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न भाजपा, न कांग्रेस
Mon, 01 Apr 2019 01:02 AM IST
Avdhesh Kumar
तवलीन सिंह
तवलीन सिंह
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Mon, 01 Apr 2019 01:02 AM IST
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उत्तर प्रदेश में मुस्लिमों का वोट इस बार भाजपा को नहीं जाएगा। मुसलमानों में गहरी मायूसी है, क्योंकि उनको अब दिखने लगा है कि कांग्रेस की धर्मनिरपेक्षता भी खोटी है। प्रियंका गांधी पिछले दिनों वाराणसी गई थीं, जहां उनके हाथ में आरती की थाली थी। गांव में दाखिल होते ही मस्जिद दिखी। गांव उत्तर प्रदेश में था, लेकिन मैं उसका नाम बताने की आवश्यकता नहीं समझती, क्योंकि मस्जिद के बाहर बैठे बुजुर्ग मुसलमानों से मैंने जो बातें सुनीं, इन दिनों वैसी बातें हर मुस्लिम बस्ती में सुनने को मिलती हैं।
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उत्तर प्रदेश में इस तरह की बातें मुसलमान ज्यादा करते हैं, क्योंकि इस राज्य के मुख्यमंत्री भगवाधारी महंत हैं, जिनकी राजनीतिक यात्रा राम जन्मभूमि आंदोलन से शुरू हुई थी। उत्तर प्रदेश में सत्ता संभालते ही योगी आदित्यनाथ ने ऐसे निर्णय लिए हैं, ऐसी नीतियां बनाई हैं, जिनसे मुसलमानों को लगता है कि ये उनके भले के लिए नहीं हैं। सो उस मस्जिद के बाहर बैठे बुजुर्ग मुसलमानों के साथ मैं जब बातें करने लगी, तो मुझे आश्चर्य नहीं हुआ, जब उन्होंने कहा कि कुछ मुस्लिम नौजवान अब मजदूरी करके गुजारा करने पर मजबूर हैं, क्योंकि उनके रोजगार के साधन बंद हो चुके हैं। मुझसे कहा गया, 'मुसलमान अक्सर चमड़ा उद्योगों में या गोश्त की दुकानों और बूचड़खानों में काम करते थे या फिर पशु पालते थे।
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पर नाजायज उद्योगों को बंद करने के बहाने ये सब काम काफी हद तक बंद कर दिए गए हैं। मैंने जब उनसे पूछा कि क्या मुसलमानों को अब लगता कि नरेंद्र मोदी का सबका साथ, सबका विकास वाला वादा सिर्फ जुमला था, तो सबने निस्संकोच स्वीकार किया कि ऐसा ही है। योगी आदित्यनाथ ने हाल में गर्व से कहा था कि भाजपा की सरकार बनने के बाद उत्तर प्रदेश में एक भी दंगा नहीं हुआ है। दंगे नहीं हुए हैं, यह बात सच है, लेकिन यह भी सच है कि मुसलमानों में आजकल एक गहरी मायूसी दिखती है।
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मायूसी का कारण केवल नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता नहीं है। मायूसी इसलिए भी है, क्योंकि जो मुसलमान कांग्रेस की बांहों में सुरक्षा महसूस करते थे, उनको अब दिखने लग गया है कि कांग्रेस की धर्मनिरपेक्षता खोटी है। सो यह कहना गलत न होगा कि उत्तर प्रदेश में मुसलमानों के वोट मायावती और अखिलेश की पार्टियों को जाएंगे। मैंने जब इन बुजुर्गों से पूछा कि क्या प्रियंका गांधी के आने से कांग्रेस की स्थिति पहले से अच्छी हो गई है, तो उन्होंने कहा कि अभी तक तो ऐसा नहीं लगता, क्योंकि कांग्रेस जमीन पर नहीं दिखती है।
जब संस्था ही नहीं रही, तो प्रियंका गांधी क्या कर सकेंगी?जिस दिन मेरी उन बुजुर्ग मुस्लिमों के साथ बातें हो रही थीं, उसी दिन प्रियंका गांधी के लोगों ने बताया कि वह उत्तर प्रदेश के दौरे पर अयोध्या आने वाली हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश के अपने पहले दौरे में कांग्रेस अध्यक्ष की बहन प्रियंका गांधी गंगा जी के रास्ते वाराणसी गई थीं, जहां उनके हाथों में आरती की थाली दिखी। मुसलमानों की नजरों में साफ जाहिर हो गया है कि राहुल गांधी की कांग्रेस अब वह कांग्रेस नहीं रही है, जो कभी अपने आपको सेक्यूलरिज्म की ठेकेदार मानती थी।
सो कैसे सुरक्षित रहेगा वह मुस्लिम वोट बैंक, जिसके होते कांग्रेस उत्तर प्रदेश में कभी हारती नहीं थी? उसका वोट बैंक अब बिखर-सा गया है। उत्तर प्रदेश के इस दौरे पर अगर कोई चीज मुझे बिल्कुल स्पष्ट दिखी, तो सिर्फ यह कि मुसलमानों का वोट इस बार भाजपा को किसी भी हालत में नहीं जाएगा। पिछले लोकसभा चुनाव में काफी हद तक मुसलमानों ने मोदी को वोट किया था, वर्ना भाजपा को इस राज्य की अस्सी में से इकहत्तर सीटें कभी न मिलतीं। इस बार ऐसा नहीं होने वाला, यह पूरी तरह स्पष्ट है।