मप्र में दिग्गी राजा पर ऐसे भारी पड़ी साध्वी, इसलिए बढ़ रहा है प्रज्ञा ठाकुर का विजय रथ
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17वीं लोकसभा के चुनाव परिणाम लगातार आ रहे हैं। कई दिग्गज सीटों पर चौंकाने वाले परिणाम सामने आ रहे हैं। मप्र में जहां एक बार फिर से भाजपा का परचम लहराता दिख रहा है वहीं राजधानी भोपाल से साध्वी प्रज्ञा दिग्गज कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह से आगे दिखाई दे रही है। जानकारों की मानें तो जैसे चुनाव परिणाम सामने आ रहे हैं साध्वी की जीत तकरीबन तय है।
बहरहाल, इस बार 2019 के संसदीय आम चुनाव में जिस प्रकार बिहार की बेगूसराय, उत्तर प्रदेश की वाराणसी व अमेठी और केरल की वायनाड सीट बेहद चर्चित रही। उसी प्रकार मध्य प्रदेश की भोपाल संसदीय सीट ने भी राष्ट्रीय मीडिया में खूब सुर्खियां बटोरी। दरअसल, इस सीट से जहां एक ओर कांग्रेस के कद्दावर नेता, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह चुनाव लड़ रहे थे, तो दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने मालेगांव आतंकी विस्फोट की आरोपी रहीं साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को चुनाव मैदान में उतारा।
टिकट मिलते ही चर्चा में रहीं साध्वी प्रज्ञा सिंह
जिस दिन से साध्वी को टिकट मिली, उसी दिन से वह चर्चा में आ गईं। साध्वी पहले से विवादास्पद रही हैं। उनपर आरोप था कि उन्होंने मालेगांव आतंकी विस्फोट में अहब भूमिका निभाई। यही नहीं, बाद में उनके ऊपर कई आरोप लगे और कई वर्षों तक साध्वी जेल में बंद रहीं।
साध्वी के बारे में क्या कहती है भोपाल की जनता
साध्वी के बारे में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी रहे और अपने राष्ट्रपिता वाले बयान पर भाजपा के सभी पदों से बर्खास्त हुए अनिल सौमित्र कहते हैं- साध्वी में वह तमाम विशेषताएं हैं जो एक प्रभावशाली राजनेता में होनी चाहिए। हालांकि इस मामले में कई स्थानीय लोगों के विचार अलग रहे। कई लोग साध्वी को टिकट देने पर ही सवाल उठाते रहे और वहीं कई जगह तो भाजपा के अंदर ही अंतर्विरोध साफ दिखाई दिया।
भाजपा के लिए क्यों जरूरी था साध्वी का चुनाव लड़ना?
इस मामले में प्रदेश के पूर्व भाजपा अध्यक्ष का विचार थोड़ा अलग रहा। वे कहते हैं- साध्वी का चुनाव लड़ना हमारे लिए बेहद जरूरी था। जिस प्रकार साध्वी को कांग्रेस और साम्यवादियों ने दिखाने का प्रयास किया, उस परिस्थिति में साध्वी का चुनाव में उतारा जाना जरूरी था। हम साफ-साफ यह मानकर चलते हैं कि साध्वी किसी भी तरह से आरोपी नहीं थीं। लेकिन यूपीए की सरकार ने गलत तरीके से साध्वी को फंसाया था और जब सरकार माननीय मोदी जी की बनी तो साध्वी सभी मामलों में बेदाग साबित हो रही हैं।
हिन्दुत्व के मुद्दे पर कौन रहा किस पर भारी?
इस मामले में समय जगत समाचार पत्र के संपादक अशोक त्रिपाठी कहते हैं- साध्वी के कारण पूरे देश में एक माहौल तो बना, लेकिन स्थानीय स्तर पर साध्वी को जिस प्रकार दिग्विजय को चुनौती देनी चाहिए थी, उस प्रकार वह चुनौती नहीं दे पाईं। साध्वी के पास कोई खास मुद्दे नहीं थे, लेकिन दिग्विजय के पास हिन्दुत्व का भी हथियार था और वह विकास के मॉडल को जनता के सामने प्रस्तुत करने में सफल रहे। साध्वी और साध्वी की टीम के लोग ऐसा करने में सफल नहीं हो सके।
वैसे दिग्विजय सिंह की छवि सॉफ्ट हिन्दुत्व की छवि रही है। वे सदा अपने आप को हिन्दुत्व की सनातनी परंपरा के साथ जोड़ने की बात करते रहे हैं। इस बार के चुनाव में भी साध्वी से कहीं ज्यादा संत महंतों की टोली दिग्विजय सिंह के साथ दिखी। यही नहीं दिग्विजय सिंह ने जातीय आधार पर भी वोटों का ध्रुवीकरण में सफलता हासिल कर ली, लेकिन जिस तरह के परिणाम इस समय दिखाई दे रहे हैं वह बेहद अलग हैं।
साध्वी के चुनाव में उतरने से कैसे बदला भोपाल का माहौल
इन तमाम बातों के बीच साध्वी ने भोपाल में एक नए प्रकार का माहौल पैदा किया। यदि साध्वी नहीं होती तो भोपाल के मुसलमान एक मंच पर नहीं आते। साथ ही अनुसूचित जनजाति व अनुसूचित जाति के वोटर गोलबंद नहीं हो पाते। वैसे भोपाल में भाजपा जीतती रही है। इस बार भी उम्मीद भाजपा के जीत की है और जिस तरह से परिणाम सामने आ रहे हैं वह कमोबेश संभावना के अनुरूप ही हैं। साध्वी ने दिग्विजय सिंह को घेरने का पूरा प्रयास किया। साध्वी के पास एक अचूक हथियार था और वह हथियार हिन्दुत्व का था।
चुनाव प्रचार में भाजपा से ज्यादा संघ से मदद
इस मामले में राष्ट्रीय स्वयंसेक संघ के कार्यकर्ता और साध्वी के चुनाव प्रचार में प्रभावी भूमिका निभाने वाले मिहिर झा कहते हैं- अगर दिग्विजय सिंह के पास अल्पसंख्यक कम्युनिटी का वोट है, तो हमारे पास भी लगभग पांच लाख कैडर वोट हैं। इन वोटों की बदौलत भोपाल में अच्छी स्थिति में हैं। मिहिर ने यह भी बताया कि प्रचार और कई मामलों में प्रथम चरण में तो हम थोड़ा कमजोर पड़े, लेकिन बाद में हम कार्यकर्ता की बदौलत दिग्विजय सिंह से आगे निकल गए। हालांकि मिहिर ने यह भी कहते हैं कि जिस प्रकार का सहयोग संघ के कार्यकर्ताओं का मिल रहा है, उस प्रकार का सहयोग भाजपा की ओर से नहीं मिल रहा। यह सोच का विषय है।
भाजपा को मिलेगा किन मुद्दों का लाभ
मिहिर का कहना है कि मुद्दों के मामले में हमने राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा जबरदस्त तरीके से उठाया है और यह मुद्दा लोगों को अपील भी करता दिखा। साथ ही साध्वी जी की अपनी छवि का भी लाभ हमें मिलेगा। उन्होंने कहा कि दो बातें हमारे पक्ष में जाती दिख रही हैं। एक साध्वी जी की छवि और दूसरा राष्ट्रीय स्वाभिमान का मुद्दा। उन्होंने बताया कि एक तीसरा मुद्दा भी है जो भोपाल के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावशाली भूमिका निभाता रहा और वह किसानों के ऋण माफी का रहा। प्रदेश सरकार ने किसान ऋण माफी के नाम पर किसानों से केवल ठगी की और यह हमारे लिए बहुत बढ़िया मुद्दा रहा जिसका लाभ हमें मिला।
कुल मिलाकर दोनों ही पक्ष के लोग अपने-अपने दावे पर अडिग हैं लेकिन भाजपा का अंतरकलह और साध्वी के बीच का गतिरोध भाजपा को यहां से फायदा पहुंचता हुआ साफ दिखाई दे रहा है।
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