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Madhya pradesh assembly elections 2018: वे 3 लोग, 3 मुद्दे और अकेले शिवराज

Sarang Upadhyayसारंग उपाध्याय Updated Wed, 12 Dec 2018 04:41 AM IST
मध्य प्रदेश में चुनावी परिणाम के रुझान बहुत कुछ ऐसा कहते हैं जो मौजूदा शिवराज सिंह सरकार के लिए अप्रत्याशित है
मध्य प्रदेश में चुनावी परिणाम के रुझान बहुत कुछ ऐसा कहते हैं जो मौजूदा शिवराज सिंह सरकार के लिए अप्रत्याशित है - फोटो : File Photo
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मध्य प्रदेश में चुनावी परिणाम के रुझान बहुत कुछ ऐसा कहते हैं जो मौजूदा शिवराज सिंह सरकार के लिए अप्रत्याशित है और बीजेपी के लिए सेफ जोन कहे जाने वाले एमपी के लिए भी चौंकाने वाले हैं। 15 साल से मध्य भारत की सत्ता पर काबिज भाजपा के लिए ये चुनाव परिणाम इतने पेंचिदा और भरोसे से हटकर होने वाले होंगे ऐसा किसी ने सोचा नहीं था। हालांकि 7 दिसंबर को आए एग्जिट पोल पर भरोसा करें तो मप्र के ये चुनावी परिणाम कुछ ऐसे ही रहने वाले थे और ऐसा सीन तकरीबन हर चुनावी विश्लेषक की नजरों से दिखाई दे रहा था। 
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बहरहाल, राज्य के चुनावी परिणाम की तस्वीर अब भी साफ नहीं है और कांटे का मुकाबला जारी है, लेकिन चुनावी रण में बीजेपी के पिछड़ जाने और कांग्रेस के बढ़त के कारणों पर नजर दौड़ाएं तो ऐसे तीन मुद्दे सामने आते हैं जिन्होंने बीजेपी की सरकार को सत्ता से विदाई के संकेत पहले दे दिए थे। ये मुद्दे रहे मंदसौर किसान आंदोलन जिसमें 5 किसानों की मौत की दुखदार्इ घटना हुई, दूसरा नोटबंदी और तीसरा जीएसटी।

3 मुद्दे किसान आंदोलन, नोटबंदी और जीएसटी
कहने का अर्थ है कि मप्र की सियासत में शिवराज सिंह चौहान त्रयी बनाम त्रयी के एक ऐसे भंवर में पड़ते दिखार्इ दिए, जहां से निकलना उनके लिए आसान नहीं रहा। यही वे 3 मुद्दे थे और इन्हें उठाने वाले 3  कांग्रेस के लोग थे, जिन्होंने एक तरह से शिवराज सिंह को अकेला कर दिया। 

दरअसल, प्रदेश में त्रयी बनाम त्रयी का ये नजारा मप्र के चुनावी और सियासी पटल पर साफ दिखा। बात यदि किसान आंदोलन की ही करें तो राज्य की शिवराज सिंह सरकार के लिए मंदसौर किसान आंदोलन सबसे बड़ा सिरदर्द साबित हुआ। बीते साल यानी की जून 2017 तकरीबन 20 सूत्रीय मांगों के साथ मंदसौर में सड़क पर आंदोलन कर रहे 5 किसानों की पुलिस फायरिंग में मौत की घटना ने शिवराज सिंह सरकार की सत्ता में विदाई की पहली लकीर खींचीं।

हालांकि मामले की गंभीरता को देखते हुए शिवराज सिंह चौहान ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की, लेकिन उन्हें देर हो चुकी थी क्योंकि यह यह घटना पूरे देश की ब्रेकिंग खबर बन गई और सबसे बड़ा सियासी घटनाक्रम भी।

पहले से ही व्यापमं घोटाले के आरोपों में घिरी शिवराज सरकार के लिए मंदसौर किसान गोलीकांड किसी बड़े झटके से कम नहीं था। शिवराज की बेदाग छवि पर दाग की छाया देने वाले डंपर घोटाले के बाद व्यापमं और अचानक मंदसौर का घटनाक्रम बेहद चौंकाने वाला साबित हुआ। इस मामले की रही-सही कमी विपक्षी दलों और मीडिया ने पूरी कर दी। सोशल मीडिया से लेकर नैशनल टीवी का प्राइम मुद्दा बन चुका किसान गोलीकांड उन्हें एक तरह से किसान विरोधी ही बना गया। 
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