मध्य प्रदेशः अब भाजपा ने आदिवासी चेहरे से चला दांव, राज्यसभा के लिए कांग्रेस किसे भेजेगी?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राज्य सभा के बहाने मप्र कांग्रेस के घमासान को कमलनाथ सरकार गिराने के इंतजाम में ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपाई बनाकर उम्मीदवार घोषित करने के दूसरे दिन भाजपा दूसरा बड़ा दांव खेला है। दूसरी सीट के लिए 45 साल के डॉ. सुमेर सोलंकी को प्रत्याशी बनाया गया है।
वे निमाड़ अंचल के आदिवासी बारेला हैं, जिसकी आबादी आदिवासियों की 65 फीसदी है। कांग्रेस ने 2018 के विधानसभा चुनाव में जय आदिवासी संगठन के डॉ. हीरालाल अलावा को अपना टिकट देकर न केवल विधायक बनवाया बल्कि भाजपा के आदिवासी आधार में समूचे मालवा निमाड़ में विचलन कर सत्ता हासिल की।
हालांकि मंत्री न बनाने से डॉ. अलावा और जयस के अलावा अन्य कई आदिवासी विधायक सरकार से नाराज बने हुए हैं।
झा लेकर पवैया तक कई दावेदार ताकते रह गए
भाजपा के प्रदेश संवाद प्रमुख से प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तथा राज्यसभा सदस्य तक बन चुके प्रभात झा फिर राज्यसभा जाने को लेकर कुछ माह पहले तक मुतमईन थे, लेकिन पार्टी में कई दावेदार उभर आए थे। सिधिया के आने से निराश हुए और अब दूसरी सीट भी भाजपा को मिलने की उम्मीदों के बीच युवा आदिवासी को मौका मिलने से वे निराश हुए होंगे।
सिंधिया के खिलाफ झा की तरह मुखर रहे पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया भी संघ के वरदहस्त से राज्यसभा जाने के प्रयास में माने जा रहे थे। सिंधिया से गुना में चुनावी मात खा चुके पवैया की उम्मीद भी सिंधिया के भाजपाई होते ही खत्म हो चुकी थी। तीनों ही ग्वालियर के हैं।
हालांकि सिंधिया के भाजपा प्रवेश से लेकर कमलनाथ सरकार को गिराने की भाजपाई पटकथा के असल सूत्रधार पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक दल के मुख्य सचेतक डॉ.नरोत्तम मिश्रा भी गुना में बतौर भाजपा प्रत्याशी सिधिया से चुनावी मात खा चुके हैं और वे भी ग्वालियर के ही हैं। मिश्रा सिंधिया के आने से प्रसन्न दिख रहे हैं लेकिन झा को अपनी अप्रसन्नता की चर्चा को नकारने स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा।
क्या तीसरी सीट पर भी दांव लगाएगी भाजपा
भाजपा को पहले एक ही सीट मिलने के आसार थे, लेकिन नए समीकरण में ये दो हो गई। अब सवाल ये है कि भाजपा उम्मीद न होते हुए भी तीसरी सीट पर दांव लगाएगी? जैसा वो एक बार तत्कालीन प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद गोटिया पर लगा चुकी है। अगर हां तो इस बार गोटिया की भूमिका में कौन हो सकता है? सरकार बचाने में उलझी सरकार राज्यसभा चुनाव में किसे उतारेगी?
सिंधिया के बजाय खुद पुनः राज्यसभा जाने की जुगत में लगे रहे दिग्विजय सिंह अब सरकार गिरने की प्रबल आशंका के जिम्मेदार ठहराए जा रहे हैं? क्या अब कांग्रेस उन्हें मौका देगी भी? यह सवाल काग्रेस में भी पूछा जा रहा है। फिर कौन होगा कांग्रेस उम्मीदवार? पार्टी के पास कल सुबह तक का वक्त है। फिर सवाल भी है कि क्या अब भी कांग्रेस दो उम्मीदवार उतारेगी या एक ही? आज देर रात और कल सुबह खुलासा होगा। कल जब भूतपूर्व कांग्रेसी नवागत भाजपाई सिंधिया नामा निर्देेशन परचा भरेंगे तो कांग्रेस से कौन भरेगा और जलसों मेंं कितना फर्क होगा। यह देखने वाली बात होगी।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।