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Lok Sabha Election 2024 Result: ऐतिहासिक फैसलों की सीरीज को तीसरे कार्यकाल में आगे बढ़ाएंगे नरेंद्र मोदी
सार
नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्र सरकार ने पिछले दस साल के दौरान अनेक ऐतिहासिक फैसले लिए जिससे देश का मान-सम्मान बढ़ा। सितंबर 2013 में जब भाजपा ने बुजुर्ग नेता लालकृष्ण आडवाणी की नाराजगी को धता बता कर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद उम्मीदवार घोषित किया, तभी यह तय हो गया कि यह दक्षिणपंथी पार्टी हिंदुत्व की विचारधारा को प्रमोट करने जा रही है, क्योंकि मोदी भाजपा को कट्टर हिंदूवादी चेहरा थे।
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पीएम मोदी जनसभा को संबोधित करते हुए।
- फोटो : X/BJP4India
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विस्तार
लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम के आ रहे रूझानों से धीरे-धीरे यह साफ होता जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी की अगुआई में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की लोकसभा सीट संख्या 272 प्लस होने की पूरी संभावना है। अगर यह रूझान अंततः परिणाम में तब्दील हो जाता है तो इसका मतलब यह होगा कि भाजपा नीत एनडीए सरकार बनेगी और नरेंद्र दामोदरदास मोदी लगातार तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे।
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भारतीय राजनीति के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है कि जब कोई दक्षिणपंथी पार्टी लगातार तीसरे टर्म में चुनाव जीतकर केंद्र में सरकार बनाने जा रही है। सन् 1976 में जब 42वें संविधान संशोधन के ज़रिए भारतीय संविधान में 'सेक्यूलर' शब्द को शामिल किया गया था, तब किसी ने सोचा भी नहीं था कि कभी कोई ऐसा व्यक्ति भी प्रधानमंत्री पद पर बैठेगा जो केवल सेक्यूलर शब्द का विरोध ही नहीं करेगा बल्कि देश की राजनीति को ही एक नई दिशा देगा और हिंदुओं की बात करेगा। लेकिन यह सच हो रहा है।
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सितंबर 2013 में जब भाजपा ने बुजुर्ग नेता लालकृष्ण आडवाणी की नाराजगी को धता बता कर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद उम्मीदवार घोषित किया, तभी यह तय हो गया कि यह दक्षिणपंथी पार्टी हिंदुत्व की विचारधारा को प्रमोट करने जा रही है, क्योंकि मोदी भाजपा को कट्टर हिंदूवादी चेहरा थे। मोदी के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनते ही देश में मोदी की लहर चलने लगी। मोदी ने यह नारा दिया कि कांग्रेस का 60 साल दिया मुझे 60 महीने दीजिए। इसके जवाब में गठबंधन के युग में जी रही भारतीय राजनीति में देश की जनता ने भाजपा को स्पष्ट बहुमत दे दिया।
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2014 में पूरी दुनिया ने देखा कि जिस नरेंद्र मोदी पर अमेरिका ने अपने यहां आने पर प्रतिबंध लगा रखा था, उसी मोदी को भारत की जनता ने सिर आंखों पर बिठाया और लगभग 25 साल बाद देश का ताकतवर प्रधानमंत्री दिया जो देश हित में बिना किसी हिचकिचाहट या तनाव के कोई फैसला ले सके। नरेंद्र मोदी ने भी जनता को मायूस नहीं किया और शानदार ढंग से प्रधानमंत्री के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्र सरकार ने पिछले दस साल के दौरान अनेक ऐतिहासिक फैसले लिए जिससे देश का मान-सम्मान बढ़ा। सरकार के उन फैसलों में सबसे ऊपर जम्मू-कश्मीर का मसला रहा। निश्चित रूप से जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35 अ का खात्मा नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक उपलब्धि रही। अपने इस फैसले से मोदी ने अपना नाम इतिहास में दर्ज करवा लिया है। 26 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के बाद से ही भारत अनुच्छेद 370 और 35 अ का दंश झेल रहा था।
मोदी का एक और फैसला ऐतिहासिक रहा। वह फैसला था ट्रिपल तलाक विरोधी कानून। ट्रिपल तलाक की शिकार शाहबानो को सुप्रीम कोर्ट से मिले न्याय को बदलने के लिए राजीव गांधी ने संसद में कानून बनाया था। अपने दूसरे कार्यकाल में मोदी सरकार ने राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार की भूल को ठीक किया और मुस्लिम महिलाओं के लिए दिवास्वप्न बने ट्रिपल तलाक को आपराधिक कृत्य घोषित करने का साहस जुटाया।
इससे पहले नरेंद्र मोदी ने अपने पहले कार्यकाल में जम्मू-कश्मीर के उरी में आर्मी के बेस कैंप पर आतंकवादी हमले के जवाब में सर्जिकल स्ट्राइक की। भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में जाकर वहां प्रशिक्षण ले रहे आतंकवादियों को मार गिराया। वहीं पुलवामा हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में बने जैश-ए-मोहम्मद के कई ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। पाकिस्तान को इस एयर स्ट्राइक की भनक भी नहीं लगी. ज्ञात हो कि मोदी सरकार ने इससे पहले उरी हमले के जवाब में सर्जिकल स्ट्राइक की थी।
यूं तो 1971 का युद्ध हारने के बाद पाकिस्तान की ओर से सैकड़ों बार भारतीय क्षेत्र में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर आतंकी हमले किए गए, लेकिन कभी किसी भी सरकार ने जवाबी कार्रवाई का साहस नहीं किया लेकिन मोदी सरकार ने दुनिया को सख्त संदेश देते हुए आतंकवाद के स्रोत क्षेत्र पर दो-दो बार हमले किए। इससे मोदी के नेतृत्व में देश का भरोसा बढ़ा। यही वजह है कि 2019 के चुनाव में भाजपा को इस देश की जनता ने 303 सीटें दी और एनडीए को बहुमत दे दिया।
नरेंद्र मोदी ने इस्लामी देशों की परवाह न करते हुए व्यापक राष्ट्रीय हित में इजराइल के संबंध को प्रगाढ़ किया। उन्होंने केवल इजराइल की यात्रा ही नहीं की बल्कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्ह्यू को भारत में आमंत्रित किया। सही मायने में नेहरू के बाद मोदी के रूप में देश को विश्व नेता मिला। इतना ही नहीं भारत जी-20 जैसे संगठन का नेतृत्व किया जिसके सदस्य अमेरिका, रूस, चीन, इंग्लैंड और फ्रांस जैसे देश हैं। अब मोदी अपनी उसी यात्रा को आगे बढ़ाते हुए तीसरे कार्यकाल में भी ऐतिहासिक फैसले लेने से पीछे नहीं हटेंगे। देशवासी उनसे यही उम्मीद कर रहे हैं।
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