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Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   Life Stream: The memory of love is eternal; the principle is to embrace compassion.

जीवन धारा: प्रेम की स्मृति तो अमर है; सूत्र- करुणा अपनाएं

Thu, 28 May 2026 08:20 AM IST
Pavan विक्टर ह्यूगो
विक्टर ह्यूगो Published by: Pavan Updated Thu, 28 May 2026 08:20 AM IST
सार

प्रेम मनुष्य के जीवन में सूर्य के समान है। वह ऐसा अदृश्य पंख है, जिसके सहारे आत्मा इस कठोर संसार के ऊपर उठ पाती है और शायद यही कारण है कि जब सब कुछ नष्ट हो जाता है, तब भी प्रेम की स्मृति बनी रहती है।

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Life Stream: The memory of love is eternal; the principle is to embrace compassion.
प्रेम की स्मृति तो अमर है - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यश, धन, सत्ता, ज्ञान जैसी आकांक्षाएं आखिरकार हृदय की एक मौन भूख के आगे छोटी पड़ जाती हैं। और यह इस बात को जानने की भूख कि कोई हमें चाहता है, कोई हमारे अस्तित्व को आवश्यक समझता है, कोई हमारी मौजूदगी से अपने जीवन में प्रकाश अनुभव करता है। मनुष्य केवल रोटी से जीवित नहीं रहता। उसके भीतर एक और गहरी जरूरत है। यह जरूरत है प्रेम की, अपनत्व की, उस अदृश्य स्पर्श की, जो आत्मा को यह कहता है कि तुम इस विशाल और उदास ब्रह्मांड में व्यर्थ नहीं हो। जिसे प्रेम मिलता है, वह निर्धन होकर भी धनी है और जिसे प्रेम नहीं मिलता वह संसार जीत कर भी भीतर से खोखला है।
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प्रेम मनुष्य के जीवन में सूर्य के समान है। सूर्य केवल प्रकाश ही नहीं देता, वह वस्तुओं को अर्थ भी देता है। उसी प्रकार प्रेम केवल हृदय को प्रसन्न ही नहीं करता, वह जीवन के संघर्षों को सहने योग्य भी बनाता है। कभी-कभी संसार मनुष्य के प्रति कठोर हो जाता है। तब समाज उसे अपराधी कहता है। परिस्थितियां उसे तोड़ देती हैं। पर, यदि उसी क्षण कोई एक आत्मा उसके भीतर छिपे प्रकाश को पहचान ले, तो वह मनुष्य फिर से उठ सकता है। प्रेम में पुनर्जीवित करने की शक्ति है। सबसे दुखद जीवन वह नहीं, जिसमें गरीबी हो, बल्कि वह है, जिसमें कोई ऐसा न हो, जो आपके लौटने की प्रतीक्षा करे। मनुष्य अक्सर प्रेम को अधिकार समझ लेता है। वह सोचता है कि प्रेम का अर्थ किसी को बांध लेना है। प्रेम बंधन नहीं, मुक्ति है। जो सचमुच प्रेम करता है, वह दूसरे को स्वतंत्रता से भर देता है। प्रेम कहता है-मैं तुम्हें इसलिए नहीं चाहता कि तुम मेरे हो, मैं तुम्हें इसलिए चाहता हूं, क्योंकि तुम्हारे होने से संसार अधिक सुंदर हो जाता है। और प्रेम केवल युवक और युवती के बीच की भावना नहीं है। एक मां का अपने बच्चे के माथे पर रखा हाथ, एक मित्र का संकट में मौन साथ, एक बूढ़े पिता की आंखों में अपने बच्चों के लिए चिंता-ये सब प्रेम के ही रूप हैं। मानवता इन्हीं सूक्ष्म और अदृश्य धागों से बुनी हुई है।
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मैंने यह भी देखा है कि जो लोग सबसे अधिक प्रेम देते हैं, वे अक्सर पीड़ा भी अधिक सहते हैं। महान वही है, जो पीड़ित होकर भी प्रेम करना बंद नहीं करता। घृणा जितनी आसान है, प्रेम उतना ही कठिन है। घृणा मनुष्य को सिकोड़ देती है, प्रेम उसे उसके स्वार्थ से ऊपर उठा कर समस्त मानवता से जोड़ देता है। और अंत में, जीवन की संध्या में जब मनुष्य पीछे मुड़ कर देखता है, तब उसे अपने पद, पुरस्कार, संग्रह आदि याद नहीं रहते। उसे याद रहते हैं कुछ चेहरे, कुछ हाथ, जिन्होंने कठिन वक्त में उसके कंधों को छुआ था। वही क्षण उसके जीवन की वास्तविक संपत्ति होते हैं। प्रेम वह अदृश्य पंख है, जिसके सहारे आत्मा इस कठोर संसार के ऊपर उठ पाती है। और शायद यही कारण है कि जब सब कुछ नष्ट हो जाता है, तब भी प्रेम की स्मृति बनी रहती है। वही मनुष्य की सबसे अमर चीज है।
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सूत्र- करुणा अपनाएं
मनुष्य की सबसे बड़ी संपत्ति धन, यश या सत्ता नहीं है, बल्कि वह प्रेम है, जो उसे यह विश्वास दिलाता है कि इस विशाल संसार में कोई उसके होने से अपना जीवन उज्ज्वल महसूस करता है। प्रेम ही वह शक्ति है, जो टूटे हुए हृदय को फिर से जीना सिखाती है, अंधकार में आशा जगाती है। जीवन तभी सुंदर होगा, जब हम प्रेम और करुणा को अपनाएंगे।
 
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