General Election 2024: वादों नहीं, गारंटियों पर लड़ा जाएगा पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव
चुनावी नतीजों से साबित हो गया कि केंद्र सरकार के दावों और वादों के मुकाबले ममता के दावे ज्यादा कामयाब रहे थे। इसलिए इस बार भी अपनी चुनावी रणनीति के तहत पार्टी के नेताओं ने जहां एक ओर ममता की गारंटी की मिसाल के तौर पर कन्याश्री और गृहलक्ष्मी जैसी योजनाओं के प्रचार की योजना बनी है तो दूसरी ओर चुनाव अभियान के दौरान मोदी की गारंटी को खोखला बताते हुए पार्टी के नेता उसकी कथित पोल भी खोलते नजर आएंगे।
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पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के तमाम नेताओं ने अपने चुनाव अभियान में मोदी की गारंटी को प्रमुख मुद्दा बनाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राज्य की 42 में से 35 सीटें जीतने का लक्ष्य तय कर चुके हैं। अब सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने इसकी काट के तौर पर ममता की गारंटी को अपना प्रमुख हथियार बनाने का फैसला किया है।
पार्टी ने साल 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता के अकेले अपने बूते भाजपा को कड़ी टक्कर देने की मिसाल सामने रखते हुए इस अभियान की रणनीति बनाई है। उस चुनाव में स्टार प्रचारक रहीं ममता ने अपने अभियान में खासकर महिलाओं और युवतियों के लिए सरकार की ओर से शुरू की गई तमाम योजनाओं के बारे में बढ़-चढ़ कर प्रचार किया था।
चुनावी नतीजों से साबित हो गया कि केंद्र सरकार के दावों और वादों के मुकाबले ममता के दावे ज्यादा कामयाब रहे थे। इसलिए इस बार भी अपनी चुनावी रणनीति के तहत पार्टी के नेताओं ने जहां एक ओर ममता की गारंटी की मिसाल के तौर पर कन्याश्री और गृहलक्ष्मी जैसी योजनाओं के प्रचार की योजना बनी है तो दूसरी ओर चुनाव अभियान के दौरान मोदी की गारंटी को खोखला बताते हुए पार्टी के नेता उसकी कथित पोल भी खोलते नजर आएंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल के महीनों में अपनी तमाम जनसभा में केंद्र की विकास योजनाओं को अपने नाम के साथ जोड़ते हुए मोदी की गारंटी के दावे कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल में अपनी एक जनसभा में उन्होंने कहा था कि मोदी की सबसे बड़ी गारंटी है गारंटी पूरी होने की गारंटी।
तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि पार्टी ने मोदी के इसी जुमले पर चौतरफा हमला बोलने की रणनीति अपनाई है। इसी के तहत पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने 10 मार्च की ब्रिगेड रैली में जुटी लाखों की भीड़ के सामने सवाल उठाया था कि वो किसकी गारंटी पर भरोसा करते हैं मोदी की या दीदी की?
तृणमूल कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि अप्रैल के पहले सप्ताह से पार्टी आक्रामक चुनाव अभियान शुरू करेगी। ममता बनर्जी के सिर पर चोट लगने की वजह से कुछ कार्यक्रमों को आगे जरूर बढ़ाना पड़ा है। लेकिन चुनाव अभियान के दौरान बीते 13 वर्षों के दौरान ममता बनर्जी सरकार की कामयाब योजनाओं के पूरा होने को ममता की गारंटी के तौर पर पेश किया जाएगा।
पार्टी का मानना है कि यह चुनाव भी लोकसभा का हो, इसके प्रचार में भी वही रणनीति अपनाई जाएगी जो साल 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान अपनाई गई थी। उस चुनाव में पार्टी का नारा खेला होबे काफी हिट रहा था और लोगों की जुबान पर चढ़ गया था। इस नारे को लेकर कई गीत पर लिखे और गाए गए थे। पूरे चुनाव अभियान के दौरान दूर-दराज के गांवों में भी लाउडस्पीकर के जरिए लगातार इन गीतों को बजाया गया था। इन गीतों में ममता की तमाम योजनाओं की चर्चा भी की गई थी।
पार्टी के एक नेता बताते हैं कि सरकार की ओर से महिलाओं के लिए शुरू भाग्यश्री और कन्याश्री जैसी योजनाओं ने विधानसभा चुनाव में महिला वोटरों को पार्टी की ओर खींचने में काफी अहम भूमिका निभाई थी। बीते विधानसभा चुनाव में जीत के बाद ममता ने महिलाओं के लिए गृहलक्ष्मी और लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाएं शुरू की थी। इसके तहत हर महिला के बैंक खाते में पांच सौ से 1000 तक की रकम के अलावा मुफ्त राशन की व्यवस्था है। पार्टी लोकसभा चुनाव के प्रचार में इन दोनों योजनाओं को भी ममता की टाप गारंटी के तौर पर पेश करना चाहती है।
टीएमसी के तमाम नेताओं और मंत्रियों को प्रचार के अलावा अपनी नियमित प्रेस कांफ्रेंस में भी इन योजनाओं की चर्चा करने का निर्देश दिया गया है। पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, मोदी की तमाम योजनाओं के जवाब में ममता की योजना सामने रख कर भाजपा से मुकाबले की रणनीति बनाई गई है। इसके तहत केंद्र की योजनाओं को फेल और ममता की योजनाओं को कामयाब बताया जाएगा।
दूसरी ओर, भाजपा ममता बनर्जी सरकार और उसके मंत्रियों के खिलाफ शिक्षक भर्ती घोटाला, चिटफंड घोटाला, राशन घोटाला, पशु तस्करी घोटाला और कोयला खनन घोटाला जैसे मुद्दे तो पहले से ही उठाती रही हैं। लेकिन अब उसे संदेशखाली के तौर पर महिला उत्पीड़न का एक ठोस मुद्दा मिल गया है। वह इस मुद्दे को अपने राजनीतिक हित में भुनाने में जुटी है। इसी कड़ी में पार्टी ने बशीरहाट संसदीय से संदेशखाली की एक पीड़िता रेखा पात्रा को अपना उम्मीदवार बनाया है। संदेशखाली इलाका बांग्लादेश की सीमा से सटी बशीरहाट संसदीय क्षेत्र में ही है।
भाजपा के इस आक्रामक प्रचार की काट के लिए तृणमूल कांग्रेस ने संदेशखाली में प्रचार की रणनीति में आमूल-चूल बदलाव किया है। पार्टी के नेता वहां यौन उत्पीड़न और अत्याचार के अभियुक्त शहाजांह शेख, शिबू हाजरा और उत्तम सर्दार जैसे पार्टी के निष्कासित नेताओं के कुकर्मों के लिए माफी मांगते हुए लोगों से तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करने की अपील कर रहे हैं। इलाके में पार्टी के पोस्टर या बैनर नहीं लगाए गए हैं। कोई जनसभा भी नहीं हो रही है। पार्टी के नेताओं के अलग-अलग गुट घर-घर जाकर लोगों को समझाने में जुटे हैं।
इस मुद्दे को बेअसर करने के लिए ही पार्टी ने बशीरहाट सीट पर पिछली बार जीतने वाली अभिनेत्री नुसरत जहां का टिकट काटते हुए इस बार पूर्व सांसद और जरी के कारोबारी हाजी नुरुल इस्लाम को दोबारा मैदान में उतारा है। इस्लाम वर्ष 2009 में इस सीट से जीत चुके हैं।
उसके बाद वर्ष 2016 और 2021 में उन्होंने लगातार दो बार विधानसभा चुनाव जीता है। संदेशखाली की घटना के दौरान नुसरत के रवैए से उन पर काफी सवाल उठे थे और लोगों में उनके प्रति भारी नाराजगी थी। संदेशखाली की महिलाएं जब यौन उत्पीड़न के खिलाफ सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रही थी, नुसरत सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें पोस्ट करने में मशगूल थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल बंगाल में मोदी की गारंटी के मुकाबले ममता की गारंटी की रणनीति असरदार नजर आ रही है। लेकिन आम लोगों पर इसका कितना असर पड़ेगा, इस बारे में कुछ कहना अभी जल्दबाजी होगी।
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