाता है। काम का स्वरूप अत्यंत सुन्दर है अर्थात इन समस्त कामनाओं की पूर्ति के लिए मनुष्य यदि दूसरों के अधिकारों का अपहरण, शोषण-उत्पीड़न न करे, माननीय गरिमा और सामाजिक मर्यादाओं के अनुरुप कार्य करे तो इनकी सकारात्मक सक्रियता जीवन में सौदर्य का विधान रचती है। अतः श्रेष्ठ इच्छाओं का मन में जीवित रहना जीवन के लिए आवश्यक है। इसीलिए ज्ञान के आवेश में शिव अपने तृतीय नेत्र से पहले तो कामदेव को भस्म कर देते हैं- अर्थात मन में पल रही अच्छी-बुरी समस्त इच्छाओं को पूर्ण रूप से समाप्त कर देते हैं, लेकिन बाद में सांसारिक सुन्दरता की प्रतीक रति के विलाप को सुनकर लौकिक जीवन के सुख विधान के लिए सद अभिलाषाओं के रुप में कामदेव को पुनः नवजीवन दे देते हैं। 
 

Maha Shivratri 2026 lord shiva The triangle of life balance
शिव, काम और रति: जीवन-संतुलन का त्रिकोण - फोटो : Adobe Stock

कामदेव की पत्नी रति सृष्टि की सुन्दरता की प्रतीक है। सुन्दरता की सार्थकता उसके विवेक सम्मत उपयोग में है, उपयोग की कामना में है। इसलिए काम का पुनर्जीवन आवश्यक है। रति और कामदेव-सुन्दरता और सुन्दरता के प्रति आकर्षण से उत्पन्न कामना-दोनों सांसारिक जीवन रथ के दो चक्र हैं। उनके अभाव में जीवन असंभव है और जीवन के अभाव में कल्याण अर्थात शिव का भी कोई अर्थ नहीं रह जाता। मनुष्य रहित सृष्टि का सौन्दर्य किस काम का ? मनुष्य के अस्तित्व में ही रति-कामदेव और शिव-तीनों की सार्थकता है। तीनों की व्याप्ति से ही जीवन है, समाज है।  

आज के समय में रति, काम और शिव के अर्थ बदल गए हैं। मनुष्य ने सहज प्राकृतिक जीवन, जीवन-मूल्यों और न्यूनतम आवश्यकताओं से मुख मोडकर कृत्रिम उपकरणों के अधिकतम उपयोग से जीवन की सुन्दरता ‘रति‘ को क्षतिग्रस्त किया है। जीवन-मूल्यों की उपेक्षा करके ‘कामदेव‘ का रूप विकृत कर दिया है और शिव की कल्पना अधिकतम भौतिक सुविधाओं में करके जीवन को संकटापन्न बनाया है। शिव का तृतीय नेत्र मोतियाविंद से ग्रस्त है। ज्ञान के आवरण के अज्ञान का पोषण होने से काम-दहन की क्रिया सम्पन्न नहीं हो पा रही है और वैश्विक स्तर पर काम का आवेग शिव की कल्याण-साधना में बाधक बना हुआ है। 

भगवान शिव के तृतीय नेत्र ज्ञान के वास्तविक स्वरूप को समझे बिना दुरभिलाषाओं का काम दहन नहीं हो सकता और सद्भिलाषाओं के अनंग को पुनर्जीवन मिले बिना विधवा रति का निरर्थक सौन्दर्य जीवन में आकर्षण उत्पन्न नहीं कर सकता। व्यक्ति के मन में शान्ति और सामाजिक जीवन को अपराध मुक्त करने के लिए ज्ञान और वैराग्य के तृतीय नेत्र का खुलना आवश्यक है। शिव, कामदेव और रति के इस निहितार्थ पर विचार करके ही आधुनिक जीवन को सुख-समृद्धि के पथ पर अग्रसर किया जा सकता है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
                                                                

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed