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हनुमान जयंती 2020: कलिकाल के देवता हैं राम भक्त हनुमान

Wed, 08 Apr 2020 10:47 AM IST
गौतम चौधरी गौतम चौधरी
गौतम चौधरी Published by: गौतम चौधरी Updated Wed, 08 Apr 2020 10:47 AM IST
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Hanuman jayanti 2020 Lord Hanuman is the god of Kalikal
भगवान शंकर के ग्यारहवें अवतार होने के कारण हनुमान शंकर सुवन कहलाए। - फोटो : amar ujala

तुलसी दास जी द्वारा रचित हनुमान चालीसा मानों धर्म का पर्याय बन गया है। कुछ नहीं तो हर हिन्दू आस्तिक हनुमान चालीसा जरूर पढ़ता और अपने घर में रखता है। कलियुग में हनुमान की महत्ता इतनी बढ़ गई है कि हर चौक-चौराहों पर उनका मंदिर मिल जाएगा। यथा कलियुग में राम भक्त हनुमान ही एक ऐसे देवता हैं जिनकी स्वीकार्यता सर्वत्र है, इसीलिए तो तुलसी बाबा ने लिखा 'आपन तेज सम्हारे आपे तीनो लोक हांफते कापे।' उन्होंने यह भी लिखा 'भूत-पिशाच निकट नहीं आवे, महावीर जब नाम सुनावे।' 

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भगवान शंकर के द्वादषा अवतार के रूप में प्रसिद्ध शंकर सुमन केसरी नंदन दुनिया के ऐसे देवता हैं, जो सभी पर समान कृपा रखते हैं। अति चतुर हैं और बलशाली भी हैं। यदि रामायण में ही देखें तो उन्होंने दो अति कमजोर व्यक्ति को अपने बुद्धि और विवेक से राजा बना दिया।
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'तुम उपकार सुग्रीवहि किन्हां, राम मिलाय राजपद दीन्हा।
तुम्हरो मंत्र विभीषण माना लंकेश्वर भय सबजग जाना।'

यह दोनों कभी स्वप्न में भी नहीं सोचा होगा कि वह राजा बनेगा लेकिन हनुमान जी की कृपा से दोनों न केवल राजा बनें अपितु विष्व प्रसिद्ध भी हुए। 
 

Hanuman jayanti 2020 Lord Hanuman is the god of Kalikal
भगवान शंकर के ग्यारहवें अवतार होने के कारण हनुमान शंकर सुवन कहलाए। - फोटो : अमर उजाला

हनुमान ने किशकिंधा का राजा तो सुग्रीव को बनाया, लेकिन चतुराई से वहां का युवराज वानरराज बालि के बेटे अंगद को बना दिया। इसे राजनीतिक सूझ-बूझ ही समझना चाहिए। इससे किशकिंधा अजेय हो गया और खुद वे लंका युद्ध के बाद अवध चले आए। अवध में वे किशकिंधा के राजदूत की तरह रहने लगे। इसे राजनीतिक सूझ-बूझ ही समझना चाहिए। इसलिए यदि कोई समझदारी से पवनपुत्र के चरित्र का अनुसरण करे तो वह राजनीतिक दांव खेलने में भी माहिर हो जाएगा।

खैर, हमलोग तो हनुमान को परम ताकतवर देवता के रूप में ही पूजते हैं, लेकिन उनकी शैली एक कुषल राजनीतिज्ञ से कम नहीं थी। गोस्वामी तुलसीदास जी ने राम चरित्र मानस की रचना से पूर्व हनुमान चालीसा की रचना कर संसार को हनुमान के अद्भुत अवतार और उनकी पावन गाथा के रूप में एक ऐसा ग्रंथ दिया जिसकी महिमा हजारों वर्षो से विद्यमान है और अनंतकाल तक रहेगा।

हनुमान जी ने अपनी अद्भुत वीरता, अनवरत सेवा, आदर्श चरित्र, अविचल भक्ति इत्यादि सद्गुणों का जो मिश्रण संसार को प्रदान किया एवं उसको प्रतिष्ठित किया, उसकी कीर्ति त्रेता-द्वापर से लेकर कलियुग तक विद्यमान है।

चैत्र शक्ल पूर्णिमा को भारत की पावन धरा पर अवतरित अंजनी-पुत्र, पवन-सुत, शंंकर-सुमन, केषरी-नंदन, राम-दूत इत्यादि अनेक नामों से सुशोभित श्री हनुमान जी हर लोक व हर काल में चिरंजीवी हैं। भगवान शंकर के ग्यारहवें अवतार होने के कारण हनुमान शंकर सुवन कहलाए। वानर राज केसरी के पुत्र होने के कारण हनुमान केसरी-नंदन नाम से विख्यात हुए हैं।

एक प्रचलित कथा के अनुसार पुन्जिकस्थला नाम की अप्सरा श्राप भ्रष्ट होकर कामरूपी वानरी के रूप में अवतरित हुई थी। उसके साथ वानर राज केसरी की शादी हुई। एक दिन सुयोग से अंजना माई मनुष्य रूप में दिव्यविदिव्य वस्त्राभूषणों से अलंकृत हो पर्वत पर विचरण कर रही थी। इसी दौरान वायुदेव ने उन्हें आलिंगन किया। 

अंजना ने कहा, 'कौन मुझ पतिव्रता का स्पर्श कर अपने सर्वनाश को आमंत्रित कर पतन के घोर गर्त में गिरने को लालायित हो रहा है?' इसपर वायुदेव बोले, 'देवी अनंत कोटि ब्रह्माण्ड नायक परात्पर ब्रह्म, मानव स्वरूप धारण कर रावणादि असुरों का विनाश करने, पृथ्वी पर अवतरित हो रहे हैं। मैं उनकी सेवा में तुम्हारे पुत्र के रूप में आना चाहता हूं, कृपया क्षमा करें।' इस प्रकार हनुमान पवन सुत एवं अंजनी पुत्र के नाम से प्रसिद्ध हुए।
 

Hanuman jayanti 2020 Lord Hanuman is the god of Kalikal
श्री हनुमान जी महाराज हर सद्बु्द्धि मनुष्य का सहयोग करते हैं। - फोटो : फाइल फोटो

'न भूतों न भविष्यते'- तीनों लोकों में हनुमान जैसा सर्व ज्ञानी-अतुलित बल का धाम-प्रभु का अनन्य सेवक-राक्षसी प्रवृत्ति का नाश करने वाले संकटों का मोचन करने वाले भगवान श्री हनुमान जी महाराज हर सद्बु्द्धि मनुष्य का सहयोग करते हैं। उन्होंने तुलसी दास जी का भी सहयोग किया और उनके सहयोग से ही भगवान श्री राम के चरित्र की व्याख्या करने में वे सफल हो सके। रामचरित्र मानस की रचना से पूर्व गोस्वामी तुलसी दास जी ने हनुमान-चालीसा में लिखा है-

'संकट कटे मिटे सब पीरा- जो सुमरहिं अनुमत बल बीरा'

ऐसी अद्भुत शक्ति संपन्न श्री हनुमान जी महाराज के लिए शास्त्रों में त्रिकाल चिंतन के लिए सुन्दर निर्देश दिया गया है।

सर्वदा वै त्रिकाल चं पठनियमिंद स्तवम्।
सर्वान कामानवाप्नोति नात्र कार्या विचारणा।

प्रातः काल के लिए: -
प्रातः स्मरामि हनुमन्तमानन्तवीर्य श्रीरामचन्द्र चरणाम्बुजजचंचरीकम्।
लंकापुरी दहनन्दित देववृन्दं स्वार्थसिद्धसदनं प्रथित प्रभावम्।।

जो रामचंद्र जी के चरण-कमलों के भ्रमर हैं, जिन्होंने लंका पुरी के दग्ध करके देवगण को आनन्द प्रदान किया है, जो सम्पूर्ण अर्थ सिद्धियों के आगार और लोकविश्रुत प्रभावशाली हैं, उन अनंत पराक्रमशाली हनुमान जी का मैं प्रातः काल स्मरण करता हूं।

मध्य माल यानी दोपहर के लिए -

मध्यं नमामि वृजिनार्णवतारणैकाधारं शरण्यमुदतानुपमप्रभवम्। सीताधिसिन्धुपरिषोषण कर्मदक्षं वन्दारूकल्पतरु मव्ययकामांजनेयम्।।

जो भव सागर से उद्धार करने के एकमात्र साधन और शरणागत के पालक हैं, जिनका अनुपम प्रभाव लोक विख्यात है, जो सीता जी की मानसिक पीड़ा रूपी सिन्धु के शोषण कार्य में परम प्रवीण और वन्दना करने वालों के लिए कल्पवृक्ष हैं, उन अविनाशी अंजनानन्दन हनुमान जी को मैं मध्यान काल में प्रणाम करता हूं।

संध्या काल के लिए -

सायं भजामि शरणोपसृताखिलार्ति पुंजप्रणाषनविधौ प्रथितप्रतापम्।
अक्षान्तकं सकल राक्षसवंषधूमकेतुं प्रमोदितविदेहसुतं दयालुम्।।

शरणागतों के सम्पूर्ण दुःख समूह का विनाश करने में जिनका प्रताप लोक प्रसिद्ध है, जो अक्षय कुमार का वध करने वाले और समस्त राक्षस वंश के लिए धूमकेतु हैं एवं जिन्होंने विदेहनन्दिनी सीता जी को आनन्द प्रदान किया है, उन दयालु हनुमान जी का मैं सायंकाल भजन करता हूं।

तुलसी दास जी लिखते हैं: -

अतुलित बलधामं हैमषैलाभ्देहं-दनुजवनकृषानुं ज्ञानिनामग्रग्यम्।
सकल गुण निधानं वानरामधिषं-रघुपति प्रिय भक्तं वातजातं नमामि।।

जो अतुलित बलों के धाम, सोने के पर्वत यानी सुमेरु के समान कान्तियुक्त शरीर वाले, दैत्य रूपी वन को ध्वंस करने के लिए अग्नि रूप, ज्ञानियों में अग्रगण्य, सम्पूर्ण गुणों के निधान, वानरों के स्वामी और श्री रघुनाथ जी के प्रिय भक्त हैं, उन पवन पुत्र हनुमान जी को मैं प्रणाम करता हूं। भगवान श्री राम के भक्त हनुमान जी महाराज वैद्य भी थे। इसीलिए भगवान श्री राम ने उन्हें जड़ी-बूटी लाने हिमालय भेजा था। उसकी भी अलग कथा है। फिलहाल भगवान के भक्त श्री हनुमान जी महाराज के जन्म दिन पर हम कोरोना नामक महामारी को जड़-मूल से मिटाने का प्रण लें। 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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