फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   lok sabha chunav 2019 sadhvi pragya thakur support nathuram godse mahatma gandhi bjp congress

साध्वी के बयानों से लड़खड़ाती भाजपा कभी नहीं जीत पाएगी आस्था में बसे गांधी से

Fri, 17 May 2019 01:32 PM IST
Sushant jha सुशांत कुमार झा
Updated Fri, 17 May 2019 01:32 PM IST
विज्ञापन
lok sabha chunav 2019  sadhvi pragya thakur support nathuram godse mahatma gandhi bjp congress
बीजेपी, राहुल या सोनिया गांधी से तो जीत सकती है, लेकिन महात्मा गांधी से लड़ना उसे भारी पड़ेगा।  - फोटो : अमर उजाला

बीजेपी, राहुल या सोनिया गांधी से तो जीत सकती है, लेकिन महात्मा गांधी से लड़ना उसे भारी पड़ेगा। गांधी से तो गोरे अंग्रेज तक लड़ नहीं पाए, बीजेपी तो "हिंदूवादी" पार्टी है। गांधी भारत की आत्मा हैं। इस देश में हजारों सालों में जो कुछ भी बेहतरीन हुआ है, गांधी उनमें से बहुत सी बातों को प्रतिध्वनित करते हैं।

विज्ञापन


बीजेपी स्लॉग ऑवर में लड़खड़ा रही है। वह चुनाव भले ही जीत जाए या जीतने के कगार पर पहुंच जाए लेकिन साध्वी प्रज्ञा उसके लिए समस्या बनती रहेंगी। मैं इस नतीजे पर नहीं पहुंचा हूूं कि वे वाकई आंतकवादी हैं, लेकिन उनके बयानों से पार्टी कई बार बैकफुट पर गई है। इसमें संदेह नहीं है। उनमें राजनीतिक कौशल भी नहीं है और वे आगे भी पार्टी को शर्मिंदा नहीं करेंगी इसका कोई कारण नहीं दिखता। 

विज्ञापन

lok sabha chunav 2019  sadhvi pragya thakur support nathuram godse mahatma gandhi bjp congress
गांधी से लड़ना आसान नहीं है। और जनमानस के भीतर बसे गांधी से लड़ना तो और भी आसान नहीं है - फोटो : फाइल फोटो

गांधी से लड़ना आसान नहीं है।
गांधी से लड़ना आसान नहीं है। और जनमानस के भीतर बसे गांधी से लड़ना तो और भी आसान नहीं है। सन् सैंतालिस में बंटवारे की वजह से देश में जिस तरह का ध्रुवीकरण था, जनसंघ या किसी हिंदूवादी दल के लिए एकाध दशक में देश की सत्ता में आना आसान था, लेकिन गांधीजी की हत्या और हत्या के आरोप ने संघ और जनसंघ को देश की जनता की निगाह में संदेहास्पद बना दिया। जनसंघ/बीजेपी को फिर से पनपने में 40-50 साल लग गए। आस्था में बसे हुए गांधी ने उसे 50 साल पीछे धकेल दिया था। बीजेपी अगर फिर से वही ग़लती करेगी तो उसे फिर से इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। 

दरअसल, गांधी खुद हिंदूवादी थे, बल्कि उनका हिंदू धर्म अपने धर्म को अंदर से मजबूत और बुराइयों को दूर कर देश की आजादी और विश्व कल्याण में योगदान देने वाला था। वामपंथी इतिहासकारों ने उन्हें 'हिंदू राइट' कहा तो जिन्ना उनको अपना 'हिंदू प्रतिस्पर्धी' मानते थे।

इतिहासकार पेट्रिक फ्रेंच लिखते हैं- गांधी के भारत में आगमन, विशाल जनसभाओं और प्रतिरोध के उनके अभिनव तरीकों और उसे मिले जनसमर्थन ने मुसलमानों को चौकन्ना कर दिया और मुस्लिम लीग को मजबूत करने में बड़ी भूमिका अदा की।

जाहिर है, आमतौर पर मुसलमान भी गांधी को हिंदू नेता मानते थे जिसका प्रमाण उन चुनावों में मिला जिसमें मुस्लिम लीग के उम्मीदवार मुसलमानों के लिए आरक्षित लगभग सारी सीटों पर चुनाव जीत गए और कांग्रेस फेल रही। एक ऐसे "हिंदू गांधी" से "हिंदू बीजेपी" लड़ना चाहती है। एक सॉफ्ट हिंदुत्व से हार्ड हिंदुत्व लड़ना चाहता है जिसने आज से 7 दशक पहले भी उसे राजनीतिक और नैतिक लड़ाई में मात दे दी थी. 

सवाल यह है कि बीजेपी इस द्वंद से कब बाहर निकलेगी?
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed