विज्ञापन
विज्ञापन

उत्तराखंड का चुनावी हालः क्या नतीजे तय करेंगे त्रिवेन्द्र रावत का भविष्य?

Jay singh Rawatजयसिंह रावत Updated Mon, 29 Apr 2019 04:57 PM IST
क्या उत्तराखंड में भाजपा दर्ज करेगी जीत?
क्या उत्तराखंड में भाजपा दर्ज करेगी जीत? - फोटो : अमर उजाला
ख़बर सुनें
भाजपा ने लोकसभा चुनाव में भले ही उत्तराखण्ड की पांचों सीटों पर ठीकठाक प्रत्याशी मैदान में उतारे थे, लेकिन वास्तव में हर एक सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशियों का मुकाबला भाजपा प्रत्याशियों से न होकर सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से था। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने भी अपनी उपलब्धियों और अपने नाम से नहीं बल्कि सीधे मोदी के नाम पर जनता से वोट मांगे, इसलिए राज्य में अगर एक सीट भी भाजपा हार गई तो उसे सीधे मोदी की हार माना जाएगा जिसका खामियाजा मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को भुगतना पड़ सकता है। 
विज्ञापन
क्या है उत्तराखंड में भाजपा की स्थिति? 
भाजपा पूरे देश में एक-एक सीट के लिए मेहनत कर रही है, ऐसे उत्तराखण्ड में भाजपा की एक भी सीट गई तो उसका असर त्रिवेन्द्र रावत की कुर्सी के स्थायित्व पर पड़ सकता है। उत्तराखण्ड की सभी 5 सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच ही मुकाबला है और रुझान भाजपा के पक्ष में नजर आ रहा है। लेकिन कांग्रेस ने कमजोर माने जाने वाले कुछ भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ हरीश रावत जैसे दिग्गज नेता उतार कर अंधेरे में उजाले की रोशनी की उम्मीद पाली हुई है। ऊपर से राज्य में त्रिवेन्द्र सरकार के खिलाफ एण्टी इन्कम्बेंसी और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा डबल इंजन का वायदा न निभा पाने की बात मोदी लहर के बावजूद कांग्रेस की उम्मीदों को जीवित रखे हुए है। 

क्या है कांग्रेस की स्थिति? 
कांग्रेस प्रदेश की 5 सीटों में से भी सबसे अधिक आशान्वित नैनीताल-उधमसिंहनगर सीट के प्रति नजर आ रही है। इस उम्मीद का कारण वहां के कांग्रेस प्रत्याशी हरीश रावत का भाजपा प्रत्याशी अजय भट्ट की तुलना में भारी भरकम व्यक्तित्व, लंबा राजनीतिक कैरियर एवं उनके प्रति सहानुभूति माना जा रहा है।

कांग्रेस अपने पक्ष में जातीय समीकरण को मानने के साथ ही अल्पसंख्यक मतों के प्रति भी आश्वस्त नजर आ रही है। अजय भट्ट गत् विधानसभा चुनाव में जबरदस्त मोदी लहर के बावजूद रानीखेत विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार गए थे और 2012 के विधानसभा चुनाव में अपने प्रतिद्वन्दी करण महरा से 80 से कम वोटों के अंतर से जीत पाए थे। उससे पहले 2007 में भी करण महरा ने अजय भट्ट को हराया था। हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव में हरीश रावत भी हरिद्वार ग्रामीण एवं किच्छा सीटों से मुख्यमंत्री रहते हुए हार गए थे, लेकिन हार के बावजूद वह निरन्तर सक्रिय रहे और अपने पक्ष में सहानुभूति बटोरने में काफी हद तक सफल माने जाते रहे हैं। 

हरीश रावत समर्थक चुनाव अभियान के दौरान कांग्रेस सरकार बनने पर रावत की कैबिनेट में सीट पक्की होने की उम्मीद जगाने के साथ ही नैनीताल के मतदाताओं को नारायण दत्त तिवारी की 1991 की हार की याद दिलाने से नहीं चूके। उस समय तिवारी नैनीताल से चुनाव नहीं हारते तो उनका नरसिम्हा राव की जगह प्रधानमंत्री बनना पक्का था।

हरीश रावत समर्थक नैनीताल-उधमसिंहनगर के मतदाताओं को भुवनचन्द्र खण्डूड़ी, भगतसिंह कोश्यारी और रमेश पोखरियाल निशंक की याद भी दिलाते रहे हैं, जो कि पूर्व मुख्यमंत्री होते हुए भी मोदी कैबिनेट में जगह नहीं पा सके। इस संसदीय सीट पर अब तक हुए 15 लोकसभा चुनावों में से 10 में कांग्रेस विजयी रही। इस बार वहां हरीश रावत को अपने ही दल के लोगों और खास कर प्रतिपक्ष की नेता इंदिरा हृदयेश की नाराजगी का डर भी सता रहा था।

टिहरी संसदीय सीट और कांग्रेस 
कांग्रेस रणनीतिकार टिहरी संसदीय सीट पर भी अपनी स्थिति मजबूत मान रहे हैं। इसके पीछे कांग्रेस की खुशफहमी यह है कि उस सीट पर भाजपा प्रत्याशी माला राज्यलक्ष्मी शाह की संसद और निर्वाचन क्षेत्र में सक्रियता नगण्य रही है। उन्होंने लोकसभा में अपने पांच साल के कार्यकाल में केवल 33 सवाल पूछे थे। उनके खिलाफ टिहरी रियासत की राजशाही के दौरान तिलाड़ी जैसे काण्डों का प्रचार भी उनके विरोधी चुनाव अभियान में करते रहे हैं। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी प्रीतम सिंह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष होने के साथ ही वह चकराता विधानसभा सीट पर निरन्तर जीत हासिल करते रहे हैं। उन्हें इस संसदीय क्षेत्र की 14 में से अपने गृह क्षेत्र चकराता और विकासनगर में सर्वाधिक मत मिलने की उम्मीद तो है ही साथ ही सहसपुर से भी भारी समर्थन मिलने की उम्मीद है। 
विज्ञापन
आगे पढ़ें

विज्ञापन

Recommended

बायोमेडिकल एवं लाइफ साइंस में लेना है एडमिशन, ये है सबसे नामी संस्था
Dolphin PG

बायोमेडिकल एवं लाइफ साइंस में लेना है एडमिशन, ये है सबसे नामी संस्था

सुखी वैवाहिक जीवन के लिए इस जन्माष्टमी मथुरा में कराएं राधा-कृष्ण युगल पूजा, 24 अगस्त को
Astrology Services

सुखी वैवाहिक जीवन के लिए इस जन्माष्टमी मथुरा में कराएं राधा-कृष्ण युगल पूजा, 24 अगस्त को

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Most Read

Blog

भाजपा में जाने की चर्चाओं को लेकर आखिर क्यों चुप हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया?

मप्र की सियासत में इस समय ज्योतिरादित्य सिंधिया चर्चा का केंद्रीय विषय बने हुए हैं क्योंकि उन्हें लेकर पिछले एक सप्ताह से सोशल मीडिया पर खबरें वायरल हो रही हैं

21 अगस्त 2019

विज्ञापन

कई घंटे के ड्रामें के बाद सीबीआई ने पी चिदंबरम को गिरफ्तार कर लिया

आखिरकार सीबीआई ने पी चिदंबरम को गिरफ्तार कर ही लिया। देखिए ये रिपोर्ट

21 अगस्त 2019

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree