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दक्षिण भारत के 5 राज्य और 128 सीटों का होगा दिल्ली की सत्ता में खास रोल, कुछ ऐसा है गणित

Thu, 23 May 2019 10:23 AM IST
Gautam Chaudhary गौतम चौधरी
Updated Thu, 23 May 2019 10:23 AM IST
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Lok Sabha Chunav 2019 Result News Update: south india bjp congress aiadmk dmk
दक्षिण भारत में कुल 5 राज्य हैं। इन राज्यों में लोकसभा की कुल 129 सीटें हैं। इसमें से इस बार 128 पर चुनाव हो रहे हैं। - फोटो : ANI

अमूमन ऐसा कहा जाता रहा है कि दिल्ली की सत्ता बिहार और उत्तर प्रदेश के रास्ते मिलती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। पिछले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन को उत्तर प्रदेश से 73 और बिहार से कुल 32 सीटें मिली थी, जिसके कारण एनडीए बड़ी ताकत के रूप में उभरा और उसने दिल्ली में सरकार बना ली। एग्जिट पोल चाहे जो कहे, लेकिन इस लोकसभा चुनाव में एनडीए या फिर कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की ताकत उत्तर प्रदेश और बिहार में कमजोर होने वाली है। ऐसे में दोनों गठबंधनों की नजर दक्षिण के सांसदों पर है। 

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क्या है दक्षिण की सीटों का गणित? 
दक्षिण भारत में कुल 5 राज्य हैं। इन राज्यों में लोकसभा की कुल 129 सीटें हैं। इसमें से इस बार 128 पर चुनाव हो रहे हैं। तमिलनाडु की एक सीट का चुनाव रद्द कर दिया गया है। यदि तमिलनाडु में सत्ता विरोधी लहर चली तो फिर दक्षिण में यूपीए का बोलबाला होगा। जबकि आंध्र प्रदेश में जगन मोहन के नेतृत्व वाली पार्टी वाईएसआर कांग्रेस को अधिक सीटें मिली तो दक्षिण भारत में एनडीए का पलड़ा भारी हो जाएगा। आपको बता दें कि आंध्र प्रदेश में कुल सीटों की संख्या 25 है और पिछले चुनाव में भाजपा और तेलगू देशम पार्टी संयुक्त रूप से चुनाव लड़ी थी।
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बताया जा रहा है कि वाईएसआर कांग्रेस की स्थिति अच्छी है और वह कम से कम 15 सीटों पर चुनाव जीत सकती है। यदि ऐसा हुआ तो दक्षिण में एनडीए का दबदबा बढ़ेगा। - फोटो : फाइल फोटो

क्या बढ़ेगा एनडीए का दबदबा? 
यहां टीडीपी को 16 और भाजपा को 3 सीटें मिली थीं, लेकिन इस बार मामला बिल्कुल उलटा है। इस बार भाजपा अकेले दम पर चुनाव लड़ रही है जबकि ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस भाजपा को अपना समर्थन देगी। बताया जा रहा है कि वाईएसआर कांग्रेस की स्थिति अच्छी है और वह कम से कम 15 सीटों पर चुनाव जीत सकती है। यदि ऐसा हुआ तो दक्षिण में एनडीए का दबदबा बढ़ेगा।

वैसे तेलंगाना में भी वहां की सत्तारूढ़ पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति की स्थिति अच्छी बताई जा रही है। अभी हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में समिति को अजेय बहुमत मिली। वह एक बार फिर से सत्ता में लौट आई है। समिति के नेता एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री के. चन्द्रशेखर राव का भाजपा के साथ नजदीकी बताया जाता है। अगर ऐसा है तो केन्द्र में सरकार के गठन में राव की भूमिका भी अहम होगी, इसलिए यदि ऐसा कहा जाए कि इस बार दिल्ली की सत्ता पर दक्षिण की पकड़ मजबूत होगी तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। 

कर्नाटक में कैसी है भाजपा की स्थिति?  
इधर कर्नाटक में पहले से भाजपा मजबूत स्थिति में है। आपसी खींचतान और सत्ता विरोधी लहर के कारण कर्नाटक में भाजपा अभी भी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। पिछले चुनाव में भाजपा को यहां से कुल 18 सीटें मिली थी। इस बार अगर एग्जिट पोल पर भरोसा करें तो भाजपा यहां से 24 सीटें जीत रही है, लेकिन प्रेक्षकों का कहना है कि भाजपा अपने पुराने सीटों को बचाने में यहां कामयाब रहेगी।

इसलिए दक्षिण से भाजपा को बड़ी आशा है जबकि कांग्रेस ने भी इस बार दक्षिण भारत में अपना जोर लगाया है। इसका जीता-जागता उदाहरण कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी खुद है। उन्होंने अमेठी के अलावा केरल के वायनाड़ से भी नामांकन किया और संसदीय चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस को दक्षिण पर पूरा भरोसा है। होगा क्या यह तो शाम तक पता चलेगा, लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश बिहार नहीं सत्ता की चाबी दक्षिण के सांसदों के पास रहने की पूरी उम्मीद है। 
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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